लगातार बारिश से उत्तर भारत बेहाल: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बाढ़-भूस्खलन का कहर, वैष्णो देवी – अमरनाथ यात्रा स्थगित

लगातार बारिश से उत्तर भारत बेहाल: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बाढ़-भूस्खलन का कहर, वैष्णो देवी – अमरनाथ यात्रा स्थगित

उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में बाढ़, भूस्खलन और सड़कें टूटने जैसी घटनाओं ने सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर यातायात बाधित होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं को भी अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है, जबकि अनेक गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सबसे अधिक असर पहाड़ी इलाकों में डाला है। जगह-जगह भूस्खलन और सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण 100 से अधिक गांव जिला मुख्यालयों से कट गए हैं। प्रशासन की टीमें लगातार रास्ते बहाल करने और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में जुटी हुई हैं, लेकिन खराब मौसम के चलते अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

राज्य में भारी बारिश के कारण श्री अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा और शिवखोड़ी यात्रा को लगातार तीसरे दिन भी स्थगित रखना पड़ा। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया है। हजारों श्रद्धालु विभिन्न पड़ावों और बेस कैंपों में मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि हालात का लगातार आकलन किया जा रहा है और मौसम में सुधार होते ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

बारिश और भूस्खलन का असर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी साफ दिखाई दिया। ऊधमपुर और रामबन जिलों में कई स्थानों पर पहाड़ियों से पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिससे हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। वहीं जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह जलभराव होने से दिनभर वाहनों की आवाजाही बाधित रही। यात्रियों को लंबे समय तक जाम में फंसे रहना पड़ा और कई वाहनों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा।

राजौरी-पुंछ मार्ग भी भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसके चलते यह हाईवे करीब ढाई घंटे तक बंद रहा। मशीनों और राहत दलों की मदद से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया गया। दूसरी ओर बड़गाम जिले में सुखनाग नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गईं। तेज बहाव के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

प्रदेश की प्रमुख नदियां और बरसाती नाले उफान पर बह रहे हैं। तवी और चिनाब सहित कई नदियों में जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने सलाल बांध के सभी गेट एहतियात के तौर पर खोल दिए गए ताकि अतिरिक्त पानी सुरक्षित रूप से निकाला जा सके और संभावित खतरे को कम किया जा सके।

बारिश से पैदा हुए संकट के बीच केंद्र सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली। उन्होंने राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। प्रशासनिक एजेंसियों को प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जानकारी दी कि राजौरी और पुंछ जिलों में बारिश और भूस्खलन से प्रभावित 435 सड़कों में से 356 मार्गों को दोबारा चालू कर दिया गया है। शेष मार्गों पर भी युद्धस्तर पर मरम्मत और मलबा हटाने का काम जारी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य जल्द से जल्द सभी प्रभावित क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ना है ताकि राहत सामग्री समय पर पहुंच सके।

प्राकृतिक आपदा के कारण जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन दिनों के दौरान 24 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक 21 मौतें राजौरी और पुंछ जिलों में दर्ज की गई हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है, जबकि घायलों का उपचार विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश भी लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटनाओं से गंभीर संकट का सामना कर रहा है। कांगड़ा जिले की बोह घाटी में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज पानी के बहाव में नौ मकान पूरी तरह बह गए, जबकि सात अन्य घर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन और राहत दलों ने अभियान चलाया।

गढ़गून गांव में एक मकान ढहने से एक महिला मलबे में दब गई थी। बचाव दल ने करीब तीन घंटे तक लगातार अभियान चलाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। वहीं बाढ़ के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल भी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

किन्नौर जिले में शलखर के पास बाढ़ और मलबा आने से बंद हुआ शिमला-किन्नौर राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 20 घंटे बाद फिर से खोल दिया गया। हालांकि प्रशासन ने यात्रियों से केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है क्योंकि कई स्थानों पर अब भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

चंबा जिले के टिक्कर घार क्षेत्र में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरकने से संपर्क मार्ग पूरी तरह नष्ट हो गया। सड़क बह जाने के कारण कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोक निर्माण विभाग की टीमें वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में लगी हुई हैं।

उत्तराखंड में भी बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को खराब मौसम के कारण एहतियातन रोकी गई चारधाम यात्रा मंगलवार को दोबारा शुरू कर दी गई। हालांकि प्रशासन ने यात्रियों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है क्योंकि यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा अब भी बना हुआ है।

पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा की ओर जाने वाला तवाघाट-लिपुलेख मार्ग दोपहर बाद भूस्खलन के कारण बंद हो गया। यही मार्ग कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा आने से यातायात रोकना पड़ा और मार्ग को खोलने के लिए मशीनों की मदद से सफाई अभियान शुरू किया गया।

वहीं देहरादून-मसूरी मार्ग, जो सोमवार को भूस्खलन के कारण बंद हो गया था, उसे मंगलवार को हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया। हालांकि भारी वाहनों की आवाजाही पर अभी भी निगरानी रखी जा रही है और मौसम की स्थिति के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर तीनों राज्यों के प्रशासन को सतर्क रहने और राहत दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के आसपास न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी राज्यों में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कितना गंभीर हो सकता है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन मौसम सामान्य होने तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने की उम्मीद कम है। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन के निर्देशों का पालन ही संभावित नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।