अबू धाबी के BAPS हिंदू मंदिर को मिला Tolerance Award 2026, वैश्विक स्तर पर सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता के प्रयासों को मिली नई पहचान
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में स्थित BAPS हिंदू मंदिर ने एक और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि अपने नाम की है। मंदिर को ‘तीसरे अंतरराष्ट्रीय सभ्यता एवं सहिष्णुता संवाद सम्मेलन’ (Third International Dialogue of Civilizations & Tolerance Conference) के दौरान प्रतिष्ठित Tolerance Award 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक धार्मिक स्थल की उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और समुदायों के बीच संवाद, सहिष्णुता, सामाजिक सद्भाव और वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी है।
आज जब दुनिया के कई हिस्सों में सांस्कृतिक मतभेद, सामाजिक तनाव और वैचारिक विभाजन जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं, ऐसे समय में इस प्रकार का सम्मान वैश्विक स्तर पर सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान के महत्व को भी रेखांकित करता है। BAPS हिंदू मंदिर पिछले कुछ वर्षों में केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है।
Tolerance Award 2026: सहिष्णुता और वैश्विक संवाद को बढ़ावा देने वाले संस्थानों का सम्मान
Tolerance Award उन संस्थानों, संगठनों और व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने समाज में विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और समुदायों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और शांति को मजबूत करने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो।
इस वर्ष BAPS हिंदू मंदिर को यह सम्मान उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाले प्रयासों के लिए प्रदान किया गया। यह पुरस्कार इस बात का भी संकेत है कि धार्मिक संस्थाएं केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे सामाजिक समरसता, शिक्षा, संवाद और मानव सेवा जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, धार्मिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर संवाद को मजबूत करना और सहिष्णु समाज के निर्माण पर विचार-विमर्श करना था।
सम्मान समारोह में BAPS का प्रतिनिधित्व
इस प्रतिष्ठित समारोह में BAPS हिंदू मंदिर का प्रतिनिधित्व परम पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी ने किया। उन्होंने पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपने संबोधन में आधुनिक समाज के सामने मौजूद चुनौतियों और मानवीय मूल्यों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया तकनीकी दृष्टि से तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इस विकास के साथ मानवीय संवेदनाओं, परिवार और सामाजिक संबंधों को भी समान महत्व देना आवश्यक है। यदि तकनीकी विकास के साथ नैतिक मूल्य कमजोर पड़ जाते हैं, तो समाज में संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है।
उनका संदेश केवल धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं था, बल्कि आधुनिक समाज की आवश्यकताओं और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप था।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में मानवीय मूल्यों की आवश्यकता
अपने संबोधन में ब्रह्मविहारी स्वामी ने विशेष रूप से Artificial Intelligence (AI) और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि AI शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासन सहित अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोल रहा है। इससे लोगों का जीवन अधिक सुविधाजनक बन रहा है और कई कार्य पहले की तुलना में तेजी से पूरे हो रहे हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह मानवीय भावनाओं, परिवार, करुणा और सामाजिक रिश्तों का स्थान नहीं ले सकती।
उनके अनुसार—
- तकनीक सुविधा दे सकती है।
- AI निर्णय लेने में सहायता कर सकता है।
- डिजिटल माध्यम संचार को तेज बना सकते हैं।
- लेकिन विश्वास, प्रेम, सहानुभूति और परिवार जैसी मानवीय भावनाएं केवल इंसानों के माध्यम से ही विकसित होती हैं।
उन्होंने संतुलित जीवनशैली अपनाने और तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिवार को बताया समाज की सबसे मजबूत नींव
ब्रह्मविहारी स्वामी ने अपने भाषण में परिवार की भूमिका को विशेष महत्व दिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती केवल उसकी अर्थव्यवस्था या तकनीकी विकास से नहीं होती, बल्कि मजबूत परिवारों से होती है। जब परिवारों के भीतर संवाद, विश्वास और सहयोग बना रहता है, तभी समाज भी स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में लोग काम, मोबाइल और डिजिटल उपकरणों में इतना व्यस्त हो गए हैं कि परिवार के साथ बिताया जाने वाला समय लगातार कम होता जा रहा है।
यही कारण है कि उन्होंने ‘घर सभा’ जैसी परंपरा को अपनाने की बात कही।
‘घर सभा’ की अवधारणा क्या है?
