भारतीय हॉकी टीम ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए फाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। मौजूदा चैंपियन भारत ने सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया को किसी भी स्तर पर मुकाबले में टिकने नहीं दिया। मोहाली में बुधवार को खेले गए इस अहम मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और गोलों की झड़ी लगा दी। टीम इंडिया ने कोरिया को 8-1 के बड़े अंतर से शिकस्त देकर खिताब की ओर एक और कदम बढ़ा दिया।
इस जीत में भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। शिलानंद लाकड़ा और दिलप्रीत सिंह ने दो-दो गोल करके टीम की सफलता में अहम योगदान दिया। वहीं कप्तान हरमनप्रीत सिंह, सुखजीत सिंह, अंगद बीर सिंह और विवेक सागर प्रसाद ने एक-एक बार गेंद को गोलपोस्ट तक पहुंचाया। भारतीय टीम ने मैच के दौरान अपनी आक्रामक रणनीति के साथ-साथ बेहतरीन तालमेल का भी परिचय दिया।
अब भारत की नजरें खिताब बचाने पर टिकी हैं। फाइनल में उसका सामना जापान से होगा। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 6 नवंबर को खेला जाएगा। जापान ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए मलेशिया को सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के जरिए मात दी और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया और मलेशिया की टीमें कांस्य पदक के लिए आमने-सामने होंगी।
पांच मैचों में अजेय रहने के बाद सेमीफाइनल में भी भारत का जलवा
भारतीय टीम का इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। सेमीफाइनल तक पहुंचने के दौरान टीम इंडिया ने लीग चरण के सभी पांच मुकाबलों में जीत दर्ज की थी। इस दमदार प्रदर्शन के दम पर भारत 15 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर रहा। टीम ने अपने विरोधियों के खिलाफ कुल 34 गोल किए, जबकि भारतीय डिफेंस को केवल पांच गोल खाने पड़े।
लीग राउंड के अंतिम मुकाबले में भी भारत ने दक्षिण कोरिया को एकतरफा अंदाज में हराया था। उस मैच में भारतीय खिलाड़ियों ने आठ गोल दागे थे, जबकि कोरियाई टीम एक भी गोल नहीं कर सकी थी। सेमीफाइनल में एक बार फिर दोनों टीमों का सामना हुआ तो नतीजा लगभग वैसा ही रहा। हालांकि इस बार कोरिया ने एक गोल जरूर किया, लेकिन भारतीय आक्रमण के सामने उसकी एक नहीं चली।
भारत ने इस मुकाबले के जरिए यह भी दिखाया कि टीम का प्रदर्शन किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। अलग-अलग खिलाड़ियों ने गोल करने की जिम्मेदारी उठाई। फॉरवर्ड लाइन ने जहां लगातार दबाव बनाया, वहीं मिडफील्ड से मिले सटीक पास ने गोल करने के कई अवसर तैयार किए।
पहले हाफ में ही कोरिया की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका
मैच की शुरुआत से ही भारतीय टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। खिलाड़ियों के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला और भारतीय आक्रमण ने कोरियाई डिफेंस को लगातार परेशानी में रखा। मुकाबले के चौथे मिनट में ही भारत को पहली बड़ी सफलता मिल गई।
दिलप्रीत सिंह ने बाईं ओर से तेजी से आगे बढ़ते हुए गेंद को शिलानंद लाकड़ा तक पहुंचाया। शिलानंद ने मौके को भांपते हुए शानदार फिनिशिंग की और गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। इस गोल के साथ भारत ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। शुरुआती मिनटों में मिली इस सफलता से भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया।
हालांकि दक्षिण कोरिया ने भी जल्द ही वापसी करने की कोशिश की। नौवें मिनट में हान सांगजुन ने गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। बराबरी के बाद मुकाबले में कुछ देर के लिए रोमांच बढ़ा, लेकिन भारतीय टीम ने विपक्षी खिलाड़ियों को ज्यादा समय तक राहत नहीं दी।
कोरियाई गोल के ठीक अगले मिनट भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अपनी खास ड्रैग-फ्लिक का इस्तेमाल करते हुए गेंद को गोलपोस्ट का रास्ता दिखाया। उनके इस शानदार प्रयास ने भारत को फिर से 2-1 की बढ़त दिला दी।
