पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। ईरान द्वारा अमेरिका पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इस घटनाक्रम का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जहां ब्रेंट क्रूड फिर से तेज उछाल के साथ 95 डॉलर के पार निकल गया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत को भी कमजोर कर दिया।
गुरुवार सुबह जब बाजार खुला, तो शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव दिखा। BSE Sensex करीब 500 अंक तक गिर गया, जबकि Nifty 50 भी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:38 बजे सेंसेक्स 400 से ज्यादा अंक गिरकर 77,100 के आसपास ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी 23,900 के करीब फिसल गया।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रहीं, जिससे निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनाना शुरू कर दिया। सेंसेक्स के अधिकांश शेयर लाल निशान में खुले और शुरुआती कारोबार में 19 कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
अगर सेक्टर के हिसाब से देखें तो आईटी और बैंकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। Infosys और Adani Ports and Special Economic Zone के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट आई। इसके अलावा Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank और InterGlobe Aviation (IndiGo) के शेयर भी नुकसान में रहे।
हालांकि, बाजार में पूरी तरह निराशा का माहौल नहीं था। कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली, जिससे गिरावट सीमित रही। NTPC, Power Grid Corporation of India, Tata Steel और ITC Limited जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इसके अलावा Tata Consultancy Services और Bharti Airtel ने भी बाजार को कुछ सहारा दिया।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो यहां तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जो यह संकेत देती है कि निवेशक बड़े शेयरों से निकलकर चुनिंदा छोटे और मझोले शेयरों में पैसा लगा रहे हैं। निफ्टी मिडकैप में करीब 0.28% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.57% की तेजी देखी गई।
सेक्टोरल इंडेक्स में मेटल और मीडिया सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तो बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक घटनाक्रमों का असर घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं और आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।




