पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहा सैन्य तनाव अब गंभीर संघर्ष में बदल गया है। दोनों देशों के दावों के अनुसार अब तक 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को आगे भी सख्त सैन्य जवाब देने की चेतावनी दे रहे हैं।
ट्रम्प का बयान: “पाकिस्तान अच्छा कर रहा है”
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस संघर्ष में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के रिश्ते अच्छे हैं और मौजूदा हालात में पाकिस्तान का प्रदर्शन “काफी बेहतर” है।
भारत पर पाकिस्तान का आरोप
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने देश में हो रहे आतंकी हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि इन गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अफगान तालिबान शासित इलाकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कैसे शुरू हुआ संघर्ष
तनाव की चिंगारी गुरुवार देर रात भड़की। दरअसल 22 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगान सीमा के पास एयरस्ट्राइक की थी। इसके जवाब में अफगानिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई हुई, जिसके बाद पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ लॉन्च किया। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल, कंधार, पक्तिया, नंगरहार समेत कई प्रांतों में हमले किए।
पाकिस्तान के दावे बनाम तालिबान के दावे
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, अब तक 274 अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और 400 से ज्यादा घायल हुए हैं। सेना का दावा है कि 115 टैंक और बख्तरबंद वाहन नष्ट किए गए, 74 सैन्य चौकियां तबाह की गईं और 18 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया। पाकिस्तान ने यह भी स्वीकार किया कि उसके 12 सैनिकों की मौत हुई और 27 घायल हुए।
वहीं तालिबान ने इन आंकड़ों को खारिज किया है। उसका कहना है कि केवल 8 से 13 लड़ाके मारे गए हैं। तालिबान ने उल्टा दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और उसने दो सैन्य मुख्यालयों सहित कई चौकियों पर कब्जा किया है। साथ ही चेतावनी दी कि आगे हमला हुआ तो जवाब और भी कठोर होगा।
ड्रोन हमलों के बाद पाकिस्तान में सख्ती
अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने पाकिस्तान के भीतर ड्रोन हमलों के जरिए सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी ओर, पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने बताया कि एबटाबाद, स्वाबी और नौशेरा में छोटे ड्रोन मार गिराए गए और किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान सरकार ने पूरे देश में निजी ड्रोन उड़ाने पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया। एक पूर्व पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने दावा किया कि इस्लामाबाद के पास एक परमाणु ऊर्जा केंद्र समेत अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया, हालांकि सरकार ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
संसद और सरकार का सख्त रुख
पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है। विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी उकसावे का “निर्णायक जवाब” दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराई। सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को अवैध बताते हुए उस पर महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया।
TTP और ISIS पर पहले भी हो चुके हैं हमले
22 फरवरी को की गई पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक को लेकर दावा किया गया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP और ISIS के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 70 से 80 लड़ाके मारे गए। अफगानिस्तान ने इन हमलों की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि इसमें आम नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। कुछ रिपोर्टों में एक ही परिवार के 23 लोगों की मौत की बात भी सामने आई थी। अफगान रक्षा मंत्रालय ने तब ही चेतावनी दे दी थी कि पाकिस्तान को “उचित समय पर करारा जवाब” मिलेगा। इसी पृष्ठभूमि में मौजूदा संघर्ष को देखा जा रहा है।




