शेखर सुमन का बेबाक बयान: बोले- मोदी जी की गरिमा का सम्मान, लेकिन गलत बात पर सवाल उठाना भी जरूरी

शेखर सुमन का बेबाक बयान: बोले- मोदी जी की गरिमा का सम्मान, लेकिन गलत बात पर सवाल उठाना भी जरूरी

बॉलीवुड अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन इन दिनों अपने नए शो ‘शेखर टुनाइट’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो के जरिए वह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। जहां अक्सर फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकार संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से बचते नजर आते हैं, वहीं शेखर सुमन का कहना है कि एक नागरिक होने के नाते सवाल पूछना हर व्यक्ति का अधिकार है। उनका मानना है कि सरकार को चुनने वाली जनता को यह हक होना चाहिए कि वह सही और गलत पर अपनी बात रख सके।

अपने शो के जरिए शेखर सुमन लगातार देश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि व्यवस्था में जहां कमियां नजर आती हैं, वहां सवाल उठाना है। उनके अनुसार लोकतंत्र में आलोचना और संवाद दोनों की जगह होनी चाहिए।

शेखर सुमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब वह प्रधानमंत्री के बारे में बात करते हैं तो उनके पद का पूरा सम्मान रखते हैं, लेकिन अगर किसी मुद्दे पर उन्हें लगता है कि कुछ गलत हो रहा है तो वह अपनी आवाज जरूर उठाएंगे।

उन्होंने कहा, “हमने ही सरकार को चुना है, हमने वोट दिया है। इसलिए अगर कोई चीज गलत लगती है तो हमें यह कहने का अधिकार है कि माननीय प्रधानमंत्री जी, इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है।” शेखर के मुताबिक बेबाकी जरूरी है, लेकिन भाषा में मर्यादा और सम्मान भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका निशाना किसी एक राजनीतिक दल या नेता पर नहीं है। वह बोले कि न तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में हैं और न ही किसी दूसरे नेता के खिलाफ। उनका मुद्दा सिर्फ उस व्यवस्था से है जहां उन्हें कुछ गलत दिखाई देता है। उनके मुताबिक जो व्यक्ति सत्ता के शीर्ष पर होता है, उसकी जिम्मेदारी भी सबसे ज्यादा होती है।

‘डर की वजह से लोग बोलना बंद कर रहे हैं’

जब शेखर सुमन से पूछा गया कि क्या आज के समय में सरकार या सिस्टम से जुड़े सवाल उठाने में डर नहीं लगता, तो उन्होंने कहा कि समाज में डर का माहौल जरूर बढ़ा है, लेकिन सवाल पूछना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी को अपमानित नहीं कर रहा, गाली नहीं दे रहा और सम्मानजनक तरीके से अपनी बात रख रहा है तो उसे डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार किसी भी मुद्दे पर तीखी बात कही जा सकती है, लेकिन शब्दों की गरिमा बनी रहनी चाहिए।

शेखर ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी सरकार से सवाल करना देश के खिलाफ नहीं होता, बल्कि यह लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि उनके शो को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और लोग इस तरह की बातचीत को पसंद कर रहे हैं।

टीवी चैनलों को लेकर शेखर ने उठाए सवाल

‘शेखर टुनाइट’ को शुरू करने के पीछे की चुनौती के बारे में बात करते हुए अभिनेता ने कहा कि इस तरह के शो के लिए सही प्लेटफॉर्म चुनना सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि लंबे समय बाद वह इस तरह के फॉर्मेट में वापस आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पुराने शो ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ को खत्म हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन हर चीज का अपना समय होता है। इस दौरान वह कई दूसरे प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहे। उन्होंने फिल्म से जुड़ी गतिविधियों, थिएटर और अन्य कामों का जिक्र करते हुए बताया कि व्यस्तताओं के कारण शो की शुरुआत में देरी हुई।

उन्होंने बताया कि उनके बेटे अध्ययन सुमन ने भी उन्हें प्रेरित किया कि अब लोगों की मांग को देखते हुए यह शो शुरू करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि यह सिर्फ एक कॉमेडी प्रोग्राम नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा मंच होगा जहां समाज और देश से जुड़े मुद्दों पर बात होगी।

शेखर सुमन ने कहा कि उनके लिए यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं है। वह इसे दर्शकों के साथ एक संवाद की तरह देखते हैं। उनके मुताबिक यह एक ऐसा मंच है जहां वह लोगों के साथ देश के सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर बातचीत करते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई टीवी चैनल इस तरह के कार्यक्रम करने का जोखिम नहीं उठाते। उनके अनुसार वहां खुलकर बोलने की आजादी सीमित होती है। उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी धीरे-धीरे कई तरह की पाबंदियां आने लगी हैं, इसलिए उन्होंने यूट्यूब को चुना ताकि वह अपनी बात स्वतंत्र तरीके से रख सकें।

कॉमेडी के मौजूदा दौर पर भी बोले शेखर

शेखर सुमन ने आज की कॉमेडी और स्टैंडअप कल्चर पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह खुद को अब सामान्य हास्य कार्यक्रमों से अलग रखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आज हास्य की गुणवत्ता काफी गिर गई है। उन्होंने कहा कि पहले कॉमेडी में एक स्तर और सोच होती थी, लेकिन अब कई जगहों पर केवल सस्ती बातों और व्यक्तिगत टिप्पणियों को मजाक बना दिया जाता है। उनके अनुसार किसी के रूप, रिश्तों या निजी जीवन पर टिप्पणी करना हास्य नहीं बल्कि असंवेदनशीलता है।

उन्होंने कहा कि उनका शो उन दर्शकों के लिए है जो गंभीर विषयों में रुचि रखते हैं और जिनकी सोच सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक मुद्दों को समझने वाली है। उन्होंने साहित्यकारों और विचारकों का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छी बातचीत और बेहतर हास्य के लिए ज्ञान जरूरी है।

शेखर के मुताबिक मजाक और अपमान के बीच अंतर समझना जरूरी है। उनका मानना है कि हास्य ऐसा होना चाहिए जो सोचने पर मजबूर करे, न कि केवल किसी का मजाक उड़ाने तक सीमित रह जाए।

बेटे अध्ययन सुमन के साथ काम करने पर जताई खुशी

‘शेखर टुनाइट’ के पीछे उनके बेटे अध्ययन सुमन की भी अहम भूमिका है। अध्ययन इस शो के क्रिएटर और डायरेक्टर हैं। शेखर ने कहा कि एक पिता के तौर पर उनके लिए यह बेहद गर्व की बात है कि वह अपने बेटे के साथ एक रचनात्मक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने अध्ययन की तारीफ करते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने शो को पेश किया और उसकी योजना बनाई, वह काफी प्रभावशाली है। शेखर ने कहा कि पिता और बेटे की यह साझेदारी उनके लिए बेहद खास अनुभव है।

उन्होंने यह भी कहा कि अध्ययन ने अपने करियर में काफी मेहनत की है और अब वह अपने काम के दम पर आगे बढ़ रहे हैं। शेखर को भरोसा है कि उनका बेटा आने वाले समय में पीछे मुड़कर नहीं देखेगा।

कुल मिलाकर शेखर सुमन का कहना है कि उनका नया शो केवल मनोरंजन का जरिया नहीं है, बल्कि यह जनता से जुड़ने और जरूरी मुद्दों पर बातचीत करने का माध्यम है। उनका मानना है कि अपनी बात रखने की आजादी के साथ जिम्मेदारी और भाषा की मर्यादा भी उतनी ही जरूरी है।