घर सभा एक ऐसी पारिवारिक परंपरा है जिसमें परिवार के सभी सदस्य प्रतिदिन कुछ समय एक साथ बैठते हैं और बिना किसी डिजिटल व्यवधान के आपसी संवाद करते हैं।
इस दौरान परिवार—
- दिनभर के अनुभव साझा करता है।
- बच्चों की पढ़ाई और विकास पर चर्चा करता है।
- एक-दूसरे की समस्याएं सुनता है।
- सामूहिक प्रार्थना या चिंतन करता है।
- पारिवारिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संबंध दोनों मजबूत होते हैं।
अबू धाबी का BAPS हिंदू मंदिर क्यों है खास?
अबू धाबी का BAPS हिंदू मंदिर पश्चिम एशिया के सबसे प्रमुख हिंदू मंदिरों में से एक माना जाता है।
इस मंदिर का निर्माण भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के समन्वय से किया गया है। यह मंदिर केवल भारतीय समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों और विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
यह मंदिर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामाजिक सेवा और अंतरधार्मिक संवाद का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
भारतीय वास्तुकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा संगम
मंदिर की वास्तुकला में भारतीय संस्कृति के कई प्रतीक शामिल किए गए हैं।
इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं—
- सात शिखर UAE के सात अमीरातों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- जल संरचनाएं भारतीय सभ्यता की प्रमुख नदियों से प्रेरित हैं।
- मंदिर के विभिन्न हिस्सों में भारतीय शिल्पकला की झलक दिखाई देती है।
- राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है।
- इटली के सफेद संगमरमर से इसकी सुंदरता और मजबूती बढ़ाई गई है।
- निर्माण में पर्यावरणीय संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
यह डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीकी निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
भारत और UAE के संबंधों का सांस्कृतिक प्रतीक
BAPS हिंदू मंदिर भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मजबूत होते संबंधों का भी प्रतीक माना जाता है।
दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। लाखों भारतीय नागरिक UAE में रहते और कार्य करते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हुए हैं।
ऐसे में इस मंदिर का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग को भी दर्शाता है।
धार्मिक स्थल से आगे बढ़कर सामाजिक भूमिका
आज दुनिया के कई धार्मिक संस्थान केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सेवा और सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
BAPS संस्था भी विभिन्न देशों में—
- शिक्षा परियोजनाएं,
- स्वास्थ्य शिविर,
- पर्यावरण संरक्षण अभियान,
- आपदा राहत कार्य,
- सांस्कृतिक कार्यक्रम,
- युवा विकास गतिविधियां
जैसे अनेक सामाजिक कार्यों का संचालन करती रही है।
इसी व्यापक सामाजिक योगदान ने इसे वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही पहचान
BAPS हिंदू मंदिर को पहले भी इसकी वास्तुकला, सांस्कृतिक महत्व और सामाजिक योगदान के लिए कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा जा चुका है।
Tolerance Award 2026 इस श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
यह सम्मान इस विचार को भी मजबूत करता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थान समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
सहिष्णुता और संवाद का बढ़ता महत्व
आज वैश्विक स्तर पर विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों के बीच संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि आपसी सम्मान, संवाद और सांस्कृतिक समझ ही दीर्घकालिक शांति की नींव बन सकती है।
ऐसे में BAPS हिंदू मंदिर जैसे संस्थानों की भूमिका केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाने का कार्य भी करते हैं।
दुनियाभर से आते हैं विभिन्न देशों के लोग
अबू धाबी स्थित BAPS हिंदू मंदिर में केवल भारतीय मूल के श्रद्धालु ही नहीं आते, बल्कि दुनिया के अनेक देशों से पर्यटक, शोधकर्ता, विद्यार्थी और विभिन्न धर्मों के लोग भी यहां पहुंचते हैं।
यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, वास्तुकला, आध्यात्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। यही कारण है कि यह मंदिर सांस्कृतिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
भविष्य में और बढ़ सकती है वैश्विक भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में BAPS हिंदू मंदिर जैसे संस्थान अंतरधार्मिक संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देने में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
तकनीकी रूप से बदलती दुनिया में ऐसे मंच लोगों को साझा मानवीय मूल्यों, शांति, सहयोग और सहिष्णुता की याद दिलाने का कार्य करते हैं। यही कारण है कि Tolerance Award 2026 को केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के प्रयासों की महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।