पहले क्वार्टर के अंतिम हिस्से में भारतीय टीम ने एक और गोल करके अपनी स्थिति मजबूत कर ली। 13वें मिनट में हरमनप्रीत की ड्रैग-फ्लिक को कोरियाई गोलकीपर ने रोकने की कोशिश की, लेकिन गेंद उसके पास से निकलकर गोल के सामने रह गई। शिलानंद लाकड़ा ने रिबाउंड पर तेजी दिखाई और गेंद को नेट में पहुंचा दिया। इस तरह भारत ने पहला क्वार्टर समाप्त होने तक 3-1 की बढ़त बना ली।
दूसरे क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों ने बरसाए गोल
दूसरे क्वार्टर में मुकाबले का पूरा रुख भारत के पक्ष में हो गया। भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रमण की रफ्तार कम नहीं होने दी और लगातार गोल करने के मौके बनाए। कोरिया की टीम भारतीय खिलाड़ियों की तेज गति और सटीक पासिंग का जवाब देने में नाकाम नजर आई।
19वें मिनट में भारत को चौथा गोल मिला। संजय ने शानदार तरीके से गेंद सुखजीत सिंह तक पहुंचाई। सुखजीत ने बिना गलती किए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। इस गोल के साथ भारतीय टीम ने अपनी बढ़त 4-1 कर ली।
अभी कोरियाई खिलाड़ी इस झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि दिलप्रीत सिंह ने पांचवां गोल कर दिया। 20वें मिनट में दक्षिण कोरिया की ओर से हुई एक कमजोर पासिंग का भारतीय खिलाड़ी ने पूरा फायदा उठाया। दिलप्रीत ने अंगद बीर सिंह के साथ तेजी से गेंद का आदान-प्रदान किया और शानदार अंदाज में गोल दाग दिया।
भारत की आक्रामक रणनीति का असर लगातार दिखाई दे रहा था। कोरिया के खिलाड़ियों को गेंद पर नियंत्रण बनाने और भारतीय हमलों को रोकने में काफी परेशानी हो रही थी। 25वें मिनट में एक बार फिर हरमनप्रीत सिंह ने अपनी शानदार पासिंग से टीम के लिए गोल का अवसर बनाया।
उन्होंने लंबी दूरी से गेंद दिलप्रीत की ओर भेजी। दिलप्रीत ने गोलपोस्ट के नजदीक बेहद सीमित कोण से शानदार शॉट लगाया। गेंद को रोकने के लिए कोरियाई गोलकीपर को मौका नहीं मिला और भारत का स्कोर 6-1 हो गया।
दूसरे क्वार्टर के बाद भारतीय टीम की बढ़त इतनी मजबूत हो चुकी थी कि कोरिया के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल दिखाई देने लगा। भारत ने पहले हाफ में ही अपनी ताकत का प्रदर्शन कर दिया था।
तीसरे और चौथे क्वार्टर में भी जारी रहा भारतीय दबदबा
दूसरे क्वार्टर में छह गोल करने के बाद भी भारतीय टीम ने अपनी आक्रामकता कम नहीं की। तीसरे क्वार्टर में खिलाड़ियों ने गेंद को अपने कब्जे में रखते हुए कोरियाई टीम पर दबाव बनाए रखा। इसी दौरान भारत को सातवां गोल करने में सफलता मिली।
मैच के 36वें मिनट में जरमनप्रीत सिंह ने दाईं ओर से गेंद को आगे बढ़ाया और शानदार पास दिया। इस पास पर अंगद बीर सिंह ने अपनी स्टिक लगाकर गेंद की दिशा बदल दी। गेंद सीधे गोलपोस्ट में चली गई और भारतीय टीम ने स्कोर 7-1 कर दिया।
अंगद के इस गोल में डिफ्लेक्शन की अहम भूमिका रही। हॉकी में जब कोई खिलाड़ी अपनी स्टिक लगाकर पहले से आ रही गेंद की दिशा बदल देता है, तो उसे डिफ्लेक्शन कहा जाता है। इस तकनीक के कारण गोलकीपर को गेंद की नई दिशा समझने के लिए बहुत कम समय मिलता है।
मुकाबले का अंतिम गोल विवेक सागर प्रसाद के नाम रहा। 54वें मिनट में उन्होंने गेंद पर नियंत्रण बनाया और रिवर्स-हिट के जरिए जोरदार शॉट लगाया। गेंद गोलकीपर के पैड से टकराकर गोलपोस्ट के अंदर चली गई। इस गोल के साथ भारत ने अपनी बढ़त 8-1 कर दी।
आखिरी मिनटों में भी भारतीय टीम ने खेल पर पकड़ बनाए रखी। दक्षिण कोरिया के खिलाड़ी भारतीय डिफेंस को भेदने में सफल नहीं हो सके। आखिरकार भारत ने आठ गोल की शानदार जीत के साथ फाइनल में प्रवेश कर लिया।
हरमनप्रीत और दिलप्रीत भारतीय टीम के प्रमुख गोल स्कोरर
इस टूर्नामेंट में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है। उनकी ड्रैग-फ्लिक टीम के लिए गोल करने का बड़ा हथियार बनी हुई है। सेमीफाइनल से पहले हरमनप्रीत के नाम नौ गोल दर्ज थे। कोरिया के खिलाफ एक गोल करने के बाद उनके कुल गोलों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
