प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के आर्थिक एवं तकनीकी संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने वहां की प्रमुख कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करते हुए भारत में मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, रिसर्च, सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से एक ऐसे वैश्विक केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, जहां उत्पादन के साथ-साथ नई तकनीक विकसित करने और रिसर्च करने की भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
द हेग में आयोजित CEO राउंडटेबल बैठक को इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। बैठक में भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी उद्योगपतियों को भारत की आर्थिक क्षमता, युवा प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से परिचित कराया।
इस दौरान दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर सेक्टर में सहयोग को विशेष महत्व मिला। Tata Electronics और ASML के बीच हुआ सहयोग समझौता भारत के चिप निर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति देने के लिए प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को जल्द आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
CEO राउंडटेबल में वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधि हुए शामिल
द हेग में आयोजित CEO राउंडटेबल बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, एविएशन, खाद्य एवं पेय पदार्थ और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों की भागीदारी रही।
डच प्रधानमंत्री Rob Jetten की मौजूदगी में हुई इस बैठक में भारत में कारोबार और निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने कंपनियों को भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़े घरेलू बाजार का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
भारत की बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल उपयोग और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार हो रहा निवेश विदेशी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान बन रहा है।
भारत-यूरोपीय संघ FTA को लेकर भी हुई चर्चा
CEO बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों का मानना है कि एक मजबूत व्यापार समझौता भारत और यूरोप के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के प्रवाह को बढ़ावा दे सकता है।
FTA को लेकर उद्योग जगत की दिलचस्पी इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे दोनों बाजारों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाएं आसान होने की उम्मीद रहती है। साथ ही इससे कंपनियों को नई सप्लाई चेन विकसित करने और अपने कारोबार को दूसरे बाजारों तक विस्तार देने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन का महत्व तेजी से बढ़ा है। ऐसे में भारत और यूरोप के बीच बेहतर आर्थिक साझेदारी दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
धोलेरा सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट में Tata Electronics और ASML की साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण गतिविधियां सामने आईं। गुजरात के धोलेरा में विकसित किए जा रहे सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के संदर्भ में Tata Electronics और ASML के बीच साझेदारी को अहम माना जा रहा है।
सेमीकंडक्टर आज आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा प्रणालियों और मेडिकल उपकरणों से लेकर औद्योगिक मशीनों तक, लगभग हर आधुनिक तकनीक में चिप्स का इस्तेमाल होता है।
वैश्विक स्तर पर चिप सप्लाई को लेकर सामने आई चुनौतियों के बाद कई देश अपने घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। भारत भी इसी दिशा में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और विदेशी तकनीकी कंपनियों के साथ सहयोग करने की कोशिश कर रहा है।
ASML को सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक मशीनरी और तकनीकी समाधानों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण वैश्विक कंपनी माना जाता है। वहीं Tata Electronics भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता विकसित करने पर निवेश कर रही है। ऐसे में दोनों कंपनियों के बीच सहयोग भारत के चिप इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने की कोशिश
भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर निर्माण को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देख रहा है। वैश्विक चिप सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए देश में मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी कंपनियों को संकेत दिया कि भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े कारोबार के लिए बड़ा बाजार और मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग बढ़ रही है और मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक कई क्षेत्रों में चिप्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
धोलेरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और सहायक उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक क्षमता पर रखा जोर
CEO राउंडटेबल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आर्थिक विकास और बदलते कारोबारी माहौल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत तेज गति से इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
भारत में हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट, पोर्ट और डिजिटल नेटवर्क के विकास पर लगातार निवेश किया जा रहा है। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार ने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि क्लीन एनर्जी और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में भारत की भूमिका बढ़ रही है। ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई ऊर्जा तकनीकों में निवेश आने वाले वर्षों में भारत के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
