भारत में सस्ते मोबाइल की मांग टूटी, चीनी कंपनियों को लगा बड़ा झटका

भारत में सस्ते मोबाइल की मांग टूटी, चीनी कंपनियों को लगा बड़ा झटका

भारतीय स्मार्टफोन बाजार इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक कम कीमत वाले स्मार्टफोन के दम पर बाजार पर मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले कई चीनी ब्रांड अब दबाव में दिखाई दे रहे हैं। अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान जारी आंकड़ों से संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं की खरीदारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। बढ़ती कीमतों, महंगे कंपोनेंट्स और कमजोर मांग के कारण न केवल कुल स्मार्टफोन बिक्री में गिरावट दर्ज की गई, बल्कि कम कीमत वाले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी भी पहले की तुलना में काफी घट गई। इसके विपरीत प्रीमियम और मिड-रेंज सेगमेंट में कुछ वैश्विक कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय ग्राहक मुख्य रूप से 10 हजार से 15 हजार रुपये तक के स्मार्टफोन खरीदना पसंद करते थे। यही वह श्रेणी थी जिसमें अधिकांश चीनी कंपनियों ने अपना सबसे बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। हालांकि इस वर्ष तस्वीर बदलती नजर आई। उत्पादन लागत बढ़ने और आवश्यक पुर्जों की कीमतों में लगातार उछाल आने के कारण कंपनियों को अपने स्मार्टफोन महंगे करने पड़े। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ा जो सीमित बजट में नया फोन खरीदने की योजना बना रहे थे।

रिसर्च एजेंसी काउंटरपॉइंट द्वारा जारी ताजा अध्ययन के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में देश के स्मार्टफोन बाजार की कुल बिक्री में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले छह वर्षों में जून तिमाही के दौरान यह सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि बाजार की सबसे बड़ी चुनौती कम कीमत वाले स्मार्टफोन रहे, क्योंकि इस वर्ग में ग्राहकों की खरीदारी उम्मीद से काफी कम रही।

सबसे अधिक असर 15 हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन पर देखने को मिला। इस श्रेणी की बिक्री में करीब 45 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। पहले जहां बड़ी संख्या में उपभोक्ता इसी प्राइस रेंज में फोन खरीदते थे, वहीं अब बढ़ी हुई कीमतों के कारण कई लोगों ने खरीदारी टाल दी या फिर पुराने स्मार्टफोन का इस्तेमाल जारी रखना बेहतर समझा। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि उपभोक्ता अब मोबाइल खरीदने से पहले पहले की तुलना में अधिक समय तक इंतजार कर रहे हैं और केवल आवश्यकता होने पर ही नया डिवाइस खरीद रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण मेमोरी चिप की कीमतों में आया असाधारण उछाल है। स्मार्टफोन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप लगभग हर डिवाइस का अहम हिस्सा होती है। पिछले कई महीनों से इसकी वैश्विक कीमतों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियों के सामने या तो कम मुनाफे पर बिक्री करने या फिर ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ाने का विकल्प था। अधिकांश कंपनियों ने दूसरी राह चुनी और कई मॉडलों की कीमतों में औसतन 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी।

रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2025 के बाद से मेमोरी चिप की कीमतों में लगभग चार गुना तक वृद्धि हो चुकी है। इसका प्रभाव केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में स्मार्टफोन उद्योग इसी चुनौती का सामना कर रहा है। हालांकि भारत जैसे मूल्य संवेदनशील बाजार में इसका असर कहीं अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कीमत बढ़ने के कारण कम बजट वाले ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हुई और बिक्री के आंकड़े नीचे चले गए।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यदि मेमोरी चिप की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो स्मार्टफोन निर्माण की लागत और बढ़ सकती है। अनुमान है कि चिप की कीमतें मौजूदा स्तर से पांच गुना तक पहुंच सकती हैं। ऐसे में कंपनियों पर फिर से कीमत बढ़ाने का दबाव बन सकता है। यही वजह है कि पूरे वर्ष के लिए स्मार्टफोन बाजार को लेकर सतर्क अनुमान लगाए जा रहे हैं। काउंटरपॉइंट का आकलन है कि वर्ष भर में कुल स्मार्टफोन बिक्री लगभग 13 प्रतिशत तक घट सकती है।

