मानव अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए NASA के Artemis II mission ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड बना लिया है। इससे पहले यह उपलब्धि 1970 के Apollo 13 के नाम थी।
इस मिशन के दौरान चारों अंतरिक्ष यात्री चांद के पीछे से गुजरते हुए करीब 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक पहुंच गए। यह दूरी अब तक किसी भी इंसानी मिशन द्वारा तय की गई सबसे अधिक दूरी है। इसी दौरान Orion spacecraft चांद के काफी करीब भी आया, जहां इसकी दूरी महज 6,545 किलोमीटर रह गई। अब अंतरिक्ष यात्री वापसी के रास्ते पर हैं। यह स्पेसक्राफ्ट चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल एक ‘गुलेल’ की तरह कर रहा है, जिससे इसे पृथ्वी की ओर गति मिल रही है। यही तकनीक पहले अपोलो-13 मिशन में भी अपनाई गई थी।
मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह के कई अहम हिस्सों की तस्वीरें लेने का काम सौंपा गया है। इनमें अरबों साल पहले बने बड़े क्रेटर्स और बेसिन शामिल हैं, जिनसे चांद के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी। इस मिशन की एक खास बात यह भी है कि इसमें शामिल क्रू ने चांद के कुछ नए क्रेटर्स के नाम रखने का सुझाव दिया है। एक क्रेटर का नाम ‘इंटीग्रिटी’ और दूसरे का नाम कमांडर की दिवंगत पत्नी के सम्मान में ‘कैरॉल’ रखने की बात कही गई है।
आर्टेमिस-II मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच करना है, ताकि भविष्य में इंसानों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में सुरक्षित रखा जा सके। यह मिशन चांद पर उतरने के लिए नहीं है, लेकिन आगे के चंद्र अभियानों की नींव मजबूत करेगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें एक महिला भी हैं। खास बात यह है कि इस मिशन के जरिए पहली बार कोई महिला और एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चांद के इतने करीब पहुंचे हैं।
मिशन की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई थी और यह करीब 10 दिनों तक चलेगा। 11 अप्रैल को स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग करेगा। अपोलो मिशन जहां ‘स्पेस रेस’ का हिस्सा था, वहीं आर्टेमिस प्रोग्राम भविष्य की तैयारी है। इसका लक्ष्य चांद पर स्थायी ठिकाना बनाना और आगे चलकर मंगल ग्रह तक इंसानों को पहुंचाना है।


