चंडीगढ़। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर लगातार बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गई है। स्टेशन के प्रवेश और निकास मार्गों पर रोजाना लगने वाले लंबे जाम को लेकर चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और इसका खामियाजा हजारों यात्रियों को रोजाना भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार, रेलवे प्रशासन और चंडीगढ़ पुलिस से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए रेलवे स्टेशन के बाहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह अव्यवस्थित बताया। उन्होंने कहा कि रविवार को उन्हें स्वयं इस समस्या का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, मध्य मार्ग के लाइट प्वाइंट से रेलवे स्टेशन तक करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लग गया, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यही दूरी कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी देरी के कारण कई यात्रियों की ट्रेनें भी छूट गई होंगी और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा होगा।
सांसद ने कहा कि रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों लोग आते-जाते हैं। इनमें नौकरीपेशा लोग, छात्र, बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दूसरे राज्यों से आने वाले यात्री शामिल होते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर यदि लोग घंटों तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहें तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि यात्रियों को रेलवे स्टेशन तक पहुंचने से पहले ही जाम की परीक्षा से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी यात्रा तनावपूर्ण बन जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे स्टेशन के बाहर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती। टैक्सी, ऑटो, निजी वाहन, ई-रिक्शा और अन्य कमर्शियल वाहन एक साथ स्टेशन परिसर के बाहर पहुंच जाते हैं, जिससे सड़क पर अव्यवस्था पैदा हो जाती है। पीक आवर्स के दौरान यह स्थिति और भी खराब हो जाती है। कई वाहन सड़क पर ही यात्रियों को उतारने और बैठाने लगते हैं, जिससे पीछे लंबी कतारें लग जाती हैं और ट्रैफिक पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।
मनीष तिवारी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस समस्या को उठाया हो। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी तीन अलग-अलग मौकों पर ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को रेलवे स्टेशन के बाहर लगने वाले जाम के बारे में अवगत कराया गया था, लेकिन इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि यदि पहले ही प्रभावी कदम उठाए गए होते तो आज लोगों को इतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और चंडीगढ़ पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार रेलवे स्टेशन ऐसा स्थान है जहां रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण ट्रैफिक नियंत्रण प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
सांसद ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अपील की कि वे इस मामले का संज्ञान लें और संबंधित अधिकारियों को रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रैफिक प्रबंधन में तत्काल सुधार के निर्देश जारी करें। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन देशभर से आने-जाने वाले यात्रियों का प्रमुख केंद्र है और यहां बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करना रेलवे प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्टेशन परिसर के बाहर वैज्ञानिक तरीके से ट्रैफिक प्रबंधन की नई व्यवस्था लागू की जाए ताकि यात्रियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी से भी विशेष हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि व्यस्त समय के दौरान अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए और रेलवे सुरक्षा बल के साथ मिलकर संयुक्त ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि दोनों एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करें तो स्टेशन के बाहर लगने वाले लंबे जाम पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेलवे स्टेशन के आसपास अक्सर ट्रैफिक पुलिस के जवान नजर नहीं आते। उनके अनुसार, जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता है, वहां पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती बेहद जरूरी है। यदि मौके पर पुलिस की सक्रिय मौजूदगी रहे तो अवैध पार्किंग, अनियंत्रित वाहन संचालन और सड़क पर होने वाली अव्यवस्था को काफी हद तक रोका जा सकता है।
रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले कई यात्रियों ने भी लंबे समय से इस समस्या पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में स्टेशन के बाहर जाम लगना आम बात हो गई है। कई लोग समय से पहले घर से निकलने के बावजूद ट्रैफिक में फंस जाते हैं और ट्रेन पकड़ने के लिए उन्हें भारी भागदौड़ करनी पड़ती है। कुछ यात्रियों का कहना है कि टैक्सी, ऑटो और निजी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही तथा पार्किंग व्यवस्था की कमी से समस्या लगातार बढ़ रही है।
शहर के ट्रैफिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए दीर्घकालिक ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी, जिसमें अलग ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप जोन, व्यवस्थित पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन के लिए अलग लेन, स्मार्ट ट्रैफिक मॉनिटरिंग और पीक आवर्स के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती जैसे कदम शामिल किए जाएं।
सांसद मनीष तिवारी की ओर से एक बार फिर यह मुद्दा उठाए जाने के बाद रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे प्रशासन, चंडीगढ़ पुलिस और अन्य संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कितनी जल्दी ठोस और प्रभावी कदम उठाते हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि लंबे समय से चली आ रही इस परेशानी का जल्द समाधान निकलेगा और रेलवे स्टेशन तक पहुंचना पहले की तरह आसान और सुगम बन सकेगा।




