रूस में वैज्ञानिकों और सरकार के बीच एक ऐसा बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। दावा किया जा रहा है कि इंसान की उम्र को बढ़ाने और बुढ़ापे को धीमा करने की दिशा में रूस लगभग 26 बिलियन डॉलर (2 लाख करोड़ रुपये से अधिक) निवेश कर रहा है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का नाम ‘न्यू टेक्नोलॉजीज फॉर हेल्थ प्रिजर्वेशन’ रखा गया है, जिसकी शुरुआत 2024 में बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक करीब 1.75 लाख लोगों की जिंदगी बचाने या लंबी करने में मदद मिले।
प्रोजेक्ट में क्या-क्या शामिल है?
इस रिसर्च को कई हिस्सों में बांटा गया है। वैज्ञानिकों का फोकस अलग-अलग तकनीकों पर है:
- जीन थेरेपी: कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को डीएनए स्तर पर धीमा करने की कोशिश
- बायोप्रिंटिंग: लैब में मानव अंगों जैसे टिश्यू तैयार कर ट्रांसप्लांट की दिशा में काम
- जेनोट्रांसप्लांटेशन: जेनेटिक रूप से बदले गए सूअरों के अंग इंसानों में इस्तेमाल करने की योजना
- क्रायोथेरेपी: बेहद कम तापमान से खराब टिश्यू या कोशिकाओं का इलाज और नष्ट करना
पुतिन-जिनपिंग बातचीत से जुड़ा विवाद
इस प्रोजेक्ट की चर्चा तब और बढ़ गई जब बीजिंग में एक सैन्य परेड के दौरान व्लादिमिर पुतिन और शी जिनपिंग की बातचीत का एक हिस्सा माइक्रोफोन में रिकॉर्ड हो गया था। उस बातचीत में अंग प्रत्यारोपण और लगातार शरीर के अंग बदलकर लंबे समय तक जीने जैसे विचारों पर चर्चा की बात सामने आई थी। बाद में चीनी मीडिया और क्रेमलिन दोनों ने इस बातचीत की पुष्टि की थी।
कौन कर रहा है नेतृत्व?
इस कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख नामों में पुतिन की बेटी मानी जाने वाली मारिया वोरोत्सेवा और वैज्ञानिक मिखाइल कोवाल्चुक का नाम सामने आता है। दोनों को रूस के वैज्ञानिक और सरकारी प्रोजेक्ट्स में प्रभावशाली माना जाता है।
रूस की आबादी और जीवन प्रत्याशा का मुद्दा
इस परियोजना के पीछे एक बड़ी वजह रूस की घटती आबादी और पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा भी बताई जाती है। आंकड़ों के अनुसार रूस में औसत जीवन लगभग 73 साल के आसपास है, जबकि पुरुषों की उम्र इससे भी कम, करीब 68 साल बताई जाती है।
क्या इंसान सच में अमर हो सकता है?
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर के अंगों को बार-बार रिप्लेस करके या सेलुलर एजिंग को रोककर इंसान की उम्र काफी बढ़ाई जा सकती है। हार्वर्ड के शोधकर्ता डेविड सिंक्लेयर जैसे विशेषज्ञ यह तक दावा करते हैं कि भविष्य में बुढ़ापे को आंशिक रूप से उलटना संभव हो सकता है।
हालांकि, अब तक यह सब शोध और प्रयोग के स्तर पर ही है और ‘अमरता’ का विचार अभी भी विज्ञान के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
(Photo : AI Generated)




