कंगना रनौत की सुपरहिट फिल्म ‘क्वीन’ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई नया पोस्टर या टीजर नहीं बल्कि उससे जुड़ा कानूनी विवाद है। कथित फिल्म ‘क्वीन 2’ को लेकर निर्माता कंपनियों के बीच अधिकारों की लड़ाई अब अदालत तक पहुंच गई है। मुंबई हाई कोर्ट में दायर याचिका में फैंटम स्टूडियोज ने आरोप लगाया है कि जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने उनकी सहमति के बिना फिल्म तैयार की है, जबकि कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह नई और स्वतंत्र कहानी पर आधारित फिल्म है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब जानकारी सामने आई कि जिस फिल्म को लेकर विवाद चल रहा है, उसकी शूटिंग पहले ही पूरी हो चुकी है और अब वह पोस्ट-प्रोडक्शन के चरण में पहुंच चुकी है। ऐसे में फैंटम स्टूडियोज ने अदालत से फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है।
फैंटम स्टूडियोज का कहना है कि वर्ष 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘क्वीन’ के निर्माण के समय दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार यदि भविष्य में फिल्म का सीक्वल, प्रीक्वल या उससे जुड़ा कोई अन्य संस्करण बनाया जाता है, तो दोनों पक्षों के पास बराबर यानी 50-50 प्रतिशत अधिकार होंगे। कंपनी का आरोप है कि इस समझौते का पालन किए बिना नई फिल्म बनाई गई, जिससे उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म से जुड़े किसी भी नए प्रोजेक्ट के लिए फैंटम स्टूडियोज की अनुमति लेना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कंपनी के अनुसार उन्होंने इस विषय पर बातचीत के लिए कई बार जियोस्टार से संपर्क करने का प्रयास किया, हालांकि उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया।
कानूनी फर्म रश्मीकांत एंड पार्टनर्स के माध्यम से दाखिल इस मुकदमे में फैंटम स्टूडियोज ने 250 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। साथ ही अदालत से अनुरोध किया गया है कि जब तक मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक विवादित फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए। अब इस मामले की सुनवाई मुंबई हाई कोर्ट की एकल पीठ के समक्ष होगी।
दूसरी ओर, जियोस्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने इन आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि जिस फिल्म पर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह ‘क्वीन’ का सीक्वल नहीं है। उनके अनुसार नई फिल्म की कहानी, पात्र और प्रस्तुति पूरी तरह अलग हैं और इसे एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया गया है।
जियोस्टार ने अपने आधिकारिक पक्ष में यह भी कहा कि ‘Queen’ अंग्रेजी भाषा का एक सामान्य शब्द है, जिस पर किसी एक पक्ष का विशेष अधिकार नहीं हो सकता। कंपनी का तर्क है कि केवल शीर्षक में इस शब्द के इस्तेमाल से किसी फिल्म को मूल फिल्म का सीक्वल नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि कानून भी किसी सामान्य शब्द पर एकाधिकार की अनुमति नहीं देता, इसलिए फैंटम स्टूडियोज का दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
फैंटम स्टूडियोज का दावा इससे बिल्कुल अलग है। कंपनी का कहना है कि विवाद केवल फिल्म के नाम का नहीं बल्कि उससे जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों (इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) का है। याचिका में कहा गया है कि ‘क्वीन’ फिल्म से जुड़े सभी आईपी अधिकारों में दोनों कंपनियों की बराबर हिस्सेदारी है। इसलिए यदि उसी फिल्म की कहानी, अवधारणा या ब्रांड से जुड़ा कोई नया प्रोजेक्ट बनाया जाता है तो दोनों पक्षों की सहमति अनिवार्य है।
मामले की खास बात यह भी है कि जिस फिल्म को लेकर विवाद चल रहा है, उसकी शूटिंग कथित तौर पर इसी साल की शुरुआत में शुरू हुई थी और अब पूरी हो चुकी है। निर्माण कार्य खत्म होने के बाद फिल्म पोस्ट-प्रोडक्शन प्रक्रिया में पहुंच चुकी है, जहां एडिटिंग, बैकग्राउंड स्कोर, विजुअल इफेक्ट्स और अन्य तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि अदालत किसी तरह का अंतरिम आदेश जारी करती है तो इसका असर फिल्म की रिलीज योजना पर पड़ सकता है।
फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यदि अदालत फैंटम स्टूडियोज के पक्ष में कोई प्रारंभिक राहत देती है, तो फिल्म की रिलीज में देरी संभव है। वहीं यदि अदालत जियोस्टार के तर्कों को प्राथमिक स्तर पर स्वीकार करती है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया के साथ फिल्म की रिलीज का रास्ता खुला रह सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत की विस्तृत सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
गौरतलब है कि ‘क्वीन’ वर्ष 2014 की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में कंगना रनौत ने मुख्य भूमिका निभाई थी और उनके अभिनय को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों ने भी खूब सराहा था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी अपने नाम किए थे।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘क्वीन’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मिला था, जबकि कंगना रनौत को उनके दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था। इसी सफलता के कारण यह फिल्म भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई और इसके नाम से जुड़ी किसी भी नई घोषणा पर दर्शकों की नजर बनी रहती है।
फैंटम स्टूडियोज, जिसे पहले फैंटम फिल्म्स के नाम से जाना जाता था, भारतीय फिल्म उद्योग की प्रमुख प्रोडक्शन कंपनियों में से एक रही है। इसकी स्थापना वर्ष 2011 में अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवाने, विकास बहल और मधु मंटेना ने मिलकर की थी। कंपनी ने अपने कार्यकाल में कई चर्चित और सफल फिल्मों का निर्माण एवं वितरण किया।
‘क्वीन’ के अलावा ‘उड़ता पंजाब’, ‘एनएच10’ जैसी फिल्मों ने भी फैंटम स्टूडियोज को अलग पहचान दिलाई। इन फिल्मों को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों ने भी सराहा और कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। यही वजह है कि कंपनी अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर काफी गंभीर रुख अपनाती रही है।
अब यह पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या नई फिल्म वास्तव में ‘क्वीन’ की अगली कड़ी है या फिर यह केवल समान शीर्षक वाले एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में बनाई गई है। अदालत में दोनों पक्ष अपने-अपने समझौतों, दस्तावेजों और कानूनी तर्कों के आधार पर अपना पक्ष रखेंगे। इस मामले का फैसला न केवल संबंधित फिल्म बल्कि भविष्य में बनने वाले सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों के अधिकारों से जुड़े विवादों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
फिलहाल फिल्म प्रेमियों और इंडस्ट्री की नजरें मुंबई हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित फिल्म अपनी तय योजना के अनुसार रिलीज होगी या फिर उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ेगा। तब तक ‘क्वीन 2’ को लेकर बना यह विवाद मनोरंजन जगत की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में से एक बना हुआ है।