दिलप्रीत सिंह भी इस प्रतियोगिता में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। सेमीफाइनल से पहले उन्होंने चार गोल किए थे। दक्षिण कोरिया के खिलाफ दो गोल करने के बाद अब उनके खाते में छह गोल हो गए हैं। सुखजीत सिंह भी टीम के लिए अहम योगदान दे रहे हैं। उनके नाम पहले चार गोल थे और सेमीफाइनल में एक और गोल करने के बाद उनकी संख्या पांच हो गई है।
जुगराज सिंह के नाम सेमीफाइनल से पहले तीन गोल दर्ज थे। भारतीय टीम के लिए अलग-अलग खिलाड़ियों का गोल करना फाइनल से पहले सकारात्मक संकेत है। इससे विरोधी टीम के लिए किसी एक खिलाड़ी को रोककर भारत के आक्रमण को कमजोर करना आसान नहीं होगा।
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का शानदार इतिहास
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत साल 2011 में हुई थी। इस प्रतियोगिता में एशिया की छह प्रमुख हॉकी टीमें हिस्सा लेती हैं। भारत इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीमों में शामिल है और अब तक पांच बार चैंपियन बन चुका है।
भारत ने पहली बार 2011 में यह खिताब अपने नाम किया था। उस समय फाइनल में उसका मुकाबला पाकिस्तान से हुआ था। निर्धारित समय तक मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद भारत ने शूटआउट में जीत हासिल कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था।
इसके बाद 2016 में भी भारतीय टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर दूसरी बार खिताब जीता। भारतीय हॉकी टीम ने समय-समय पर इस प्रतियोगिता में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। मौजूदा टूर्नामेंट में भी टीम उसी लय को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है।
साल 2026 की एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पंजाब में किया जा रहा है। प्रतियोगिता के मुकाबले 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक निर्धारित हैं। जालंधर और मोहाली को टूर्नामेंट की मेजबानी की जिम्मेदारी मिली है। लीग चरण के मुकाबले जालंधर में आयोजित किए गए, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल के लिए मोहाली का मैदान चुना गया है।
दक्षिण कोरिया के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी
भारतीय हॉकी टीम का दक्षिण कोरिया के खिलाफ रिकॉर्ड भी काफी अच्छा रहा है। दोनों देशों की टीमें अब तक कुल 26 बार आमने-सामने आ चुकी हैं। इनमें भारत ने 16 मुकाबलों में जीत दर्ज की है, जबकि सात मैच बराबरी पर समाप्त हुए। दक्षिण कोरिया को केवल तीन मैचों में सफलता मिली है।
मौजूदा एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी भारत ने कोरिया के खिलाफ अपना दबदबा बनाए रखा। लीग चरण में दोनों टीमों के बीच हुए मुकाबले में भारत ने 8-0 से जीत दर्ज की थी। इसके बाद सेमीफाइनल में भी भारतीय खिलाड़ियों ने 8-1 से बड़ी जीत हासिल की।
अब जापान को हराकर खिताब बचाने की चुनौती
सेमीफाइनल में बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब भारतीय टीम का पूरा ध्यान फाइनल पर होगा। 6 नवंबर को होने वाले खिताबी मुकाबले में भारत के सामने जापान की चुनौती रहेगी। जापान ने पहले सेमीफाइनल में मलेशिया को पेनल्टी शूटआउट में हराकर फाइनल में प्रवेश किया है।
भारत के पास लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर चैंपियन बनने का अवसर है। टीम की फॉरवर्ड लाइन बेहतरीन लय में है और कप्तान हरमनप्रीत की अगुवाई में खिलाड़ी आक्रामक हॉकी खेल रहे हैं। हालांकि फाइनल में जापान को हल्के में लेना भारतीय टीम के लिए सही नहीं होगा।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय खिलाड़ी मोहाली में ही एक और यादगार जीत दर्ज करके एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर पाते हैं या जापान इस बार भारत की राह में चुनौती खड़ी करता है। फिलहाल सेमीफाइनल में कोरिया के खिलाफ आठ गोल की जीत ने भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं।




