भारतीय महिला हॉकी टीम को विमेंस हॉकी वर्ल्ड कप के राउंड-2 में अपने पहले मुकाबले में निराशा हाथ लगी है। दुनिया की नंबर-1 टीम नीदरलैंड ने भारत को 2-0 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी मजबूत स्थिति और पक्की कर ली। इस जीत के साथ मेजबान नीदरलैंड ने सेमीफाइनल में जगह बना ली, जबकि भारतीय टीम के सामने अब आगे बढ़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाला मुकाबला बेहद अहम हो गया है। भारत को 23 अगस्त को रात 10:30 बजे ऑस्ट्रेलिया से भिड़ना है और इस मैच में जीत टीम की आगे की राह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नीदरलैंड के एम्सटेलवीन में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने कई मौकों पर अच्छा डिफेंस दिखाया और दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शामिल नीदरलैंड को लंबे समय तक चुनौती भी दी। हालांकि, पेनल्टी कॉर्नर पर मिले मौकों को गोल में बदलने में नाकाम रहने का खामियाजा भारत को भुगतना पड़ा। दूसरी ओर, नीदरलैंड ने अपने अवसरों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए दो गोल किए और मैच को अपने नाम कर लिया।
मैच की शुरुआत भारतीय टीम के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। मुकाबले के शुरुआती कुछ मिनटों में ही नीदरलैंड ने भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। तीसरे मिनट में सर्कल के अंदर एक घटना के बाद मेजबान टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। भारतीय खिलाड़ी सुशीला के पैर पर गेंद लगने के कारण यह मौका नीदरलैंड के हाथ आया।
नीदरलैंड की स्टार खिलाड़ी यिबी यानसन ने इस अवसर को पूरी तरह भुनाया। उन्होंने तेज और सटीक ड्रैगफ्लिक लगाई, जिसे भारतीय टीम के लिए रोक पाना मुश्किल साबित हुआ। गेंद पोस्ट के पास डिफेंडर के पैरों के बीच से निकलते हुए गोल में पहुंच गई। इसके साथ ही नीदरलैंड ने मैच में 1-0 की शुरुआती बढ़त हासिल कर ली।
यह गोल यानसन के लिए भी खास रहा, क्योंकि टूर्नामेंट में यह उनका सातवां गोल था। खास बात यह है कि उनके अब तक के सभी गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए हैं। नीदरलैंड की टीम ने शुरुआत में मिली इस सफलता के बाद भारत पर दबाव बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने जल्दी ही खुद को संभाल लिया।
एक गोल से पिछड़ने के बावजूद भारतीय टीम ने घबराहट नहीं दिखाई। मिडफील्ड और डिफेंस में खिलाड़ियों ने बेहतर तालमेल के साथ खेलते हुए नीदरलैंड के कई हमलों को रोका। भारतीय गोलकीपिंग भी इस दौरान चर्चा में रही। बिचु देवी और सविता ने कई मौकों पर शानदार बचाव करते हुए मेजबान टीम को आसानी से अपनी बढ़त बढ़ाने का मौका नहीं दिया।
पहले दो क्वार्टर के दौरान नीदरलैंड ने लगातार आक्रमण करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने काफी हद तक उसे नियंत्रित रखा। इसके बावजूद भारत को बराबरी का गोल करने के लिए मिले मौकों का लाभ उठाना था। भारतीय टीम को 19वें मिनट में ऐसा ही एक बड़ा अवसर मिला, जब नीदरलैंड के 5 मीटर फाउल के बाद भारत को पेनल्टी कॉर्नर दिया गया।
भारत की ओर से दीपिका ने पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैगफ्लिक लगाने की जिम्मेदारी संभाली। उनका प्रयास दमदार था, लेकिन गेंद नीदरलैंड के डिफेंडर के पैर से टकरा गई। इससे भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया और टीम के पास स्कोर बराबर करने का शानदार मौका था।
दूसरे प्रयास में भी भारतीय टीम गोल नहीं कर सकी। इस बार गेंद नीदरलैंड की फर्स्ट रनर की स्टिक से टकराकर बाहर निकल गई। लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिलने के बावजूद भारत का खाली हाथ रहना मैच का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। अगर भारतीय टीम इनमें से किसी एक मौके को गोल में बदलने में सफल रहती, तो मुकाबले की तस्वीर अलग हो सकती थी।
हाफ टाइम तक स्कोर 1-0 रहा और भारतीय टीम केवल एक गोल से पीछे थी। यह स्थिति भारत के लिए पूरी तरह निराशाजनक नहीं थी, क्योंकि उसने शुरुआती झटके के बाद मजबूत वापसी की थी। टीम ने दुनिया की नंबर-1 साइड को लंबे समय तक दूसरा गोल करने से रोके रखा और मुकाबले को प्रतिस्पर्धी बनाए रखा।
लेकिन तीसरे क्वार्टर में नीदरलैंड ने फिर अपनी ताकत दिखाई। 38वें मिनट में मेजबान टीम को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। नीदरलैंड की खिलाड़ी सैंडर्स बाएं छोर से सर्कल के भीतर घुसने का प्रयास कर रही थीं। इसी दौरान उनका शॉट भारतीय डिफेंडर के पैर से टकराया, जिसके बाद अंपायर ने पेनल्टी कॉर्नर का फैसला दिया।
