हरियाणा सरकार ने योग को केवल स्वास्थ्य गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय उसे शिक्षा, खेल, रोजगार और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य सरकार ने कई ऐसी घोषणाएं की हैं, जिनका प्रभाव आने वाले वर्षों में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की जीवनशैली और स्वास्थ्य क्षेत्र पर देखने को मिल सकता है।
पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय योग दिवस समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने योग को जन-जन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की। इनमें सबसे प्रमुख फैसला स्कूल शिक्षा में योग को व्यवस्थित रूप से शामिल करने का है। सरकार ने तय किया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा तीसरी से नौवीं तक के विद्यार्थियों को योग शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर पढ़ाई जाएगी।
स्कूल शिक्षा में योग का होगा विस्तार
राज्य सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सामने शारीरिक निष्क्रियता, मानसिक तनाव, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में योग शिक्षा बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को नियमित रूप से योग के सिद्धांत, विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा स्वास्थ्य संबंधी अभ्यासों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ाना नहीं बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मअनुशासन और भावनात्मक संतुलन को भी मजबूत करना है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने से विद्यार्थियों में सकारात्मक जीवनशैली विकसित होगी और वे कम उम्र से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बन सकेंगे।
शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
सरकार ने केवल पाठ्यक्रम में बदलाव तक खुद को सीमित नहीं रखा है। विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से योग प्रशिक्षण देने के लिए शिक्षकों को भी विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में कार्यरत पीटीआई, डीपीईडी, पीजीटी तथा चयनित पीआरटी शिक्षकों को योग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यालय में योगाभ्यास नियमित और व्यवस्थित तरीके से कराया जा सके।
इस पहल से स्कूलों में प्रशिक्षित योग मार्गदर्शकों की उपलब्धता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को विशेषज्ञता के साथ योग सीखने का अवसर मिलेगा।
भर्ती परीक्षाओं में भी दिखेगा योग का प्रभाव
हरियाणा सरकार ने योग को रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से भी जोड़ने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भविष्य में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में योग से जुड़े प्रश्न शामिल किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि जब योग का ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं का हिस्सा बनेगा तो युवाओं में इसके प्रति स्वाभाविक रुचि बढ़ेगी। इससे योग को केवल व्यायाम नहीं बल्कि ज्ञान और जीवन कौशल के रूप में भी पहचान मिलेगी।
यह कदम युवाओं को भारतीय परंपरा, स्वास्थ्य विज्ञान और जीवन प्रबंधन से जुड़े विषयों की ओर आकर्षित करने का प्रयास माना जा रहा है।
मोरनी बनेगा योग और प्राकृतिक चिकित्सा का केंद्र
सरकार ने योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में संस्थागत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचकूला जिले के मोरनी क्षेत्र में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के लिए एक राज्य स्तरीय संस्थान स्थापित किया जाएगा।
इस संस्थान में योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इससे प्रदेश के विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा और करियर के नए अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक चिकित्सा और योग के क्षेत्र में देश और विदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए यह संस्थान भविष्य में शोध, प्रशिक्षण और रोजगार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
विश्वविद्यालयों में बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र
सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी योग को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्थापित किए जा रहे पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में योग को प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया जाएगा।
इन केंद्रों का उद्देश्य योग के वैज्ञानिक अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना होगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को योग के आधुनिक और पारंपरिक दोनों पहलुओं पर कार्य करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योग को अकादमिक शोध से जोड़ा जाता है तो इसके स्वास्थ्य लाभों और वैज्ञानिक आधार पर और अधिक प्रमाणिक अध्ययन सामने आ सकते हैं।
खेल नीति में योगासन को मिलेगी जगह
हरियाणा देश के प्रमुख खेल राज्यों में गिना जाता है। अब राज्य सरकार योगासन को भी खेल गतिविधि के रूप में मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश की खेल नीति में योगासन को एक खेल विधा के रूप में शामिल किया जाएगा। इससे योग से जुड़े खिलाड़ियों को भी खेलों के क्षेत्र में समान अवसर और प्रोत्साहन मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
योगासन प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आयुर्वेद और योग का होगा समन्वय
राज्य सरकार योग को भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से भी जोड़ना चाहती है। इसी उद्देश्य से योग शिक्षा में आयुर्वेद के कुछ महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल करने की घोषणा की गई है।
सरकार का मानना है कि योग और आयुर्वेद एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि विद्यार्थियों को दोनों विषयों का प्रारंभिक ज्ञान दिया जाए तो वे स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक और जिम्मेदार बन सकते हैं।
इस पहल के माध्यम से भारतीय चिकित्सा परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जाएगा।
रिक्त पदों पर होगी भर्ती
योग के विस्तार को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने आयुष विभाग में स्वीकृत लेकिन रिक्त पड़े योग कोच और प्रशिक्षकों के पदों को भरने का भी निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पदों पर जल्द नियुक्तियां की जाएंगी ताकि प्रदेशभर में योग गतिविधियों को और मजबूती मिल सके। प्रशिक्षित कोचों की नियुक्ति से स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में योग कार्यक्रमों का संचालन अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
स्कूलों में गूंजेगा राज्य गीत
योग से जुड़ी घोषणाओं के साथ मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान राज्य गीत का सामूहिक गायन सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में राज्य के प्रति गौरव की भावना विकसित होगी। साथ ही अनुशासन, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक मूल्यों को भी मजबूती मिलेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार प्रार्थना सभा जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में सामूहिकता, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना विकसित करने में सहायक होती हैं।
योग को जीवनशैली बनाने की दिशा में पहल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का उद्देश्य योग को केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित रखना नहीं है। इसे जीवन जीने की वैज्ञानिक और संतुलित पद्धति के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के दौर में योग लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इसलिए सरकार शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के माध्यम से योग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घोषित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो हरियाणा देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां योग को संस्थागत रूप से शिक्षा और सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक और प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर खेल नीति तक योग को शामिल करने की यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एक नए मॉडल के रूप में उभर सकती है।



