कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज आज, ग्लासगो में भारत के 125 खिलाड़ी दिखाएंगे दम

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज आज, ग्लासगो में भारत के 125 खिलाड़ी दिखाएंगे दम

स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आज से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत होने जा रही है। 2 अगस्त तक चलने वाले इस बहु-खेल आयोजन में दुनिया के 74 कॉमनवेल्थ देशों और क्षेत्रों के तीन हजार से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस बार कुल 10 खेलों में मुकाबले होंगे, जिनमें 215 स्वर्ण पदकों सहित कुल 1,168 मेडल दांव पर रहेंगे। भारत भी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है और उसके 125 खिलाड़ी आठ अलग-अलग खेलों में चुनौती पेश करेंगे।

भारत की टीम से बड़ी उम्मीदें

भारतीय दल इस बार सीमित खेलों में हिस्सा ले रहा है, क्योंकि कई ऐसे खेल कार्यक्रम से बाहर हैं जिनमें भारत परंपरागत रूप से मजबूत रहा है। इसके बावजूद खिलाड़ियों से कई पदकों की उम्मीद की जा रही है। भारतीय दल में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई युवा चेहरे भी शामिल हैं, जो पहली बार इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने उतरेंगे।

इस बार कार्यक्रम से बाहर हैं कई लोकप्रिय खेल

ग्लासगो संस्करण में कई चर्चित खेल शामिल नहीं किए गए हैं। क्रिकेट, हॉकी, शूटिंग, बैडमिंटन, कुश्ती, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसे खेल इस बार प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हैं। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ेगा, क्योंकि इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले संस्करणों में बड़ी संख्या में पदक जीते थे। खासतौर पर शूटिंग भारत के लिए सबसे सफल खेल रहा है, जिसमें देश ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में सर्वाधिक मेडल अपने नाम किए हैं।

10 खेलों में होंगे मुकाबले

इस बार प्रतियोगिता अपेक्षाकृत छोटे प्रारूप में आयोजित की जा रही है। कुल 10 खेलों के अंतर्गत 215 मेडल इवेंट्स होंगे। इनमें 47 इवेंट पैरा-स्पोर्ट्स के लिए निर्धारित किए गए हैं। आयोजकों का कहना है कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने और प्रतियोगिता को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से खेलों की संख्या सीमित रखी गई है।

पैरा-स्पोर्ट्स को मिला अब तक का सबसे बड़ा मंच

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसका विस्तृत पैरा-स्पोर्ट्स कार्यक्रम है। छह खेलों में पैरा एथलीट्स को पूरी तरह शामिल किया गया है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट्स कार्यक्रम माना जा रहा है। इससे दिव्यांग खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर मिलेगा।

लगभग छह दशक बाद लौटेगी कॉमनवेल्थ माइल

एथलेटिक्स में इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। करीब 60 वर्षों के बाद कॉमनवेल्थ माइल प्रतियोगिता की वापसी हो रही है। यह स्पर्धा आखिरी बार 1966 में आयोजित हुई थी। इस बार पारंपरिक 1500 मीटर दौड़ की जगह एक मील यानी 1.609 किलोमीटर की रेस कराई जाएगी। खास बात यह है कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की माइल स्पर्धा भी आयोजित होगी।

उद्घाटन समारोह में भारतीय खिलाड़ियों की खास भूमिका

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो एरीना में आयोजित किया जाएगा। भारतीय समयानुसार यह कार्यक्रम रात 12:30 बजे शुरू होकर लगभग 2:30 बजे तक चलेगा। भारत की ओर से स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन तिरंगा लेकर मार्च करेंगी। समारोह में ब्रिटेन के प्रसिद्ध गायक टॉम वॉकर की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।

चार प्रमुख वेन्यू पर होंगे सभी मुकाबले

ग्लासगो शहर दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2014 में भी इस शहर ने सफल आयोजन किया था। इस बार प्रतियोगिताओं का आयोजन शहर के चार प्रमुख खेल परिसरों में किया जाएगा। आयोजकों ने कम दूरी वाले वेन्यू चुनने पर जोर दिया है ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को बेहतर अनुभव मिल सके।

