ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया है। ईरान के इस फैसले से एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यह कदम लेबनान में इजरायल की ओर से किए गए हमलों और सीजफायर के बावजूद जारी सैन्य कार्रवाई के विरोध में उठाया है। इन हमलों में कई आम लोगों की मौत होने का दावा किया गया है।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की शीर्ष सैन्य कमान खतम अल-अंबिया मुख्यालय ने शनिवार शाम होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद करने के फैसले की जानकारी दी। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला अमेरिका और इजरायल की गतिविधियों के जवाब में लिया गया है। ईरान का आरोप है कि युद्धविराम की सहमति के बाद भी लेबनान में इजरायली हमले जारी रहे, जिससे हालात फिर बिगड़ गए।
ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि यह केवल शुरुआती प्रतिक्रिया है। अगर क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में वह और कड़े कदम उठा सकता है। ईरानी सेना की ओर से कहा गया है कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहने पर अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बदले हालात
कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की बात सामने आई थी। दोनों देशों के बीच हुए एमओयू के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि क्षेत्र में तनाव कम होगा और समुद्री रास्तों पर सामान्य स्थिति लौटेगी। लेकिन ईरान का कहना है कि समझौते की भावना का पालन नहीं किया गया। तेहरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने युद्ध रोकने को लेकर किए गए वादों को पूरा नहीं किया और इजरायल ने लेबनान में हमले जारी रखे।
ईरान के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में 16 लोगों की मौत हुई है। इन घटनाओं को लेकर ईरान ने कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। इजरायल का कहना है कि वह अपने खिलाफ होने वाले किसी भी खतरे को खत्म करने के लिए कार्रवाई कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बता रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। यह संकरा समुद्री रास्ता खाड़ी देशों को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यहां से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और इराक जैसे देशों से निकलने वाली ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है।
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है तो तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रास्ते पर तनाव बढ़ने से एशियाई देशों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि ऊर्जा आयात के लिए ये देश खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं।
ईरान ने बताया जवाबी कार्रवाई का पहला चरण
ईरानी सैन्य कमान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के फैसले को अपनी प्रतिक्रिया का पहला कदम बताया है। सेना ने कहा है कि अगर इजरायल की कार्रवाई नहीं रुकती तो आगे और फैसले लिए जा सकते हैं। ईरान लंबे समय से इजरायल की सैन्य गतिविधियों का विरोध करता रहा है। लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष को लेकर भी ईरान की भूमिका अहम मानी जाती है।
ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर वह क्षेत्र में अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर सकता है। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कदम माना जाता है, क्योंकि इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ता तनाव
हाल के दिनों में लेबनान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें आती रही हैं। ईरान का कहना है कि लेबनान में इजरायल के हमले युद्धविराम समझौते का उल्लंघन हैं। इसी वजह से उसने अमेरिका पर भी सवाल उठाए हैं।
तेहरान का आरोप है कि अमेरिका इजरायल को रोकने में असफल रहा है। वहीं, अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के इन आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी गई है। इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की जा रही है और वह अपने नागरिकों की रक्षा के लिए कदम उठाता रहेगा।
पहले भी बंद हो चुका है होर्मुज रास्ता
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार ईरान और पश्चिमी देशों के बीच विवाद के दौरान इस समुद्री मार्ग को लेकर खतरे की स्थिति बनी है। ईरान कई बार संकेत दे चुका है कि अगर उस पर दबाव बढ़ाया गया तो वह होर्मुज को अपने रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
हालांकि, इस रास्ते को लंबे समय तक बंद रखना ईरान के लिए भी आर्थिक और राजनीतिक चुनौती पैदा कर सकता है। क्योंकि खाड़ी क्षेत्र के कई देश इसी मार्ग से व्यापार करते हैं।
बंद करने की खबरों पर पहले आई थी सफाई
इससे पहले शुक्रवार को कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का आदेश दिया है। हालांकि शनिवार सुबह ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को खारिज कर दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि ऐसी खबरें सही नहीं हैं। लेकिन कुछ घंटों बाद ईरानी सेना की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बयान सामने आया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा शुरू हो गई।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान का यह कदम कितने समय तक जारी रहता है और क्या इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ेगा या फिर कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति नियंत्रित हो पाएगी। फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पैदा हुआ संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए एक बड़ी चिंता बन गया है।




