खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब; ट्रम्प की चेतावनी पर भड़का ईरान, दोनों देशों के बीच बढ़ी बयानबाजी

खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब; ट्रम्प की चेतावनी पर भड़का ईरान, दोनों देशों के बीच बढ़ी बयानबाजी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। ट्रम्प ने दावा किया कि अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान ईरान का शीर्ष नेतृत्व एक ही स्थान पर मौजूद था और यदि अमेरिका चाहता तो एक ही हमले में पूरे नेतृत्व को निशाना बनाया जा सकता था। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए नहीं किया गया क्योंकि इसके बाद बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचता।

ट्रम्प ने यह टिप्पणी एक्सिओस को दिए एक इंटरव्यू में की। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रम्प ने अंतिम संस्कार में रो रहे लोगों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि संभव है वहां बहाए गए आंसू भी वास्तविक न हों।

ईरान ने दिया कड़ा जवाब

ट्रम्प की टिप्पणी के कुछ ही समय बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को खत्म किया जा सकता है, लेकिन उसकी विचारधारा को नहीं। पोस्ट में अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा गया कि जिस देश के पास न सभ्यता है, न सम्मान और न इतिहास, वह ऐसे बयान देकर अपनी सोच दुनिया के सामने रख रहा है।

तेहरान में अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

राजधानी तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए लगातार तीसरे दिन भी भारी भीड़ पहुंची। हजारों-लाखों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और पूरे परिसर में शोक का माहौल दिखाई दिया।

इस दौरान कई जगहों पर “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इजराइल” के नारे भी लगाए गए। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।

खामेनेई के तीन बेटे हुए शामिल, उत्तराधिकारी नजर नहीं आए

अंतिम संस्कार में खामेनेई के तीन बेटे मुस्तफा, मसूद और मेयसम अपने पिता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। उन्होंने हमले में मारे गए परिवार के अन्य चार सदस्यों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

हालांकि नए सुप्रीम लीडर और खामेनेई के उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई समारोह में सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गईं।

मुस्तफा, मसूद और मेयसम की क्या है भूमिका

सबसे बड़े बेटे 64 वर्षीय मुस्तफा खामेनेई शिया धर्मगुरु हैं। वे लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों से जुड़े हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं।

52 वर्षीय मसूद खामेनेई अपने पिता के भाषणों और विचारों को संरक्षित एवं प्रकाशित करने वाले संस्थान का संचालन करते हैं। माना जाता है कि उनके पास मजबूत मीडिया और प्रचार नेटवर्क है।

सबसे छोटे बेटे 48 वर्षीय मेयसम खामेनेई सार्वजनिक जीवन में कम सक्रिय रहते हैं। उन्होंने भी इसी संस्थान में काम किया है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे हैं।

IRGC कमांडर अहमद वाहिदी की मौजूदगी बनी चर्चा

अंतिम संस्कार में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी की मौजूदगी ने भी सबका ध्यान खींचा। फार्स न्यूज एजेंसी समेत कई ईरानी मीडिया संस्थानों द्वारा जारी तस्वीरों में उन्हें पहली पंक्ति में बैठे देखा गया।

वाहिदी आमतौर पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम नजर आते हैं। ऐसे में उनका इस समारोह में शामिल होना राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

बताया जाता है कि वे IRGC की स्थापना के शुरुआती दौर से संगठन का हिस्सा रहे हैं और 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स का नेतृत्व भी कर चुके हैं।

भीषण गर्मी के बावजूद नहीं रुका श्रद्धालुओं का सैलाब

जुलाई की तेज धूप और 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए।

फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से भीड़ पर पानी का छिड़काव किया गया, जबकि कई स्थानों पर ठंडे पेय और तरबूज वितरित किए गए। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोगों को लगातार सावधानी बरतने की सलाह भी दी।

मशहद और इमाम रजा का धार्मिक महत्व

शिया समुदाय के 12 पवित्र इमामों में इमाम रजा एकमात्र ऐसे इमाम हैं जिन्हें ईरान में दफनाया गया था। बाकी सभी इमामों की कब्रें वर्तमान सऊदी अरब और इराक में स्थित हैं।

इतिहास के अनुसार इमाम रजा को अब्बासी शासनकाल में जहर देकर मार दिया गया था। जिस स्थान पर उन्हें दफनाया गया, वही आगे चलकर मशहद के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज यह शहर शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

ट्रम्प ने अंतिम संस्कार के लिए मोहलत देने का भी किया दावा

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। उनके अनुसार इस अवधि के बाद ईरान को अमेरिकी शर्तों पर विचार करना होगा।

हालांकि तेहरान ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बयानबाजी से और गहराया तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प के हालिया बयान और ईरान की तीखी प्रतिक्रिया से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। एक ओर अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, वहीं ईरान भी सार्वजनिक मंचों से अमेरिका और इजराइल के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।