आर्थिक सुधारों का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी कंपनियों के सामने भारत में किए गए आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कारोबार को आसान बनाने के लिए टैक्स व्यवस्था, श्रम कानूनों और विभिन्न नियामकीय प्रक्रियाओं में बदलाव किए हैं।
भारत में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए कई क्षेत्रों में डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया गया है। इससे कंपनियों के लिए सरकारी सेवाओं और अनुमतियों तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की गई है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने स्पेस, माइनिंग और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए अवसर बढ़ाए हैं। इन क्षेत्रों में निजी निवेश आने से नई तकनीकों के विकास और उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में न देखने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी निवेशकों से भारत को सिर्फ उत्पादन केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि रिसर्च और इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में कुशल युवा प्रतिभाएं मौजूद हैं, जो नई तकनीकों और वैश्विक उद्योगों के विकास में योगदान दे रही हैं।
भारत में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिसर्च से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारतीय प्रतिभा और वैश्विक कंपनियों की विशेषज्ञता का मेल आने वाले वर्षों में इनोवेशन को गति दे सकता है। इससे भारत में उच्च कौशल वाली नौकरियों के अवसर बढ़ने के साथ-साथ नई तकनीकी क्षमताएं विकसित होने की संभावना है।
Philips से लेकर Port of Rotterdam तक कई कंपनियां हुईं शामिल
CEO राउंडटेबल बैठक में नीदरलैंड और वैश्विक कारोबार से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें Philips, Heineken, KLM Royal Dutch Airlines, NXP Semiconductors और Port of Rotterdam जैसे नाम शामिल हैं।
इन कंपनियों का कारोबार अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे में बैठक में भारत के साथ संभावित सहयोग के कई अलग-अलग अवसरों पर चर्चा की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और एविएशन तक, विभिन्न सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।
भारत का बड़ा घरेलू बाजार और नीदरलैंड की तकनीकी एवं औद्योगिक विशेषज्ञता दोनों देशों के कारोबारियों के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने के नए रास्ते खोल सकती है।
भारत में पहले से कारोबार कर रही हैं 300 से ज्यादा डच कंपनियां
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान बताया कि 300 से अधिक डच कंपनियां पहले से भारत में कारोबार कर रही हैं। इनमें विभिन्न उद्योगों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं, जो भारत में निवेश और व्यापार गतिविधियां संचालित कर रही हैं।
भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। नीदरलैंड यूरोप के प्रमुख कारोबारी केंद्रों में शामिल है और वहां का लॉजिस्टिक्स एवं पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दूसरी ओर, भारत का विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था डच कंपनियों के लिए विस्तार की संभावनाएं पैदा करती है। दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार को बढ़ाने के लिए तकनीक, जल प्रबंधन, ऊर्जा, कृषि और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर भी मौजूद हैं।
नीदरलैंड के साथ भारत की तकनीकी साझेदारी का बढ़ता दायरा
भारत और नीदरलैंड के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश नई तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।
नीदरलैंड जल प्रबंधन और समुद्री इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। भारत में भी कई शहरों और राज्यों के सामने जल संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन और पानी के पुन: उपयोग जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे में तकनीकी सहयोग से दोनों देशों को एक-दूसरे के अनुभवों से लाभ मिल सकता है।
इसी तरह ग्रीन एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी साझेदारी की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपने ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि यूरोप में भी टिकाऊ ऊर्जा और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था को लेकर निवेश बढ़ रहा है।
निवेश और रोजगार के नए अवसरों पर नजर
भारत में विदेशी निवेश बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। खासकर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश से उच्च कौशल वाले रोजगार की मांग बढ़ने की संभावना रहती है।
इसके अलावा, किसी बड़े उद्योग के स्थापित होने से उसके आसपास सप्लायर, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, सर्विस प्रोवाइडर और अन्य सहायक कारोबार भी विकसित हो सकते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर लाभ मिलने की संभावना रहती है।
प्रधानमंत्री मोदी की बैठक में जिस तरह मैन्युफैक्चरिंग के साथ डिजाइन, रिसर्च और इनोवेशन पर जोर दिया गया, उससे संकेत मिलता है कि भारत विदेशी निवेश को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उच्च तकनीकी क्षमताओं के विकास से जोड़ना चाहता है।
भारत और नीदरलैंड के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकता है। CEO राउंडटेबल में हुई चर्चाओं और Tata Electronics तथा ASML के बीच सहयोग को इसी व्यापक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।




