पाकिस्तान की राजनीति और सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़ा एक नया दावा सामने आया है, जिसने देश के सत्ता गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मोईद पीरजादा ने कहा है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने वर्ष 2022 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को आसिम मुनीर के बारे में गंभीर चेतावनी दी थी। पीरजादा के मुताबिक, बाजवा ने इमरान खान से कहा था कि आसिम मुनीर को सेना प्रमुख नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह इस पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं और उनके नेतृत्व में देश को अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
मोईद पीरजादा ने हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में इस मुद्दे का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अगस्त 2022 में बनीगाला में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में पाकिस्तान के कई जाने-माने पत्रकार, टिप्पणीकार और मीडिया से जुड़े लोग मौजूद थे। पीरजादा के अनुसार, उस दौरान इमरान खान ने बातचीत के दौरान कुछ ऐसी बातें साझा की थीं जो आज भी बेहद अहम मानी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान चर्चा का विषय बुशरा बीबी और आसिम मुनीर से जुड़ा हुआ था। इसी क्रम में इमरान खान ने कथित तौर पर बताया कि जनरल बाजवा ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से सलाह दी थी कि आसिम मुनीर को सेना प्रमुख के पद पर नियुक्त करना सही फैसला नहीं होगा। पीरजादा के मुताबिक, बाजवा ने उस समय यह आशंका जताई थी कि यदि मुनीर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई तो देश के भीतर राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर उथल-पुथल बढ़ सकती है।
वीडियो में पीरजादा ने दावा किया कि इमरान खान ने यह भी बताया था कि बाजवा को आसिम मुनीर के स्वभाव और निर्णय लेने की शैली को लेकर गंभीर चिंताएं थीं। उनका मानना था कि भविष्य में यह पाकिस्तान के लिए समस्याएं पैदा कर सकता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही जनरल बाजवा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
पीरजादा ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए बाजवा की आशंकाएं काफी हद तक सही साबित होती दिखाई देती हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कभी जनरल बाजवा से इस विषय में पूछा जाए तो संभव है कि वह इस संबंध में अपनी राय स्पष्ट कर सकें। पीरजादा का कहना था कि यदि उस समय बाजवा ने प्रधानमंत्री को पेशेवर आधार पर ऐसी सलाह दी थी, तो वह देशहित में दी गई चेतावनी मानी जा सकती है।
पाकिस्तान में सेना प्रमुख की नियुक्ति हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय रही है। देश के इतिहास में कई बार सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संबंधों ने राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय की है। ऐसे में किसी पूर्व सेना प्रमुख द्वारा अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर दी गई कथित चेतावनी स्वाभाविक रूप से बड़े राजनीतिक महत्व की मानी जा रही है।
आसिम मुनीर वर्तमान में पाकिस्तान की सेना के शीर्ष पद पर हैं और हाल के वर्षों में उनका नाम कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान चर्चा में रहा है। इमरान खान और सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेदों के दौरान भी उनका नाम लगातार सुर्खियों में बना रहा। यही वजह है कि मोईद पीरजादा के ताजा दावे ने एक बार फिर पुराने घटनाक्रमों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
दूसरी ओर, मोईद पीरजादा स्वयं भी पाकिस्तान में विवादों का हिस्सा रहे हैं। इस वर्ष की शुरुआत में पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधक अदालत ने वर्ष 2023 में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़की हिंसा से जुड़े मामलों में कई लोगों को दोषी ठहराया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि कुछ व्यक्तियों की गतिविधियां और ऑनलाइन सामग्री कानून के तहत आतंकवाद की श्रेणी में आती हैं क्योंकि उनसे समाज में भय और अस्थिरता का माहौल पैदा हुआ।
उसी मामले में मोईद पीरजादा का नाम भी शामिल था। अदालत ने जिन लोगों को सजा सुनाई, उनमें कई पत्रकार, राजनीतिक टिप्पणीकार और सोशल मीडिया पर सक्रिय हस्तियां भी थीं। आरोप था कि उनकी सामग्री ने लोगों को प्रभावित किया और सार्वजनिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर डाला।
सजा पाने वालों में मोईद पीरजादा के अलावा पूर्व सैन्य अधिकारी और यूट्यूबर आदिल राजा, सैयद अकबर हुसैन, पत्रकार वजाहत सईद खान, साबिर शाकिर, शाहीन सेहबाई और राजनीतिक टिप्पणीकार हैदर रजा मेहदी जैसे नाम शामिल थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपियों की गतिविधियों ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित किया और समाज में अशांति फैलाने में भूमिका निभाई।
फिलहाल मोईद पीरजादा का यह नया दावा पाकिस्तान की राजनीति और सैन्य नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। हालांकि उनके बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने एक बार फिर उन घटनाओं की याद ताजा कर दी है जो इमरान खान के सत्ता से बाहर होने और पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ते तनाव के दौर से जुड़ी रही हैं। आने वाले दिनों में यदि इस विषय पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आती है तो यह मामला और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।




