कराची में रेंजर्स मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला, आत्मघाती धमाके के बाद घंटों चली मुठभेड़; 10 की मौत

कराची में रेंजर्स मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला, आत्मघाती धमाके के बाद घंटों चली मुठभेड़; 10 की मौत

पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची शनिवार रात एक बड़े आतंकी हमले से दहल उठी। शहर के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित पाकिस्तान रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय को निशाना बनाकर चरमपंथियों ने हमला किया। हमलावरों ने बेहद सुनियोजित तरीके से सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की। पहले विस्फोटकों से भरी गाड़ी के जरिए जोरदार धमाका किया गया और इसके बाद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच लंबे समय तक गोलीबारी चली।

हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भारी सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया और कई घंटों तक ऑपरेशन चलाया गया। अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में पाकिस्तान रेंजर्स के चार जवानों की मौत हुई, जबकि जवाबी कार्रवाई में छह आतंकवादी मारे गए। सुरक्षाबलों ने एक हमलावर को जिंदा पकड़ने का भी दावा किया है। कुल मिलाकर इस हमले में करीब 10 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

घटना शनिवार रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, एक आत्मघाती हमलावर विस्फोटकों से लदी गाड़ी लेकर रेंजर्स कंपाउंड के मुख्य हिस्से तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही वाहन सुरक्षा क्षेत्र के करीब पहुंचा, उसने जोरदार विस्फोट कर दिया। धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनी गई और आसपास के इलाकों में डर का माहौल फैल गया।

धमाके के तुरंत बाद आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पाकिस्तान रेंजर्स के जवानों ने मोर्चा संभाला और हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। करीब डेढ़ घंटे तक दोनों तरफ से भारी गोलीबारी जारी रही। हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया और इलाके को पूरी तरह घेर लिया।

ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट और एंटी-टेररिज्म फोर्स के जवान भी मौके पर पहुंचे। सुरक्षाबलों ने संयुक्त अभियान चलाकर पूरे परिसर को सुरक्षित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने बताया कि आतंकियों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया और उनका हमला नाकाम कर दिया गया।

इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े संगठन जमात-उल-अहरार ने ली है। संगठन की ओर से दावा किया गया कि उसके लड़ाकों ने इस हमले को अंजाम दिया। हालांकि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और हमले से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों का मकसद रेंजर्स के महत्वपूर्ण ठिकाने को नुकसान पहुंचाना और बड़े पैमाने पर तबाही मचाना था। लेकिन सुरक्षाबलों की तेजी से की गई कार्रवाई के कारण वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाए। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए आतंकियों की पहचान और उनके नेटवर्क की जांच की जा रही है।

हमले के बाद कराची के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई और कई जगहों पर आवाजाही रोक दी गई। ऑपरेशन के दौरान कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई ताकि सुरक्षा बल बिना किसी बाधा के कार्रवाई कर सकें।

कराची पहले भी आतंकवादी गतिविधियों का सामना करता रहा है। पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा शहर होने के साथ-साथ देश का प्रमुख आर्थिक केंद्र भी है, इसलिए यहां होने वाले हमलों को सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चुनौती के रूप में देखती हैं।

पिछले कुछ वर्षों में कराची में कई बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं। अक्टूबर 2024 में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कराची एयरपोर्ट के पास आत्मघाती हमला किया था। उस हमले में दो चीनी नागरिकों की मौत हुई थी। इसके अलावा फरवरी 2023 में भी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने कराची पुलिस मुख्यालय को निशाना बनाया था, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने कई घंटे तक अभियान चलाया था।

शनिवार रात हुआ हमला इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठन एक बार फिर बड़े सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रेंजर्स जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा बल के मुख्यालय पर हमला सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और हमले में शामिल लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावरों को हथियार, विस्फोटक और लॉजिस्टिक मदद कहां से मिली।

कराची में हुए इस हमले ने पाकिस्तान में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की घटनाएं पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। शनिवार रात की घटना ने यह साफ कर दिया है कि बड़े शहरों में भी आतंकी संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।