भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी-20 इंटरनेशनल सीरीज में भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेले गए चौथे मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 9 विकेट से करारी शिकस्त देकर सीरीज पर कब्जा जमा लिया। इस जीत के साथ मेजबान टीम ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है। खास बात यह रही कि इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 12 साल बाद किसी द्विपक्षीय टी-20 सीरीज में जीत दर्ज की है। इससे पहले इंग्लैंड ने 2014 में भारतीय टीम को टी-20 सीरीज में हराया था।
भारतीय टीम के लिए यह हार इसलिए भी निराशाजनक रही क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में टी-20 क्रिकेट में उसका प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। हालांकि हाल के समय में टीम का प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं रहा है। इंग्लैंड दौरे से पहले भारत को आयरलैंड के खिलाफ भी टी-20 सीरीज में 2-0 से हार का सामना करना पड़ा था और अब लगातार दूसरी टी-20 सीरीज गंवाने के कारण टीम की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
मैच में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अकेले दम पर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया, लेकिन अन्य बल्लेबाजों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। भारत ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, लेकिन शुरुआती ओवरों में ही टीम दबाव में आ गई। महज 48 रन के स्कोर तक भारत के तीन अहम विकेट गिर चुके थे, जिससे बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह लड़खड़ा गया।
ऐसे मुश्किल समय में कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 49 गेंदों में नाबाद 80 रन बनाए। अपनी पारी के दौरान उन्होंने 4 चौके और 5 शानदार छक्के लगाए। अय्यर आखिरी ओवर तक क्रीज पर डटे रहे और टीम को 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 158 रन तक पहुंचाया। हालांकि उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका।
युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी से एक बार फिर बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वह इस मुकाबले में भी प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 10 गेंदों का सामना करते हुए 15 रन बनाए और जोफ्रा आर्चर की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे। अंतरराष्ट्रीय टी-20 करियर के शुरुआती तीन मुकाबलों में वैभव अब तक सिर्फ 42 रन ही बना सके हैं। इससे पहले मैच में उन्होंने 14 और दूसरे मुकाबले में 13 रन बनाए थे। लगातार छोटी पारियों के कारण उन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
मध्यक्रम में शिवम दुबे ने 22 रन बनाकर कुछ संघर्ष जरूर किया, लेकिन वह भी बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हुए। अभिषेक शर्मा ने 16 रन बनाए, जबकि तिलक वर्मा के बल्ले से 11 रन निकले। विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन सिर्फ 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर ने 5 और अक्षर पटेल केवल 1 रन ही जोड़ सके। निचले क्रम से भी टीम को अपेक्षित योगदान नहीं मिला, जिसका असर अंतिम स्कोर पर साफ दिखाई दिया।
इंग्लैंड की गेंदबाजी काफी अनुशासित रही। तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने अपनी गति और सटीक लाइन-लेंथ से भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया और दो विकेट अपने नाम किए। जोश टंग ने भी दो सफलताएं हासिल कीं। इसके अलावा विल जैक्स और अनुभवी स्पिनर आदिल रशीद ने एक-एक विकेट लेकर भारत को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया।
159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत भी पूरी तरह बेदाग नहीं रही। टीम ने 13 रन के स्कोर पर जोस बटलर का विकेट गंवा दिया। भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने बटलर को मात्र 8 रन के निजी स्कोर पर आउट कर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई। उस समय ऐसा लगा कि मुकाबला रोमांचक हो सकता है, लेकिन इसके बाद इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया।
कप्तान हैरी ब्रूक और सलामी बल्लेबाज फिल सॉल्ट ने दूसरे विकेट के लिए शानदार साझेदारी करते हुए मैच का पूरा रुख बदल दिया। दोनों बल्लेबाजों ने तेज गति से रन बनाए और भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह बेअसर साबित किया। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 68 गेंदों में नाबाद 146 रन की साझेदारी हुई, जिसने भारत की जीत की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं।
हैरी ब्रूक ने कप्तानी पारी खेलते हुए सिर्फ 35 गेंदों में नाबाद 79 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने लगभग 226 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। दूसरी ओर फिल सॉल्ट ने भी संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाया। उन्होंने 42 गेंदों में नाबाद 59 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 1 छक्का शामिल था। दोनों बल्लेबाज अंत तक नाबाद रहे और इंग्लैंड ने लक्ष्य केवल 13.5 ओवर में हासिल कर लिया। टीम ने 37 गेंदों शेष रहते मुकाबला जीत लिया, जो उसकी पूरी तरह एकतरफा जीत को दर्शाता है।
भारतीय गेंदबाजी इस मैच में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रही। शुरुआती विकेट मिलने के बाद अर्शदीप सिंह को दूसरे छोर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल और शिवम दुबे किसी भी समय इंग्लैंड की मजबूत साझेदारी को तोड़ने में सफल नहीं हुए। बल्लेबाजों ने लगातार आक्रामक शॉट खेलते हुए रन गति को कभी धीमा होने नहीं दिया।
इस हार के बाद भारतीय टीम के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम का लगातार जल्दी आउट होना और गेंदबाजों का दबाव बनाने में असफल रहना टीम के लिए चिंता का विषय बन गया है। कप्तान श्रेयस अय्यर की शानदार पारी के बावजूद टीम बड़ा स्कोर नहीं बना सकी, जबकि गेंदबाजी में भी केवल एक विकेट हासिल हुआ।
इंग्लैंड के लिए यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक रही। 2014 के बाद पहली बार उसने भारत के खिलाफ टी-20 द्विपक्षीय सीरीज अपने नाम की है। लगातार तीन मुकाबले जीतकर टीम ने यह भी दिखा दिया कि घरेलू परिस्थितियों में उसका दबदबा कितना मजबूत है। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में इंग्लैंड ने भारत से बेहतर प्रदर्शन किया।
अब दोनों टीमों के बीच सीरीज का पांचवां और अंतिम मुकाबला 11 जुलाई को साउथैम्पटन में खेला जाएगा। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा। हालांकि सीरीज का फैसला पहले ही हो चुका है, लेकिन भारतीय टीम अंतिम मुकाबले में जीत दर्ज कर सम्मान बचाने की कोशिश करेगी। वहीं इंग्लैंड की नजरें सीरीज का समापन जीत के साथ करते हुए अपना दबदबा और मजबूत करने पर होंगी।
चौथे टी-20 की प्लेइंग इलेवन
भारत: अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव।
इंग्लैंड: फिल सॉल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, रेहान अहमद, आदिल रशीद, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग।




