आजकल की व्यस्त जीवनशैली में अच्छी नींद पाना आसान नहीं रह गया है। शहरों का शोर, वाहनों की आवाजें, घर के आसपास होने वाली हलचल या फिर किसी साथी के खर्राटे कई लोगों की नींद में बाधा बन जाते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग सोते समय इयरबड्स या ईयरफोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। कोई धीमा संगीत सुनता है, कोई पॉडकास्ट तो कोई मेडिटेशन ऑडियो चलाकर सोना पसंद करता है।
हालांकि यह तरीका शुरुआत में आरामदायक महसूस हो सकता है और कई बार लोगों को जल्दी नींद आने में मदद भी करता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में कानों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार इयरबड्स लगाकर सोने से संक्रमण, दर्द और सुनने की क्षमता से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
कानों को भी चाहिए आराम
विशेषज्ञ बताते हैं कि जिस तरह शरीर के अन्य अंगों को आराम की जरूरत होती है, उसी तरह कानों को भी शांति और विश्राम चाहिए। जब कोई व्यक्ति पूरी रात कानों में इयरबड्स लगाकर सोता है, तो कान लगातार किसी न किसी ध्वनि के संपर्क में बने रहते हैं। इससे कानों की संवेदनशील संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो धीरे-धीरे सुनने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। कई लोग कम आवाज में ऑडियो सुनना सुरक्षित मानते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि केवल वॉल्यूम कम होना ही पर्याप्त नहीं है। कानों के भीतर लगातार किसी डिवाइस का मौजूद रहना भी कई समस्याओं को जन्म दे सकता है।
संक्रमण का बढ़ जाता है जोखिम
कानों के भीतर स्वाभाविक रूप से एक संतुलित वातावरण बना रहता है, लेकिन लंबे समय तक इयरबड्स लगे रहने से यह संतुलन बिगड़ सकता है। इयरबड्स कान की नली को ढक देते हैं, जिससे वहां गर्मी और नमी बढ़ने लगती है।
चिकित्सकों के अनुसार, ऐसा वातावरण बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल माना जाता है। परिणामस्वरूप कानों में खुजली, जलन, दर्द, लालिमा और संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुछ मामलों में संक्रमण इतना बढ़ सकता है कि इलाज की आवश्यकता पड़ जाए।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यदि इयरबड्स की नियमित सफाई नहीं की जाती, तो उन पर जमा धूल, गंदगी और बैक्टीरिया सीधे कानों तक पहुंच सकते हैं। इससे संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया पर असर
मानव कान स्वयं को साफ रखने की एक प्राकृतिक क्षमता रखते हैं। कानों में बनने वाला वैक्स धीरे-धीरे बाहर निकलता रहता है और गंदगी को भी अपने साथ बाहर ले आता है। लेकिन जब लंबे समय तक इयरबड्स कान में लगे रहते हैं, तो यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इयरबड्स कान के भीतर वायु प्रवाह को सीमित कर देते हैं और वैक्स के सामान्य बहाव में भी रुकावट पैदा कर सकते हैं। इससे कान में मैल जमा होने की संभावना बढ़ जाती है, जो आगे चलकर सुनने में परेशानी या संक्रमण का कारण बन सकती है।
करवट बदलने से हो सकती है परेशानी
नींद के दौरान व्यक्ति कई बार करवट बदलता है। ऐसे में कानों में लगे इयरबड्स लगातार दबाव झेलते हैं। यह दबाव कान की त्वचा और अंदरूनी हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।
कई लोगों को सुबह उठने पर कान में दर्द, भारीपन या असहजता महसूस होती है, जिसका एक कारण रातभर इयरबड्स का इस्तेमाल भी हो सकता है। लगातार दबाव पड़ने से कान के अंदर सूजन या हल्की चोट जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति रोजाना इसी तरह सोता है, तो यह परेशानी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।
तेज आवाज में संगीत सुनना और भी खतरनाक
