अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से जारी खींचतान के बीच ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े सैन्य अभियान की तैयारी पर विचार कर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा की है।
हालांकि, अभी तक अमेरिका की ओर से किसी नए हमले को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ट्रंप प्रशासन फिलहाल कूटनीतिक विकल्पों को भी खुला रखना चाहता है। अमेरिकी नेतृत्व का मानना है कि बातचीत के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई समाधान निकाला जा सकता है, लेकिन अगर तेहरान समझौते का उल्लंघन करता है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प मौजूद रहेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने हाल में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के साथ संभावित सैन्य कदमों पर बातचीत की है। इस बैठक में यह चर्चा हुई कि क्या ईरान के खिलाफ पहले किए गए हमलों को आगे बढ़ाया जाए या फिर बातचीत को और समय दिया जाए।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन के भीतर यह विचार चल रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए दबाव बढ़ाने की जरूरत है। वहीं कुछ अधिकारियों का मानना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई से बातचीत की संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं और कूटनीतिक रास्ता बंद हो सकता है।
ट्रंप ने दिए सख्त रुख के संकेत
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के बयानों में संकेत दिया है कि अगर ईरान किसी भी संभावित समझौते का पालन नहीं करता है तो अमेरिका दोबारा कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि ईरान को लेकर अमेरिका अपने विकल्प खुले रखे हुए है।
पिछले सप्ताह अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस बात का आकलन कर रहा है कि आगे की कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।
ट्रंप का मानना है कि सीमित कार्रवाई से दबाव बनाया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाला सैन्य अभियान बातचीत की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी वजह से अमेरिकी नेतृत्व अभी रणनीति को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है।
ईरान ने भी दिखाई तैयारी, कहा- बातचीत के साथ युद्ध के लिए तैयार
दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि वह किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। ईरान के वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ बातचीत को प्राथमिकता देता है, लेकिन अगर बातचीत से समाधान नहीं निकलता तो वह संघर्ष के लिए भी तैयार है।
ईरानी अधिकारी ने कहा कि उनका देश दबाव में आकर कोई फैसला नहीं करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर विकल्प पर विचार कर रहा है।
ईरान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर गलत धारणा बना रहे हैं। वहीं अमेरिका का कहना है कि ईरान परमाणु क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना दुनिया की चिंता का केंद्र
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला भारी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है।
अगर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है तो इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट पैदा हुआ था। ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस रास्ते पर सख्ती बढ़ाई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ सकती है।
खाड़ी क्षेत्र में पहले भी बढ़ चुका है सैन्य तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच हाल के घटनाक्रमों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को फिर हवा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दिनों अमेरिकी और उसके सहयोगी बलों की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाए थे।
ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें आई थीं। इसके बाद अमेरिका ने भी सैन्य प्रतिक्रिया दी थी। इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी थी कि कहीं यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध में न बदल जाए।
हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट आश्वासन दे, जबकि ईरान प्रतिबंधों में राहत और अपनी संप्रभुता को लेकर बातचीत करना चाहता है।
भारत की बढ़ सकती है परेशानी
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा युद्ध में बदलता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन लागत बढ़ सकती है और इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता से तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की दिशा ही तय करेगी कि हालात किस ओर जाएंगे। अगर कूटनीतिक समाधान निकलता है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन सैन्य कार्रवाई की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक संकट का केंद्र बन सकता है।




