विवादों के बाद फिर सत्ता के केंद्र में सुदान गुरुंग, नेपाल सरकार में दोबारा मिली अहम जिम्मेदारी

विवादों के बाद फिर सत्ता के केंद्र में सुदान गुरुंग, नेपाल सरकार में दोबारा मिली अहम जिम्मेदारी

नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। कुछ महीने पहले विवादों के कारण मंत्रिमंडल से बाहर हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदान गुरुंग ने दोबारा सरकार में वापसी कर ली है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने मंगलवार को उन्हें गृह मंत्री पद की शपथ दिलाई। इसी अवसर पर स्वतंत्र सांसद महावीर पुन को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्रालय का कार्यभार दिया गया है।

सुदान गुरुंग की पुनर्नियुक्ति इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि कुछ समय पहले उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे, जिनके बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था। हालांकि सरकार द्वारा गठित जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए, जिसके बाद उनके लिए कैबिनेट में वापसी का रास्ता साफ हो गया।

दो महीने पहले क्यों छोड़ना पड़ा था पद?

सुदान गुरुंग ने अप्रैल महीने में गृह मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उस समय उन पर कारोबारी गतिविधियों और संपत्ति संबंधी कई सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि उनके एक प्रभावशाली बिचौलिए दीपक भट्ट के साथ व्यावसायिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा उन पर अघोषित स्रोतों से संपत्ति जुटाने और अपनी चल-अचल संपत्तियों का सही विवरण सार्वजनिक न करने के भी आरोप लगाए गए थे।

विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। बढ़ते राजनीतिक दबाव और विवादों के बीच गुरुंग ने पद छोड़ना उचित समझा। उस समय यह माना जा रहा था कि जांच पूरी होने तक उनका राजनीतिक भविष्य अनिश्चित बना रहेगा।

कार्यशैली को लेकर भी उठते रहे सवाल

सिर्फ आर्थिक आरोप ही नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली भी लगातार बहस का विषय रही। आलोचकों का कहना था कि गृह मंत्री रहते हुए उन्होंने कई बार जल्दबाजी में फैसले लिए। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने उन्हें अत्यधिक आक्रामक और विवादास्पद निर्णय लेने वाला नेता बताया।

गृह मंत्रालय की कमान संभालने के तुरंत बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके कुछ करीबी सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस फैसले ने नेपाल की राजनीति में भारी हलचल मचा दी थी। हालांकि बाद में अदालत ने संबंधित मामलों में राहत देते हुए जमानत प्रदान कर दी, जिसके बाद गुरुंग के फैसले पर सवाल और तेज हो गए।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि गृह मंत्रालय का उपयोग राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि गुरुंग और उनके समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सभी कदम कानून के दायरे में उठाए गए थे।

जांच रिपोर्ट ने बदला पूरा समीकरण

गृह मंत्री पद छोड़ने के बाद सरकार ने उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया। इस समिति को उनकी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और अन्य आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।

कई सप्ताह तक चली पड़ताल के बाद समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर उनकी जमीन-जायदाद में कोई ऐसी असामान्यता नहीं मिली जिसे अवैध संपत्ति माना जा सके।

समिति की इस रिपोर्ट ने राजनीतिक माहौल बदल दिया। जहां पहले उनकी वापसी को मुश्किल माना जा रहा था, वहीं जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद सत्तारूढ़ पक्ष ने उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल करने का निर्णय लिया।

निष्पक्षता को लेकर उठे नए सवाल

हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। विपक्षी दलों और कुछ स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषकों ने समिति की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जांच उस समिति ने की, जिसका गठन स्वयं सरकार ने किया था, इसलिए इसकी स्वतंत्रता को लेकर संदेह बना हुआ है।

आलोचकों का तर्क है कि समिति ने संपत्तियों से जुड़े पहलुओं पर तो राय दी, लेकिन वित्तीय लेन-देन और शेयर निवेश से जुड़े कई सवालों का स्पष्ट उत्तर अभी तक सामने नहीं आया है। ऐसे में उनके खिलाफ सभी आरोपों को पूरी तरह समाप्त मान लेना जल्दबाजी हो सकती है।

इसके बावजूद सरकार का मानना है कि उपलब्ध जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ कोई गंभीर अनियमितता साबित नहीं हुई है। इसी आधार पर उन्हें दोबारा गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

संपत्तियों की जांच में क्या मिला?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जांच समिति ने सुदान गुरुंग और उनके परिवार की संपत्तियों का विस्तृत अध्ययन किया। जांच में सामने आया कि गुरुंग के नाम पर धनकुटा जिले के कार्कीछाप क्षेत्र में लगभग 19 रोपनी और 15 आना भूमि दर्ज है।

इसके अलावा उनके पिता के नाम पर भी विभिन्न जिलों में बड़ी मात्रा में जमीन मौजूद है। इनमें चितवन जिले के भरतपुर-18 क्षेत्र में लगभग 30 कट्ठा भूमि शामिल है। वहीं गोरखा जिले के चुम नुबरी इलाके में 221 रोपनी से अधिक जमीन दर्ज होने की जानकारी सामने आई।

समिति के सदस्यों का कहना है कि गोरखा क्षेत्र की भूमि का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत कम माना जाता है, जबकि चितवन और भेडेटार जैसे क्षेत्रों की संपत्तियों की कीमत काफी अधिक हो सकती है। इसके बावजूद उपलब्ध दस्तावेजों और आय संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर समिति ने इन संपत्तियों को संदिग्ध या असामान्य नहीं माना।

महावीर पुन को भी मिली नई जिम्मेदारी

कैबिनेट विस्तार के दौरान महावीर पुन की सरकार में वापसी भी चर्चा का विषय रही। लंबे समय से तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय रहे पुन को विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार का मानना है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ देश को मिलेगा। विशेष रूप से डिजिटल विकास, नवाचार और अनुसंधान से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे की राजनीति पर रहेगी नजर

सुदान गुरुंग की वापसी ने नेपाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। समर्थकों का कहना है कि जांच में दोषमुक्त पाए जाने के बाद उन्हें दूसरा अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर विरोधी दल अभी भी जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर सवाल उठा रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गृह मंत्री के रूप में उनकी दूसरी पारी कैसी रहती है। साथ ही वित्तीय मामलों और निवेश से जुड़े लंबित सवालों पर सरकार तथा जांच एजेंसियां क्या रुख अपनाती हैं, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।

फिलहाल इतना तय है कि लंबे विवाद और राजनीतिक अनिश्चितता के बाद सुदान गुरुंग एक बार फिर नेपाल सरकार के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक की कमान संभाल चुके हैं, जबकि महावीर पुन को भी नई जिम्मेदारी देकर सरकार ने अपने मंत्रिमंडल को मजबूत करने का प्रयास किया है।