चीनी स्मार्टफोन कंपनियों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। ओपो, वीवो, शाओमी, रियलमी, वनप्लस, आईक्यू और पोको जैसे ब्रांड्स ने भारत में अपनी मजबूत पहचान मुख्य रूप से किफायती स्मार्टफोन के जरिए बनाई थी। इन कंपनियों का बड़ा कारोबार 15 हजार रुपये से कम कीमत वाले मोबाइल पर आधारित रहा है। जैसे-जैसे इस श्रेणी की मांग कमजोर हुई, वैसे-वैसे इनकी बाजार हिस्सेदारी भी प्रभावित हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन ब्रांड्स की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर पिछले छह वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।

दूसरी ओर कुछ गैर-चीनी कंपनियों ने इस परिस्थिति का लाभ उठाया। दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने अपने गैलेक्सी ए और गैलेक्सी एस सीरीज के स्मार्टफोन की मजबूत मांग के दम पर बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की। बिक्री के आधार पर शीर्ष पांच कंपनियों में सैमसंग ऐसी इकलौती कंपनी रही, जिसने सकारात्मक वृद्धि हासिल की। कंपनी ने मिड-रेंज और प्रीमियम दोनों श्रेणियों में संतुलित रणनीति अपनाई, जिसका उसे फायदा मिला।

इसी अवधि में नथिंग ने सबसे तेज विकास दर दर्ज कर उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींचा। कंपनी की बिक्री में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित लेकिन अलग पहचान वाले उत्पाद, आकर्षक डिजाइन और बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव के कारण यह ब्रांड युवा ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कंपनी ने अपेक्षाकृत कम मॉडलों के बावजूद अपनी मौजूदगी मजबूत करने में सफलता हासिल की।

प्रीमियम स्मार्टफोन श्रेणी में गूगल पिक्सल ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कंपनी ने आक्रामक मार्केटिंग अभियान और कई मॉडलों की कीमत स्थिर रखने की रणनीति अपनाई। इसका फायदा उसे बिक्री में मिला और इस अवधि में उसकी ग्रोथ लगभग 68 प्रतिशत दर्ज की गई। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कैमरा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स और लंबे समय तक मिलने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट जैसे कारणों से प्रीमियम खरीदारों के बीच पिक्सल की लोकप्रियता बढ़ रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय स्मार्टफोन बाजार अब केवल कम कीमत वाले उपकरणों पर निर्भर नहीं रहेगा। उपभोक्ता अब पहले की तुलना में बेहतर फीचर्स, लंबी अवधि तक चलने वाले सॉफ्टवेयर सपोर्ट, मजबूत प्रोसेसर और विश्वसनीय ब्रांड को अधिक महत्व देने लगे हैं। ऐसे में कंपनियों को केवल कीमत के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उत्पाद की गुणवत्ता, आफ्टर-सेल्स सर्विस और नए तकनीकी फीचर्स पर भी अधिक ध्यान देना होगा।

इसके अलावा बाजार में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह देखने को मिल रहा है कि ग्राहक अब अपना स्मार्टफोन पहले की तुलना में अधिक समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले जहां दो से तीन साल में फोन बदलने का चलन था, वहीं अब कई उपभोक्ता तीन से चार वर्ष या उससे अधिक समय तक एक ही डिवाइस का उपयोग कर रहे हैं। इससे नए स्मार्टफोन की मांग पर भी असर पड़ा है। यदि आने वाले महीनों में उत्पादन लागत और बढ़ती है तो बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी तथा कंपनियों को ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियां अपनानी पड़ सकती हैं।

कुल मिलाकर अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय स्मार्टफोन उद्योग एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। बढ़ती लागत, महंगे पुर्जे, बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताएं और प्रीमियम डिवाइस की बढ़ती मांग ने बाजार का संतुलन बदल दिया है। जहां कम कीमत वाले स्मार्टफोन पर निर्भर कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं, वहीं विविध उत्पाद पोर्टफोलियो और मजबूत ब्रांड छवि रखने वाली कंपनियां इस बदलाव का लाभ उठाती नजर आ रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां बढ़ती लागत और घटती मांग के बीच किस तरह अपनी रणनीति तैयार करती हैं और भारतीय ग्राहकों को किस प्रकार नए विकल्प उपलब्ध कराती हैं।

(Photo : AI Generated)