बांग्लादेश और चीन के रिश्तों में एक नई रणनीतिक नजदीकी देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ढाका और बीजिंग के बीच इस दौरे में 12 से अधिक समझौते और सहमति पत्र (MoU) किए जा सकते हैं। इन समझौतों का फोकस आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं और चीनी निवेश को बढ़ाने पर रहेगा।
सबसे ज्यादा चर्चा तीस्ता नदी परियोजना को लेकर है। माना जा रहा है कि चीन इस प्रोजेक्ट में अपनी भागीदारी बढ़ा सकता है। इसके अलावा बांग्लादेश चीन के ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव (GDI) से जुड़ने की घोषणा भी कर सकता है। इस कदम को क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि चीन की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती है।
तारिक रहमान की यह चीन यात्रा प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी पहली आधिकारिक यात्रा होगी। इस दौरान वह चीन के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय कर सकती है।
पांच दशक पूरे होने पर जारी होगा नया संयुक्त घोषणापत्र
बांग्लादेश और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत साल 1975 में हुई थी। दोनों देशों के रिश्तों के 30 साल पूरे होने पर पहले भी संयुक्त घोषणापत्र जारी किए जा चुके हैं। अब दोनों देशों के बीच संबंधों के 50 साल पूरे होने के मौके पर एक और संयुक्त घोषणापत्र जारी करने की तैयारी है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, 26 जून को जारी होने वाले इस घोषणापत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों का जिक्र हो सकता है। इसमें आर्थिक साझेदारी के साथ-साथ राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग को भी जगह मिलने की संभावना है।
बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ विदेश मंत्री खलीलुर रहमान, सूचना मंत्री जाहिद उद्दीन स्वपन, जल संसाधन मंत्री शाहिद उद्दीन चौधरी एनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी चीन जाएंगे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
शी जिनपिंग और ली कियांग से होगी मुलाकात
चीन दौरे के दौरान तारिक रहमान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के अध्यक्ष झाओ लेजी भी बांग्लादेशी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ तारिक रहमान की मुलाकात केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि इसका उद्देश्य दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों को और मजबूत करना है।
इस यात्रा से पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के बीच एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इसके अलावा तारिक रहमान के चीन में CPC संग्रहालय जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
GDI में शामिल होगा बांग्लादेश, चीन से बड़े निवेश की उम्मीद
इस दौरे का सबसे बड़ा पहलू बांग्लादेश का चीन के ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव में शामिल होना माना जा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल 2021 में इस पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य विकासशील देशों के साथ आर्थिक और विकास आधारित सहयोग बढ़ाना बताया गया है।सूत्रों के अनुसार, चीन पिछले कई वर्षों से बांग्लादेश को GDI में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता रहा है। अब दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर समझौता होने की संभावना बढ़ गई है।
बांग्लादेश को उम्मीद है कि GDI में शामिल होने के बाद उसे चीन से बड़े स्तर पर आर्थिक सहायता और निवेश मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाका करीब 4.34 अरब डॉलर के फंड की उम्मीद कर रहा है। इस राशि का इस्तेमाल विकास परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में किया जा सकता है।
हालांकि, भारत के लिए चीन-बांग्लादेश की यह नजदीकी चिंता का कारण बन सकती है। रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पहले ही पाकिस्तान और श्रीलंका में अपनी आर्थिक मौजूदगी मजबूत कर चुका है और अब बांग्लादेश में उसका प्रभाव बढ़ना दक्षिण एशिया की शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
मोंगला बंदरगाह और तीस्ता परियोजना पर भारत की नजर
बांग्लादेश का मोंगला बंदरगाह इस पूरी रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ढाका इस बंदरगाह के आधुनिकीकरण के लिए चीन से आर्थिक मदद चाहता है। अगर चीन की भागीदारी बढ़ती है तो बंगाल की खाड़ी में उसकी मौजूदगी बढ़ सकती है। भारत के लिए बंगाल की खाड़ी सुरक्षा और व्यापार दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में मोंगला पोर्ट पर चीन की सक्रियता भारतीय नौसेना और रणनीतिक योजनाओं के लिए नई चुनौती पैदा कर सकती है।
इसके अलावा तीस्ता नदी परियोजना भी भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा है। चीन अगर इस परियोजना में बड़ी भूमिका निभाता है तो क्षेत्रीय जल राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है। बांग्लादेश लंबे समय से तीस्ता जल प्रबंधन परियोजना को लेकर काम करना चाहता रहा है। चीन ने इस क्षेत्र में सहयोग की इच्छा दिखाई है। अगर इस दौरान कोई बड़ा समझौता होता है तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
चीन की दक्षिण एशिया रणनीति को मिल सकती है मजबूती
विशेषज्ञों के मुताबिक, बांग्लादेश के साथ बढ़ता सहयोग चीन की दक्षिण एशिया नीति का हिस्सा है। चीन व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे के जरिए क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। बांग्लादेश के लिए भी चीन एक बड़ा आर्थिक साझेदार बन चुका है। ढाका को विकास परियोजनाओं के लिए बड़े निवेश की जरूरत है और चीन इस जरूरत को पूरा करने की स्थिति में है।
लेकिन इस बढ़ते सहयोग के बीच भारत की चिंताएं भी बनी हुई हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध मजबूत रहे हैं। ऐसे में चीन की बढ़ती भूमिका क्षेत्रीय समीकरणों को बदल सकती है।
तारिक रहमान की चीन यात्रा इसलिए केवल आर्थिक समझौतों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे दक्षिण एशिया में बदलती कूटनीतिक तस्वीर के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ढाका-बीजिंग साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका क्षेत्रीय राजनीति पर कितना असर पड़ता है।




