मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में लगातार बढ़ रही अस्थिरता और अनिश्चितता के चलते निवेशकों में घबराहट का माहौल बना रहा, जिसका सीधा प्रभाव घरेलू इक्विटी बाजारों पर पड़ा। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई और प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

सुबह के शुरुआती कारोबार में ही बाजार दबाव में आ गया। बीएसई सेंसेक्स लगभग 800 अंक तक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी 250 अंकों से अधिक फिसल गया। निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ गई और सेंटीमेंट कमजोर होता चला गया।

शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट

करीब 9:20 बजे के आसपास सेंसेक्स 784.77 अंक यानी लगभग 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,458.57 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी समय निफ्टी भी 234.80 अंक या लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,131.90 के स्तर पर पहुंच गया।

बाजार की इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, खासकर उन लोगों की जिन्होंने हाल ही में तेजी के दौर में निवेश किया था। शुरुआती घंटों में ही बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली और बिकवाली देखने को मिली।

मध्य पूर्व तनाव का वैश्विक असर

विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की स्थिरता को प्रभावित किया है। इस क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

इसका असर एशियाई बाजारों पर भी देखा गया, जहां जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य प्रमुख बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों के कमजोर होने का सीधा प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

सभी प्रमुख सेक्टरों में दबाव

बाजार में गिरावट का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स पर देखने को मिला। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, रियल्टी, मेटल और एफएमसीजी सेक्टरों में व्यापक बिकवाली दर्ज की गई। अधिकांश प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सबसे पहले जोखिम वाले सेक्टरों से पैसा निकालते हैं, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो जाती है।

निवेशकों में बढ़ी चिंता

शेयर बाजार में अचानक आई इस गिरावट ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कई निवेशक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या आगे भी जारी रह सकती है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे समय में घबराकर निवेश निर्णय लेना सही नहीं होता। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर तनाव की स्थिति बनी हुई हो।

आने वाले दिनों पर नजर

अब निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक बाजारों के रुझान पर टिकी हुई है। अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर आने वाले दिनों में भी बाजार पर जारी रह सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इस समय सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ही निवेश करना चाहिए।