FIFA 2026: फ्रांस की दमदार शुरुआत, सेनेगल को 3-1 से हराया: एम्बापे बने टीम के सबसे बड़े गोलस्कोरर

FIFA 2026: फ्रांस की दमदार शुरुआत, सेनेगल को 3-1 से हराया: एम्बापे बने टीम के सबसे बड़े गोलस्कोरर

फीफा वर्ल्ड कप में ग्रुप-I के मुकाबलों में बुधवार का दिन यूरोपीय टीमों के नाम रहा। एक ओर फ्रांस ने सेनेगल को 3-1 से हराकर टूर्नामेंट में विजयी आगाज किया, वहीं दूसरे मैच में नॉर्वे ने इराक को 4-1 से मात देकर अपने अभियान की शानदार शुरुआत की। फ्रांस की जीत के हीरो कप्तान किलियन एम्बापे रहे, जिन्होंने दो गोल दागकर न सिर्फ टीम को जीत दिलाई बल्कि राष्ट्रीय टीम के लिए एक नया इतिहास भी रच दिया।

न्यू जर्सी में खेले गए मुकाबले में लंबे समय तक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले हाफ में फ्रांस और सेनेगल दोनों को कुछ अच्छे मौके मिले, लेकिन कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी। सेनेगल ने शुरुआती 45 मिनट में फ्रांस को काफी परेशान किया और कई मौकों पर डिफेंडिंग लाइन को चुनौती दी। हालांकि, दूसरे हाफ में फ्रांसीसी टीम ने अपना स्तर दिखाया और मैच पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया।

मैच का पहला गोल 55वें मिनट के आसपास देखने को मिला, जब किलियन एम्बापे ने शानदार मूव को गोल में बदलते हुए फ्रांस को बढ़त दिलाई। इस गोल के बाद फ्रांसीसी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ गया और उन्होंने लगातार आक्रामक खेल जारी रखा। कुछ समय बाद ब्रेडली बारकोला ने भी गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। इस बढ़त ने फ्रांस को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

हालांकि सेनेगल ने हार नहीं मानी। अफ्रीकी टीम के युवा खिलाड़ी इब्राहिम म्बाए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक गोल दागा और स्कोर 2-1 कर दिया। इस गोल के साथ उन्होंने एक खास उपलब्धि भी अपने नाम कर ली। म्बाए वर्ल्ड कप इतिहास में गोल करने वाले सबसे युवा अफ्रीकी खिलाड़ियों में शामिल हो गए। उनके गोल ने कुछ समय के लिए मुकाबले को रोमांचक बना दिया और सेनेगल की वापसी की उम्मीदें जगा दीं।

लेकिन अतिरिक्त समय में एक बार फिर एम्बापे ने अपनी क्लास दिखाई। उन्होंने मैच का अपना दूसरा और टीम का तीसरा गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी। इस गोल के साथ मुकाबला 3-1 से समाप्त हुआ और फ्रांस ने पूरे तीन अंक अपने खाते में जोड़ लिए।

इस मुकाबले की सबसे बड़ी चर्चा एम्बापे का रिकॉर्ड भी रहा। दो गोल करने के बाद वह फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने पूर्व स्टार स्ट्राइकर ओलिवियर गिरूड के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। लगातार बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन करने वाले एम्बापे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह वर्तमान दौर के सबसे प्रभावशाली फुटबॉलरों में से एक हैं।

वर्ल्ड कप में भी उनका रिकॉर्ड लगातार बेहतर होता जा रहा है। सेनेगल के खिलाफ दो गोल करने के बाद एम्बापे के नाम अब विश्व कप इतिहास में कुल 14 गोल दर्ज हो चुके हैं। इस आंकड़े के साथ उन्होंने जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर गर्ड मुलर की बराबरी कर ली है। अब वह वर्ल्ड कप के सर्वकालिक शीर्ष गोलस्कोरर मिरोस्लाव क्लोस के 16 गोल के रिकॉर्ड से केवल दो गोल पीछे हैं। टूर्नामेंट अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए एम्बापे के पास इस रिकॉर्ड को चुनौती देने का अच्छा मौका रहेगा।

