दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक नक्शा साझा करते हुए इस जलमार्ग का नाम बदलकर “स्ट्रेट ऑफ ट्रंप” रखने का सुझाव दिया। उनके इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और रणनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है।
तेल बाजार में उछाल, आपूर्ति पर असर
इस संवेदनशील मार्ग पर बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI भी बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा।
अमेरिका-ईरान तनाव बना मुख्य कारण
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में अमेरिका और Iran के बीच गहराता टकराव है। हालिया बयानबाजी में ट्रंप ने ईरान की स्थिति को कमजोर बताते हुए संकेत दिया कि मौजूदा हालात में दबाव की नीति जारी रह सकती है।
होर्मुज खोलने पर अमेरिका सख्त
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संकेतों के बावजूद अमेरिका ने नरमी नहीं दिखाई है। Axios की रिपोर्ट बताती है कि किसी बड़े परमाणु समझौते के बिना अमेरिकी रुख में बदलाव की संभावना कम है।
क्यों अहम है यह समुद्री रास्ता?
Strait of Hormuz फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा इस पर काफी हद तक निर्भर करती है।
ट्रंप के नाम बदलने वाले प्रस्ताव को भले ही आधिकारिक रूप नहीं मिला हो, लेकिन इससे जुड़े भू-राजनीतिक संकेतों ने दुनिया भर में नई बहस जरूर छेड़ दी है।