इस बार पेनल्टी कॉर्नर को फ्रेंडरिक माटला ने संभाला। उन्होंने जोरदार ड्रैगफ्लिक लगाई और भारतीय गोलकीपर को कोई मौका नहीं दिया। गेंद सीधे गोल में पहुंची और नीदरलैंड की बढ़त 2-0 हो गई। टूर्नामेंट में यह माटला का दूसरा गोल था।
दूसरा गोल भारत के लिए बड़ा झटका था, क्योंकि टीम अब दो गोल से पीछे हो गई थी। तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक स्कोर 2-0 रहा और अंतिम क्वार्टर में भारतीय टीम के सामने वापसी करने की कठिन चुनौती थी। भारत को कम समय में दो गोल करने थे, जबकि सामने दुनिया की सबसे मजबूत और संगठित टीमों में से एक मौजूद थी।
इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने मैच के अंतिम चरण में संघर्ष जारी रखा। टीम ने आक्रमण तेज करने की कोशिश की और नीदरलैंड के डिफेंस को परेशान करने के कुछ मौके भी बनाए। हालांकि, मेजबान टीम की रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने भारत को गोल करने का अवसर नहीं दिया।
मैच के 59वें मिनट में भारत के पास स्कोर करने का सबसे अच्छा मौका आया। नवनीत कौर ने सेंटर से मिले पास को नियंत्रित किया और गोल की ओर जोरदार हिट लगाई। उनका शॉट काफी खतरनाक था और ऐसा लग रहा था कि भारत आखिरकार गोल का खाता खोल सकता है।
लेकिन नीदरलैंड की गोलकीपर विनेंदाल ने शानदार बचाव कर भारतीय उम्मीदों को झटका दे दिया। गेंद उनके हेलमेट से टकराकर बाहर चली गई। इस दौरान गोलकीपर को चोट भी लगी और कुछ समय के लिए खेल रुक गया। हालांकि, इलाज के बाद वे दोबारा मैदान पर लौटीं और मैच पूरा किया।
अंतिम मिनटों में भारतीय टीम कोई गोल नहीं कर सकी और मुकाबला 2-0 से नीदरलैंड के नाम रहा। आखिरी क्वार्टर गोलरहित रहा, जिसके साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम को राउंड-2 के अपने पहले मैच में हार स्वीकार करनी पड़ी।
इस मुकाबले में भारत के प्रदर्शन की सबसे बड़ी सकारात्मक बात यह रही कि टीम ने दुनिया की नंबर-1 नीदरलैंड के खिलाफ पूरी तरह हार नहीं मानी। शुरुआती गोल खाने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने रक्षात्मक रूप से काफी अनुशासित प्रदर्शन किया। गोलकीपर्स और डिफेंडरों ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार काम किया और नीदरलैंड को खुलकर गोल करने का अवसर नहीं दिया।
हालांकि, आक्रमण में मिली संभावनाओं को गोल में नहीं बदल पाना भारत के लिए सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई। खासतौर पर पेनल्टी कॉर्नर पर भारत को मिले लगातार मौकों से टीम को बेहतर परिणाम की उम्मीद थी। दूसरी तरफ नीदरलैंड ने पेनल्टी कॉर्नर पर अपनी विशेषज्ञता दिखाई और इसी रणनीति के जरिए दोनों गोल हासिल किए।
अब भारतीय टीम की नजर अपने अगले मुकाबले पर होगी, जिसमें उसका सामना ऑस्ट्रेलिया से होना है। 23 अगस्त को रात 10:30 बजे होने वाला यह मैच भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीदरलैंड के खिलाफ हार के बाद टीम के पास अब ऑस्ट्रेलिया को हराकर अपनी चुनौती को मजबूत बनाए रखने का अवसर है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को अपनी पेनल्टी कॉर्नर रणनीति में सुधार करना होगा। नीदरलैंड के खिलाफ मिले मौकों से यह साफ हुआ कि टीम गोल करने की स्थिति तक पहुंच रही है, लेकिन अंतिम निष्पादन में कमी रह जा रही है। अगर भारत अगले मैच में इन मौकों को गोल में बदलने में सफल रहता है, तो परिणाम उसके पक्ष में जा सकता है।
साथ ही भारतीय डिफेंस को भी ऑस्ट्रेलिया के तेज आक्रमण के खिलाफ पूरी सतर्कता बरतनी होगी। नीदरलैंड के मुकाबले में शुरुआती मिनट में गोल खाने से भारत दबाव में आ गया था। अगले मैच में टीम की कोशिश शुरुआत से ही मजबूत डिफेंस के साथ खेलने और विरोधी टीम को आसान पेनल्टी कॉर्नर नहीं देने की होगी।
भारतीय महिला हॉकी टीम के सामने अब एक ही लक्ष्य होगा, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज करना। नीदरलैंड के खिलाफ मिली हार ने टीम की राह कठिन जरूर बनाई है, लेकिन मुकाबला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भारत ने इस मैच में जिस तरह संघर्ष किया, उससे यह संकेत जरूर मिला कि टीम मजबूत विरोधियों को चुनौती देने की क्षमता रखती है।
अब देखना होगा कि भारतीय खिलाड़ी नीदरलैंड के खिलाफ हुई गलतियों से कितना सीख पाती हैं। पेनल्टी कॉर्नर पर बेहतर कन्वर्जन, आक्रमण में अधिक सटीकता और शुरुआती मिनटों में मजबूत डिफेंस भारत की सफलता की कुंजी हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाला अगला मुकाबला भारतीय टीम के लिए केवल एक मैच नहीं, बल्कि टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदों को जिंदा रखने की बड़ी परीक्षा होगा।