पहले हाफ में हालांकि कहानी कुछ और थी। सेनेगल ने फ्रांस को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। टीम की डिफेंस संगठित रही और मिडफील्ड ने भी शानदार काम किया। हाफ टाइम से ठीक पहले सेनेगल के इस्माइला सार के पास गोल करने का सुनहरा अवसर आया था। यदि वह मौका गोल में बदल जाता तो मैच का रुख बदल सकता था। लेकिन उनका शॉट क्रॉसबार के ऊपर निकल गया और स्कोर 0-0 ही रहा।

दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी रणनीति बदली और तेज आक्रमणों के जरिए सेनेगल की रक्षापंक्ति पर दबाव बनाना शुरू किया। इसका फायदा उन्हें जल्द ही मिला और एम्बापे ने टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद फ्रांसीसी खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और विपक्षी टीम को ज्यादा अवसर नहीं दिए।

मैच के दौरान एक विवादित पल भी देखने को मिला। फ्रांस ने पेनल्टी की जोरदार अपील की थी, जिसके बाद रेफरी ने वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की मदद ली। काफी देर तक फुटेज की समीक्षा की गई, लेकिन अंततः रेफरी ने मैदान पर दिए गए अपने मूल फैसले को ही बरकरार रखा और पेनल्टी देने से इनकार कर दिया। इस फैसले से फ्रांसीसी खिलाड़ी और प्रशंसक हैरान दिखाई दिए।

दिलचस्प बात यह रही कि विवादित निर्णय के कुछ ही मिनट बाद फ्रांस को गोल मिल गया। एम्बापे ने शानदार फिनिश के जरिए टीम को बढ़त दिलाई और पेनल्टी नहीं मिलने की निराशा को जीत में बदल दिया। इसके बाद मैच पूरी तरह फ्रांस के नियंत्रण में चला गया।

यह जीत फ्रांस के लिए सिर्फ तीन अंक हासिल करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक ऐतिहासिक संदर्भ भी जुड़ा हुआ था। साल 2002 के फीफा वर्ल्ड कप में टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में सेनेगल ने फ्रांस को 1-0 से हराकर दुनिया को चौंका दिया था। उस हार के बाद तत्कालीन चैंपियन फ्रांस ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गया था और पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं जीत पाया था।

करीब ढाई दशक बाद दोनों टीमें फिर विश्व कप के मंच पर आमने-सामने आईं। इस बार फ्रांस ने कोई गलती नहीं की और 3-1 की जीत दर्ज कर पुरानी हार का बदला भी चुका लिया। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत फ्रांस के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी।

फ्रांसीसी टीम पिछले कुछ वर्षों से लगातार बड़े टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन करती रही है। उसने 2018 में विश्व कप का खिताब जीता था और 2022 में भी फाइनल तक पहुंची थी। मौजूदा टूर्नामेंट में भी उसे खिताब के प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है। एम्बापे की शानदार फॉर्म टीम की उम्मीदों को और बढ़ा रही है।

दूसरी ओर, ग्रुप-I के दूसरे मुकाबले में नॉर्वे ने इराक के खिलाफ एकतरफा प्रदर्शन किया। नॉर्वे ने आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए 4-1 से जीत हासिल की और महत्वपूर्ण तीन अंक जुटाए। इस जीत के साथ ग्रुप की अंक तालिका में भी मुकाबला रोचक हो गया है।

पहले दौर के मैचों के बाद फ्रांस और नॉर्वे दोनों ने जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की है। आने वाले मुकाबलों में इन टीमों के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी। खास तौर पर एम्बापे की फॉर्म चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि वह न केवल फ्रांस को खिताब दिलाने की कोशिश करेंगे बल्कि विश्व कप इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में भी शीर्ष स्थान हासिल करने के करीब पहुंच चुके हैं।