अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में होने वाली बातचीत से पहले मंगलवार 30 जून 2026 को क्रूड ऑयल के दामों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
मंगलवार सुबह करीब 6:15 बजे WTI क्रूड ऑयल की कीमत 0.80 प्रतिशत की गिरावट के बाद 70.184 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 0.58 प्रतिशत नीचे आकर 73.48 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, दोहा में होने वाली बातचीत को लेकर उम्मीदें बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल बाजार में हलचल
पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी देखने को मिली थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पैदा हुए विवाद ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। यही वजह थी कि क्रूड के दामों में अचानक उछाल आया था।
हालांकि अब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बनने के बाद बाजार में थोड़ी राहत दिखाई दे रही है। कतर की राजधानी दोहा में होने वाली बैठक को लेकर निवेशक यह उम्मीद कर रहे हैं कि अगर दोनों देशों के बीच कोई समझौता होता है तो तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हो सकती हैं।
इससे पहले पिछले सप्ताह गुरुवार को तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई थीं और युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई थीं। लेकिन बातचीत की खबरों के बाद बाजार में नरमी देखने को मिली।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा
मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। इस रास्ते पर किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान लगातार इस क्षेत्र में अपनी निगरानी और नियंत्रण बढ़ाने की बात कर रहा है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने हाल ही में कहा था कि उनका देश होर्मुज से गुजरने वाले यातायात पर नजर रखेगा। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ईरान जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना पर विचार कर रहा है।
दूसरी ओर अमेरिका इस तरह के कदमों का विरोध कर रहा है। अब दोहा में होने वाली बातचीत में यह साफ हो सकता है कि दोनों देशों के बीच आगे का रास्ता क्या होगा।
क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। देश में तेल कंपनियां रोजाना कीमतों की समीक्षा करती हैं, लेकिन मंगलवार को आम लोगों को ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली।
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के भाव का असर लंबे समय में घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि तुरंत बदलाव देखने को नहीं मिलता क्योंकि तेल कंपनियां कई अन्य कारकों जैसे डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और अंतरराष्ट्रीय औसत कीमतों को ध्यान में रखती हैं।
सरकार की ओर से पहले भी संकेत दिए गए हैं कि आम जनता पर अचानक ईंधन कीमतों का ज्यादा दबाव नहीं डाला जाएगा। अगर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट बनी रहती है तो पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी की संभावना बढ़ सकती है।
भारत में आज पेट्रोल-डीजल के रेट
देश के प्रमुख शहरों में मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर रहीं। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और स्थानीय शुल्क के कारण ईंधन के दाम अलग-अलग बने हुए हैं।
| शहर | पेट्रोल कीमत (रुपये/लीटर) | डीजल कीमत (रुपये/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| नोएडा | 101.96 | 95.44 |
| बैंगलोर | 110.82 | 98.77 |
आगे क्या हो सकता है?
तेल बाजार में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता सबसे बड़ा फैक्टर रहने वाली है। अगर बातचीत सफल होती है और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को फायदा मिल सकता है।
लेकिन अगर बातचीत असफल होती है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर स्थिति बिगड़ती है तो क्रूड ऑयल फिर से महंगा हो सकता है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार की दिशा यह तय करेगी कि आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या नहीं।




