हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, व्रत, यात्रा, गृह प्रवेश, विवाह या अन्य मांगलिक कार्य से पहले पंचांग देखकर शुभ समय का चयन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पंचांग केवल तिथि और वार की जानकारी ही नहीं देता, बल्कि इसमें नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त, राहुकाल और अन्य महत्वपूर्ण ज्योतिषीय जानकारियां भी शामिल होती हैं।
9 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। तिथि परिवर्तन के कारण मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत आज ही रखा जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त इस दिन उपवास रखकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण का पूजन करते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी आज का दिन विशेष है क्योंकि दिनभर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा, जप, दान और धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
आज की तिथि (9 अप्रैल 2026)
आज वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रात्रि 09:19 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
चूंकि अष्टमी तिथि रात्रि में प्रारंभ हो रही है, इसलिए धार्मिक परंपराओं के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत आज ही रखा जाएगा।
हिंदू धर्म में अष्टमी तिथि भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व
हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।
यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने, व्रत रखने, मंत्र जाप करने और रात्रि में आरती करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
भक्त इस दिन विशेष रूप से—
- भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करते हैं।
- तुलसी दल अर्पित करते हैं।
- माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं।
- श्रीकृष्ण मंत्रों का जाप करते हैं।
- गीता पाठ या श्रीकृष्ण कथा का श्रवण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
आज का वार और संवत
- वार: गुरुवार
- विक्रम संवत: 2083
गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है।
इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, पीले पुष्प अर्पित करना तथा विष्णु भगवान की पूजा करना शुभ माना जाता है।
आज का योग
आज का दिन दो प्रमुख योगों के कारण भी विशेष माना जा रहा है।
परिघ योग
परिघ योग सायं 05:58 बजे तक रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक योग का अलग महत्व बताया गया है।
पूजा-पाठ, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए योगों का विशेष महत्व माना जाता है।
शिव योग
सायं 05:58 बजे के बाद शिव योग प्रारंभ होगा।
शिव योग को शुभ योगों में गिना जाता है।
इस अवधि में भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।
आज का करण
करण भी पंचांग का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
आज—
- विष्टि करण सुबह 08:12 बजे तक रहेगा।
- इसके बाद बव करण रात्रि 09:19 बजे तक प्रभावी रहेगा।
ज्योतिष के अनुसार विभिन्न करणों का उपयोग शुभ कार्यों के समय निर्धारण में किया जाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
आज—
- सूर्योदय: सुबह 06:02 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:43 बजे
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का उपयोग दैनिक धार्मिक कार्यों, संध्या वंदन, सूर्य उपासना और पंचांग गणना में किया जाता है।
चंद्रोदय और चंद्रास्त
आज के पंचांग के अनुसार—
- चंद्रोदय: 10 अप्रैल को रात्रि 01:28 बजे
- चंद्रास्त: सुबह 10:38 बजे
मासिक जन्माष्टमी के व्रत में चंद्रोदय और अष्टमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।
आज सूर्य और चंद्रमा किस राशि में हैं?
आज—
- सूर्य: मीन राशि में स्थित हैं।
- चंद्रमा: धनु राशि में गोचर कर रहे हैं।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की राशिगत स्थिति का प्रभाव विभिन्न राशियों और दैनिक पंचांग पर माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त
आज का अभिजीत मुहूर्त—
दोपहर 11:58 बजे से 12:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है।
यदि किसी कारणवश अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो तो कई धार्मिक परंपराओं में अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्य करना उचित माना जाता है।
आज का राहुकाल
आज का राहुकाल—
दोपहर 01:58 बजे से 03:33 बजे तक
हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
इसी कारण कई लोग इस समय विवाह, यात्रा, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचते हैं।
गुलिक काल
आज का गुलिक काल—
सुबह 09:13 बजे से 10:48 बजे तक
गुलिक काल का महत्व विभिन्न ज्योतिषीय परंपराओं में अलग-अलग बताया गया है।
कई लोग इस समय महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचने की सलाह देते हैं।
यमगण्ड काल
आज का यमगण्ड काल—
सुबह 06:02 बजे से 07:38 बजे तक
पंचांग के अनुसार इस समय भी नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की परंपरा मानी जाती है।
आज का नक्षत्र
आज चंद्रमा पहले मूल नक्षत्र में रहेंगे।
इसके बाद—
सुबह 08:48 बजे के बाद चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
यह नक्षत्र अगले दिन तक प्रभावी रहेगा।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है।
इस नक्षत्र को ऊर्जा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छा से जोड़ा जाता है।
परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र के प्रभाव वाले लोगों में कुछ सामान्य गुण देखे जा सकते हैं—
- आत्मविश्वास
- साहस
- नेतृत्व क्षमता
- बुद्धिमत्ता
- सकारात्मक सोच
- नए अवसरों को अपनाने की प्रवृत्ति
हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कभी-कभी इनमें—
- अधिक खर्च करने की आदत
- जिद
- अहंकार
- अपनी बात पर अडिग रहने की प्रवृत्ति
भी देखी जा सकती है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति का स्वभाव केवल नक्षत्र के आधार पर निर्धारित नहीं होता। जन्म कुंडली के अन्य ग्रह और योग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज पूजा-पाठ के लिए क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन श्रद्धालु निम्न धार्मिक कार्य कर सकते हैं—
- भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें।
- तुलसी दल अर्पित करें।
- श्रीकृष्ण मंत्रों का जाप करें।
- विष्णु सहस्रनाम या श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।
- पीले पुष्प और फल अर्पित करें।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न या वस्त्र दान करें।
- संध्या समय दीपक जलाकर आरती करें।
यदि कोई व्यक्ति मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रख रहा है, तो उसे अपने परिवार की परंपरा और योग्य आचार्य या पुरोहित द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए।
पंचांग क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?
पंचांग भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, ग्रहों की स्थिति और शुभ-अशुभ समय जैसी जानकारियां शामिल होती हैं, जिनका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यों के समय निर्धारण में किया जाता है।
हालांकि आधुनिक जीवन में लोग अपने दैनिक कार्यों की योजना सुविधा के अनुसार बनाते हैं, फिर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा, व्रत, दान और धार्मिक आयोजनों के लिए आज भी पंचांग का सहारा लेते हैं। 9 अप्रैल 2026 का यह दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, शुभ योगों और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय संयोगों के कारण धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकते हैं तथा शुभ मुहूर्त और पंचांग की जानकारी के आधार पर अपने धार्मिक कार्यों की योजना बना सकते हैं।




