पंजाब के सरकारी स्कूलों ने रचा नया इतिहास, जेईई एडवांस्ड 2026 में 59 छात्रों की सफलता; पटियाला बना टॉप परफॉर्मर जिला

पंजाब के सरकारी स्कूलों ने रचा नया इतिहास, जेईई एडवांस्ड 2026 में 59 छात्रों की सफलता; पटियाला बना टॉप परफॉर्मर जिला

पंजाब के सरकारी स्कूलों से पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने इस वर्ष जेईई एडवांस्ड 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया है। राज्य के 59 विद्यार्थियों ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल जेईई एडवांस्ड को सफलतापूर्वक पास किया है। इस उपलब्धि को सरकारी शिक्षा व्यवस्था में आ रहे बदलावों और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही अकादमिक सुविधाओं का बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस सफलता पर विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्रों का लगातार बेहतर प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब केवल निजी संस्थानों तक सीमित नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की शिक्षा सुधार योजनाओं का लाभ सीधे विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है।

पिछले साल से बेहतर रहा प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सरकारी स्कूलों के 44 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 59 हो गई है। यानी एक वर्ष में लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। शिक्षा विभाग इसे सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक माहौल, आधुनिक सुविधाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों का सकारात्मक परिणाम मान रहा है।

पटियाला ने दिखाई सबसे मजबूत तैयारी

जिलावार प्रदर्शन की बात करें तो पटियाला ने सबसे शानदार परिणाम दर्ज किए हैं। यहां के 11 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस्ड क्वालीफाई किया। इसके बाद संगरूर दूसरे स्थान पर रहा, जहां 7 छात्रों ने सफलता हासिल की।

लुधियाना, फिरोजपुर और एसएएस नगर से 6-6 विद्यार्थी सफल रहे। फतेहगढ़ साहिब से 5, अमृतसर और जालंधर से 4-4, बठिंडा और गुरदासपुर से 3-3, फाजिल्का से 2 तथा रूपनगर और होशियारपुर से 1-1 विद्यार्थी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल हुए।

ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों ने बढ़ाया मान

इस वर्ष की सफलता की सबसे खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी सफल हुए हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से साधारण परिवारों से आते हैं। इनमें कई छात्र ऐसे हैं जिनके परिवार निजी कोचिंग संस्थानों की भारी फीस वहन करने में सक्षम नहीं थे, लेकिन सरकारी स्कूलों में मिले मार्गदर्शन, विशेष कोचिंग कार्यक्रमों और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें सफलता दिलाई।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानियां

सफल विद्यार्थियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिनकी कहानियां प्रेरणा देने वाली हैं। किसी छात्र की मां ने अकेले परिवार संभालते हुए बच्चों को पढ़ाया, तो किसी के पिता मजदूरी कर परिवार का खर्च चला रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन विद्यार्थियों ने कठिन परिस्थितियों को अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया।

शिक्षा विभाग का कहना है कि ऐसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि प्रतिभा आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी विद्यार्थी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

IIT का सपना अब सरकारी स्कूलों से भी साकार

शिक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच केवल महंगे निजी स्कूलों और बड़े कोचिंग सेंटरों के छात्रों की ही होती है। लेकिन अब पंजाब के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी इस सोच को बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य छात्रों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है जिससे वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बराबरी से मुकाबला कर सकें।

शिक्षा सुधारों का दिख रहा असर

राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष शैक्षणिक कार्यक्रमों के तहत विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग, नियमित मॉक टेस्ट, डिजिटल अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिक्षा विभाग का दावा है कि इन पहलों का असर अब परिणामों में साफ दिखाई देने लगा है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की यह सफलता केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में आ रहे बदलाव और नई संभावनाओं का संकेत भी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह विद्यार्थियों को अवसर और संसाधन मिलते रहे तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है तथा पंजाब राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।