प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स का तीन दिवसीय दौरा कई अहम समझौतों और कूटनीतिक संदेशों के साथ सोमवार को समाप्त हुआ। दौरे के अंतिम दिन पीएम मोदी ने राजधानी विक्टोरिया में बसे भारतीय मूल के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से बातचीत की, उनका हालचाल जाना और उनके साथ यादगार पल भी साझा किए। इस दौरान बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे।
अपने दौरे के आखिरी कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री मोदी ने विक्टोरिया स्थित अरुल मिहु नवशक्ति विनायकर मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से दर्शन किए और देश-दुनिया की खुशहाली की कामना की। इसके बाद पीएम मोदी पीस पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इन कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच रिश्तों को और मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। दोनों देशों ने 19 महत्वपूर्ण समझौतों और विकास योजनाओं की घोषणा की। इन समझौतों का उद्देश्य डिजिटल तकनीक, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अंतरिक्ष और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ाना है।
भारत और सेशेल्स के बीच सबसे अहम घोषणाओं में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देना शामिल रहा। सेशेल्स में भारत की UPI आधारित डिजिटल पेमेंट प्रणाली शुरू करने पर सहमति बनी। इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा भारत ने सेशेल्स के विकास कार्यों के लिए करीब 1,250 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट यानी आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि तकनीक, अंतरिक्ष क्षेत्र और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम करने का फैसला किया।
भारत ने सेशेल्स को कई जरूरी संसाधन और उपकरण भी उपलब्ध कराए। इनमें फास्ट पेट्रोल वेसल, 10 यूटिलिटी वाहन, 5 नौकाएं, 6 एंबुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट शामिल हैं। ये मदद सेशेल्स की जरूरतों को पूरा करने और दोनों देशों के बीच भरोसे को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल हुए मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स के गोल्डन जुबली नेशनल डे समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। यह पहला मौका था जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुआ। इस साल सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे हुए हैं। साथ ही भारत और सेशेल्स के बीच स्थापित राजनयिक संबंधों को भी पांच दशक पूरे हुए हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर दोनों देशों ने अपनी दोस्ती और सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
राष्ट्रीय दिवस समारोह में आयोजित भव्य परेड में भारतीय सैन्य दल ने भी हिस्सा लिया। असम राइफल्स, भारतीय नौसेना और नौसेना बैंड की टुकड़ी ने परेड में भाग लिया। जब भारतीय दल परेड कर रहा था, तब प्रधानमंत्री मोदी सम्मान में खड़े हो गए।
समारोह में भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे जहाज INS इक्षाक भी शामिल हुए। इनकी मौजूदगी ने भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को दर्शाया।
सेशेल्स ने दिया PM मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स दौरे के दौरान वहां के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘गार्डियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने में उनके योगदान के लिए दिया गया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाले विदेशी सर्वोच्च नागरिक सम्मानों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। इससे पहले भी कई देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च पुरस्कारों से सम्मानित किया है।
भारत ने सेशेल्स के लिए घोषित किया बड़ा आर्थिक पैकेज
दौरे के दौरान भारत ने सेशेल्स के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 1651 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इस सहायता का इस्तेमाल दोनों देशों की साझेदारी वाली परियोजनाओं में किया जाएगा। भारत ने सेशेल्स को स्वदेश में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल ‘PS लेस्पवार’ भी उपहार में दिया। यह जहाज सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा। इससे समुद्री सीमा सुरक्षा, गश्त और आपात स्थिति में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह जहाज सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को सौंपा। यह रक्षा और समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
19 समझौतों से मजबूत होंगे भारत-सेशेल्स संबंध
भारत और सेशेल्स ने इस दौरे के दौरान कई क्षेत्रों में नए समझौतों की घोषणा की। इनमें प्रत्यर्पण संधि, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, तकनीकी सहयोग और विकास योजनाएं शामिल हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत दोस्ती रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में सेशेल्स भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। समुद्री सुरक्षा, व्यापार और विकास परियोजनाओं में दोनों देश लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत की ओर से दी जा रही सहायता से सेशेल्स के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मोदी ने लगाया अनोखे कोको डी मेर पौधे का पौधा
सेशेल्स दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कोको डी मेर पौधा भी लगाया। यह पौधा पूरी दुनिया में अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है और प्राकृतिक रूप से सिर्फ सेशेल्स में पाया जाता है। कोको डी मेर को दुनिया का सबसे बड़ा और भारी बीज पैदा करने वाला पौधा माना जाता है। इसके बीज का वजन करीब 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है। इसकी खास बनावट के कारण यह पौधा लंबे समय से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है।
इस पौधे के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। इसके फल की आकृति काफी अलग होती है, जिसके कारण इसके बारे में कई पुरानी कहानियां और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इसे कई बार ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। कोको डी मेर का पेड़ बहुत धीरे-धीरे विकसित होता है। इसे वयस्क होने और फल देने में लगभग 20 से 40 साल तक लग सकते हैं। वहीं, इसके फल को पूरी तरह तैयार होने में करीब 6 से 7 साल का समय लगता है। यह पौधा लंबी उम्र के लिए भी जाना जाता है। माना जाता है कि कोको डी मेर के पेड़ 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं।
पुराने समय में जब यह फल समुद्र में बहकर दूसरे देशों के तटों तक पहुंचता था, तब लोग इसे रहस्यमयी फल मानते थे। उन्हें लगता था कि यह समुद्र की गहराइयों में उगने वाले किसी अनोखे पेड़ से आता है। इसी वजह से इसका नाम फ्रेंच भाषा में ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘समुद्र का नारियल’।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाला माना जा रहा है। यात्रा के दौरान हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकते हैं।