अगर कोई व्यक्ति सोते समय तेज आवाज में संगीत सुनता है, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। विश्व स्तर पर स्वास्थ्य संस्थाएं पहले ही लंबे समय तक ऊंची ध्वनि के संपर्क को सुनने की क्षमता के लिए नुकसानदायक मान चुकी हैं।
कानों के भीतर मौजूद बेहद सूक्ष्म हेयर सेल्स ध्वनि को पहचानने और मस्तिष्क तक पहुंचाने का काम करते हैं। अत्यधिक शोर या लंबे समय तक लगातार ध्वनि के संपर्क में रहने से ये कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। एक बार गंभीर नुकसान होने पर इन्हें दोबारा सामान्य स्थिति में लाना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि इयरबड्स का उपयोग करना ही हो, तो आवाज को हमेशा सुरक्षित स्तर पर रखें और लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने से बचें।
वायरलेस इयरबड्स भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं
पिछले कुछ वर्षों में वायरलेस इयरबड्स का चलन तेजी से बढ़ा है। इनका छोटा आकार और सुविधा लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक सोते समय इनका उपयोग भी जोखिम से खाली नहीं है।
रात में करवट बदलते समय इयरबड्स कान के भीतर अधिक गहराई तक खिसक सकते हैं। कुछ मामलों में वे कान से निकलकर बिस्तर में दब सकते हैं या कान की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही ऐसे मामले बहुत आम न हों, लेकिन चोट लगने की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए सोने से पहले इन्हें निकाल देना ही बेहतर विकल्प माना जाता है।
नींद के लिए अपनाएं सुरक्षित विकल्प
अगर बाहरी शोर आपकी नींद में बाधा बनता है, तो डॉक्टर इयरबड्स के बजाय कुछ अन्य उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। सबसे पहले कोशिश करें कि आपका सोने का वातावरण शांत और आरामदायक हो।
कमरे में मोटे या साउंडप्रूफ पर्दों का उपयोग बाहरी आवाजों को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा व्हाइट नॉइज मशीन या कमरे में हल्की पृष्ठभूमि ध्वनि भी कई लोगों को बेहतर नींद दिलाने में सहायक होती है।
विशेष रूप से नींद के लिए तैयार किए गए मुलायम ईयरप्लग्स भी एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। ये कानों को पूरी तरह बंद किए बिना शोर को कम करने का काम करते हैं और लंबे समय तक पहनने पर अपेक्षाकृत अधिक आरामदायक माने जाते हैं।
ऑटो-ऑफ फीचर का करें इस्तेमाल
जो लोग संगीत या मेडिटेशन ऑडियो सुनकर ही सो पाते हैं, उनके लिए विशेषज्ञ एक सरल उपाय सुझाते हैं। मोबाइल या ऑडियो ऐप्स में उपलब्ध स्लीप टाइमर या ऑटो-ऑफ फीचर का उपयोग किया जा सकता है।
इस सुविधा की मदद से ऑडियो कुछ समय बाद अपने आप बंद हो जाता है और पूरी रात कानों में लगातार ध्वनि नहीं पहुंचती। इससे कानों पर पड़ने वाला अनावश्यक दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
छोटी आदत बन सकती है बड़ी समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रात में इयरबड्स लगाकर सोना देखने में भले ही एक सामान्य आदत लगे, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना कानों की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। संक्रमण, दर्द, वैक्स जमा होना, सुनने की क्षमता पर असर और चोट लगने जैसी कई समस्याएं इससे जुड़ी हुई हैं।
इसलिए यदि आप भी रोजाना इयरबड्स लगाकर सोने के आदी हैं, तो अपनी इस आदत पर दोबारा विचार करने का समय आ गया है। अच्छी नींद जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी आपके कानों का स्वस्थ और सुरक्षित रहना भी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से पहले इयरबड्स निकाल दें और ऐसे विकल्प अपनाएं जो नींद के साथ-साथ कानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें।
(Photo : AI Generated)




