सप्ताह में सिर्फ 90–120 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मिल सकते हैं बड़े स्वास्थ्य लाभ, 30 साल के अध्ययन में सामने आए अहम निष्कर्ष
फिटनेस को लेकर लंबे समय से यह धारणा रही है कि बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए रोजाना घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी है। हालांकि हाल ही में प्रकाशित एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन ने इस सोच को नई दिशा दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक समय तक व्यायाम करने के बजाय यदि कोई व्यक्ति सप्ताह में सीमित समय के लिए नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करता है, तो उसे भी स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
अध्ययन के अनुसार, सप्ताह में लगभग 90 से 120 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर को मजबूत बनाने, हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने, कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने और जीवन प्रत्याशा बढ़ाने में प्रभावी साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि फिटनेस का मूल मंत्र अधिक समय तक व्यायाम करना नहीं, बल्कि नियमितता और संतुलित दिनचर्या अपनाना है।
आज की व्यस्त जीवनशैली में अधिकांश लोगों के पास लंबे समय तक जिम जाने का अवसर नहीं होता। ऐसे में यह अध्ययन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो सीमित समय के बावजूद स्वस्थ रहना चाहते हैं।
करीब 30 वर्षों तक चले अध्ययन में हजारों लोगों के स्वास्थ्य का किया गया विश्लेषण
इस शोध में वैज्ञानिकों ने लगभग तीन दशकों तक हजारों प्रतिभागियों की जीवनशैली, व्यायाम की आदतों और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में अलग-अलग आयु वर्ग, व्यवसाय और जीवनशैली वाले लोगों को शामिल किया गया ताकि निष्कर्ष अधिक व्यापक और विश्वसनीय हो सकें।
शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसमें यह देखा गया कि व्यायाम की अवधि, आवृत्ति और निरंतरता का शरीर पर किस प्रकार असर पड़ता है।
विश्लेषण के दौरान प्रतिभागियों की शारीरिक गतिविधियों के साथ-साथ हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों, सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और मृत्यु दर जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं का भी मूल्यांकन किया गया।
सप्ताह में 90–120 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सबसे प्रभावी
शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में लगभग 90 से 120 मिनट तक की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग स्वास्थ्य लाभ के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जा सकता है।
इस समय सीमा का पालन करने वाले प्रतिभागियों में कई सकारात्मक परिणाम सामने आए। नियमित रूप से इस स्तर की एक्सरसाइज करने वाले लोगों में सामान्य स्वास्थ्य बेहतर पाया गया और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस अवधि को सप्ताह के अलग-अलग दिनों में विभाजित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए सप्ताह में तीन दिन 30 से 40 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त हो सकती है।
मृत्यु दर और गंभीर बीमारियों का जोखिम कम पाया गया
अध्ययन में यह भी पाया गया कि नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग केवल मांसपेशियों को मजबूत नहीं बनाती, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को भी कम कर सकती है।
शोध के अनुसार इस प्रकार की नियमित गतिविधि अपनाने वाले लोगों में—
- किसी भी कारण से मृत्यु का जोखिम लगभग 13 प्रतिशत तक कम पाया गया।
- हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम लगभग 19 प्रतिशत तक घटा।
- तंत्रिका तंत्र और न्यूरोलॉजिकल रोगों का खतरा लगभग 27 प्रतिशत तक कम देखा गया।
हालांकि शोधकर्ता यह भी बताते हैं कि ऐसे अध्ययन विभिन्न आबादी के बीच संबंध (association) दिखाते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहतर स्वास्थ्य से जुड़ी हो सकती है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य उसकी जीवनशैली, भोजन, आनुवंशिक कारकों और अन्य परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
अत्यधिक व्यायाम से हमेशा नहीं मिलता अतिरिक्त लाभ
शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी रहा कि सप्ताह में 120 मिनट से अधिक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ बहुत सीमित दिखाई दिए।
इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिक व्यायाम करना नुकसानदायक है, बल्कि यह संकेत देता है कि शरीर को एक निश्चित सीमा तक ही अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है। इसके बाद रिकवरी और आराम भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