मेडल्स में दिखेगी ग्लासगो की सांस्कृतिक पहचान

इस बार खिलाड़ियों को मिलने वाले मेडल भी खास आकर्षण होंगे। इन्हें पुरस्कार विजेता डिजाइनर मिलित्सा मिलेनकोवा ने तैयार किया है। मेडल्स के डिजाइन में ग्लासगो के ऐतिहासिक स्मारकों, शहर के कोट ऑफ आर्म्स, औद्योगिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान की झलक दिखाई देगी। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल्स में ब्रेल और टैक्टाइल फीचर्स भी जोड़े गए हैं, जिससे दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए इन्हें अधिक सुलभ बनाया गया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स का सफर कैसे शुरू हुआ

कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास लगभग एक सदी पुराना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुई थी। उस समय प्रतियोगिता का नाम ब्रिटिश एम्पायर गेम्स था। पहले संस्करण में ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े 11 देशों के 400 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया था। शुरुआती प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, लॉन बॉल्स, रोइंग, स्विमिंग और कुश्ती जैसे खेल शामिल थे।

समय के साथ प्रतियोगिता के नाम में भी बदलाव हुए। 1930 से 1950 तक इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा गया। वर्ष 1954 में इसका नाम ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स रखा गया। 1970 में यह ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स कहलाया और आखिरकार 1978 से इसे कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाने लगा। इसका आयोजन प्रत्येक चार वर्ष में किया जाता है और इसका उद्देश्य कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर उपलब्ध कराना है।

भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स में सफर

भारत ने पहली बार वर्ष 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया था। हालांकि 1930, 1950, 1962 और 1986 के संस्करणों में भारतीय दल ने हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा बाकी सभी संस्करणों में भारत की मौजूदगी रही है।

1934 के लंदन गेम्स में भारत की ओर से केवल छह खिलाड़ियों ने भाग लिया था। भारतीय एथलीटों ने ट्रैक एंड फील्ड की 10 स्पर्धाओं और एक कुश्ती मुकाबले में हिस्सा लिया। इसी संस्करण में भारत को अपना पहला कॉमनवेल्थ पदक भी मिला था। पहलवान राशिद अनवर ने पुरुषों की 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा और देश के लिए इस प्रतियोगिता का पहला मेडल हासिल किया।

भारत के खाते में 564 पदक

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। 1934 से लेकर अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 564 पदक जीते हैं। इनमें 203 स्वर्ण, 189 रजत और 172 कांस्य पदक शामिल हैं। पदकों की संख्या के आधार पर भारत इस प्रतियोगिता के सबसे सफल देशों में गिना जाता है। पिछले कई संस्करणों में भारत ने शीर्ष देशों की सूची में अपनी जगह बनाई है।

सीमित खेल, लेकिन प्रतिस्पर्धा होगी कड़ी

हालांकि इस बार प्रतियोगिता में खेलों की संख्या पहले की तुलना में कम है, लेकिन प्रतिस्पर्धा किसी भी तरह कम नहीं होगी। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, न्यूजीलैंड और मेजबान स्कॉटलैंड जैसी मजबूत टीमें अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतर रही हैं। ऐसे में हर पदक के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।

भारत के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उसके कई मजबूत खेल इस संस्करण में शामिल नहीं हैं। इसके बावजूद जिन खेलों में भारतीय खिलाड़ी उतर रहे हैं, उनमें अच्छा प्रदर्शन कर पदक तालिका में प्रभाव छोड़ने की कोशिश करेंगे।

कहां और कैसे देख सकेंगे मुकाबले

भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के विभिन्न टीवी चैनलों पर किया जाएगा। ऑनलाइन दर्शक सोनी लिव ऐप और वेबसाइट के जरिए सभी प्रमुख मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकेंगे। इसके अलावा डीडी स्पोर्ट्स पर भी कई प्रतियोगिताओं का मुफ्त प्रसारण उपलब्ध रहेगा। वहीं, खेल प्रेमी विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव स्कोर और पल-पल के अपडेट भी प्राप्त कर सकेंगे।

खिलाड़ियों पर रहेंगी सभी की निगाहें

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के 125 खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी। कई युवा खिलाड़ी पहली बार इतने बड़े मंच पर उतरेंगे, जबकि अनुभवी खिलाड़ी अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेंगे। भले ही इस बार कई पारंपरिक खेल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन भारतीय दल का लक्ष्य उपलब्ध अवसरों का पूरा फायदा उठाते हुए अधिक से अधिक पदक जीतना रहेगा। अगले 10 दिनों तक ग्लासगो खेल प्रेमियों के लिए रोमांच का केंद्र बना रहेगा, जहां हर मुकाबले के साथ नए रिकॉर्ड, नई कहानियां और नए चैंपियन सामने आएंगे।