दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज दोपहर 1 बजे एक बार फिर NEET परीक्षा विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिलने वाला है। इस बार मंच पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन के कार्यकर्ता जुटेंगे, जिन्होंने देशभर में परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शन स्थल पर उन छात्रों के पोस्टर भी लगाए गए हैं जिन्होंने हाल के समय में कथित रूप से NEET से जुड़ी परेशानियों के बाद आत्महत्या की है। यह दृश्य पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन चुका है।
इस विरोध की अगुवाई कर रहे CJP के प्रतिनिधियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने छात्रों के भविष्य को गहरी अनिश्चितता में डाल दिया है। उनका दावा है कि इन घटनाओं का सीधा असर युवाओं की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है और कई मामलों में यह निराशा जानलेवा साबित हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है।
पत्र में मांग की गई है कि NEET से जुड़े जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की गई है। पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों के बावजूद जिम्मेदार संस्थाएं पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही हैं।
CJP के अनुसार, बार-बार री-एग्जाम कराए जाने के बावजूद छात्रों में असंतोष और तनाव कम नहीं हुआ है। संगठन का दावा है कि समस्या केवल परीक्षा दोबारा कराने से हल नहीं हो सकती, बल्कि पूरे सिस्टम में सुधार की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष और गहराता जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि CJP का आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में संगठन ने देश के कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। पुणे, लखनऊ, अमृतसर, हैदराबाद, बेंगलुरु, जयपुर और नागपुर जैसे शहरों में भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इन प्रदर्शनों में भी पेपर लीक और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रमुख मुद्दा बनाया गया था।
हाल के दिनों में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 36 दिनों में देश में NEET परीक्षा से जुड़ी तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच 12 छात्रों के आत्महत्या करने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें विभिन्न राज्यों के छात्र शामिल हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और कोचिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है और छात्रों के लिए मानसिक तनाव संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
इसी बीच इंदौर में एक और दुखद घटना सामने आई, जहां NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा गुरुवार देर रात एक इमारत की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई। उसे गंभीर हालत में पहले एक निजी अस्पताल और फिर एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसने लोगों को और अधिक चिंतित कर दिया।
CJP के नेता दीपके का कहना है कि सरकार को केवल परीक्षा सुधार पर नहीं, बल्कि उन परिवारों की मदद पर भी ध्यान देना चाहिए जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि यदि सरकार असल समस्या को नजरअंदाज करती रही तो यह संकट और बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक व्यावसायिक मॉडल बनती जा रही है, जहां निजी संस्थानों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और सरकारी स्कूलों की स्थिति कमजोर होती जा रही है।
दीपके ने राजनीतिक दलों से भी इस मुद्दे पर आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि जो भी नेता देश के छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर हैं, उन्हें सार्वजनिक रूप से समर्थन देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दलों के पास अपने हितों को साधने के लिए संसाधन हैं, लेकिन छात्रों और उनके परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई जाती।
संगठन ने यह भी दावा किया है कि एक NEET छात्रा की आत्महत्या के बाद उसके परिवार को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली, जिससे परिवार की स्थिति और कठिन हो गई। CJP का कहना है कि यह घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं हैं, बल्कि सिस्टम की विफलता को दर्शाती हैं।
CJP की शुरुआत को लेकर भी काफी चर्चा रही है। यह संगठन एक टिप्पणी के बाद चर्चा में आया, जिसमें कथित तौर पर कुछ युवाओं को “कॉकरोच” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया था। इसके बाद 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने इस संगठन की शुरुआत की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर CJP के नाम से अकाउंट बनाए और धीरे-धीरे इसे एक बड़े ऑनलाइन आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया।
कुछ ही समय में यह संगठन सोशल मीडिया पर काफी तेजी से फैल गया। दावा किया गया कि 22 मई को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाली एक ऑनलाइन याचिका पर 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिला। इसके अलावा सोशल मीडिया पर संगठन की उपस्थिति भी काफी मजबूत बताई जाती है। इंस्टाग्राम पर इसके लाखों फॉलोअर्स हैं, हालांकि हाल के दिनों में इसमें कुछ गिरावट भी दर्ज की गई है। फिर भी इसकी लोकप्रियता राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया फॉलोअर्स से प्रतिस्पर्धा करती नजर आती है।
CJP के डिजिटल प्रभाव की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि यह संगठन पूरी तरह ऑनलाइन सक्रियता और सोशल मीडिया अभियान के जरिए आगे बढ़ा है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भी इसके हजारों फॉलोअर्स मौजूद हैं। यही कारण है कि इसे एक नए तरह के डिजिटल आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जो पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग है।
संगठन के संस्थापक अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले हैं और उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वे अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं। इससे पहले उनका संबंध आम आदमी पार्टी से भी बताया जाता रहा है।
इन सब घटनाओं के बीच जंतर-मंतर पर होने वाला आज का प्रदर्शन एक बार फिर NEET विवाद को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ले आया है। एक तरफ सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग कल्चर और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर गंभीर बहस छिड़ी हुई है। प्रदर्शन के दौरान यह मुद्दा और भी गरमाने की संभावना है, खासकर जब छात्र आत्महत्या जैसे संवेदनशील मामलों को मंच पर उठाया जा रहा है।