लगातार अत्यधिक व्यायाम करने से मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है और पर्याप्त आराम न मिलने पर थकान या चोट का जोखिम भी बढ़ सकता है।
इसी कारण फिटनेस विशेषज्ञ संतुलित प्रशिक्षण कार्यक्रम अपनाने की सलाह देते हैं।
हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
शोध में शामिल वैज्ञानिकों ने पाया कि नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का असर केवल मांसपेशियों तक सीमित नहीं रहता।
ऐसी गतिविधियों से—
- रक्त संचार बेहतर होता है।
- हृदय की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।
- शरीर की सहनशक्ति बढ़ सकती है।
- दैनिक गतिविधियों को करने की क्षमता मजबूत होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब स्ट्रेंथ ट्रेनिंग संतुलित रूप से की जाती है, तब यह समग्र शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान देती है।
मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य को भी मिल सकता है लाभ
अध्ययन में मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला।
नियमित शारीरिक गतिविधि से कई लोगों में तनाव कम होने, आत्मविश्वास बढ़ने और मानसिक सक्रियता बेहतर होने जैसे संकेत मिले।
हालांकि मानसिक स्वास्थ्य अनेक कारकों पर निर्भर करता है, फिर भी वैज्ञानिक मानते हैं कि नियमित व्यायाम स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
सिर्फ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं, एरोबिक गतिविधियां भी जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संपूर्ण फिटनेस के लिए केवल वजन उठाना या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज करना पर्याप्त नहीं है।
इसके साथ एरोबिक गतिविधियां भी शामिल करनी चाहिए, जैसे—
- तेज चाल से चलना
- दौड़ना
- साइकिल चलाना
- तैराकी
- हल्की जॉगिंग
एरोबिक गतिविधियां हृदय और फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बनाती हैं, जबकि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों, हड्डियों और शरीर की ताकत बढ़ाने में मदद करती है।
दोनों प्रकार की गतिविधियों का संतुलित संयोजन बेहतर स्वास्थ्य के लिए अधिक प्रभावी माना जाता है।
व्यस्त जीवनशैली में भी फिट रहना संभव
आज अधिकांश लोग काम, पढ़ाई और अन्य जिम्मेदारियों के कारण लंबे समय तक व्यायाम नहीं कर पाते।
ऐसे लोगों के लिए यह अध्ययन सकारात्मक संदेश देता है कि यदि नियमित रूप से सप्ताह में कुछ दिन 30 से 40 मिनट का स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सत्र किया जाए, तो भी स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
इससे फिटनेस केवल पेशेवर खिलाड़ियों या जिम जाने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आम लोग भी इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रत्येक व्यक्ति को अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्यायाम कार्यक्रम तैयार करने की सलाह देते हैं।
एक संतुलित साप्ताहिक रूटीन में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल की जा सकती हैं—
- सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
- प्रत्येक सत्र लगभग 30 से 40 मिनट का।
- सप्ताह के अधिकांश दिनों में हल्की एरोबिक गतिविधि।
- स्ट्रेचिंग और वार्म-अप को प्राथमिकता।
- पर्याप्त आराम और गुणवत्तापूर्ण नींद।
यदि किसी व्यक्ति को पहले से हृदय रोग, जोड़ों की समस्या या अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो नई व्यायाम दिनचर्या शुरू करने से पहले चिकित्सक या योग्य फिटनेस विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित माना जाता है।
फिटनेस का उद्देश्य केवल शरीर का आकार बदलना नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित व्यायाम का उद्देश्य केवल वजन कम करना या मांसपेशियां बनाना नहीं होना चाहिए।
संतुलित शारीरिक गतिविधि से—
- ऊर्जा स्तर बेहतर रह सकता है।
- दैनिक कार्यों को करने की क्षमता बढ़ सकती है।
- उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
- जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
इसी कारण अब फिटनेस को केवल शारीरिक बनावट से नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली से जोड़कर देखा जा रहा है।
नियमितता सबसे महत्वपूर्ण
शोध का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए अत्यधिक व्यायाम आवश्यक नहीं है। नियमित रूप से सीमित समय तक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली मिलकर बेहतर स्वास्थ्य की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।
आज की व्यस्त दिनचर्या में भी यदि व्यक्ति सप्ताह में 90 से 120 मिनट का समय शारीरिक गतिविधियों के लिए निकालता है और उसे निरंतर बनाए रखता है, तो यह लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।




