असम में बाढ़ का असर बरकरार, जलस्तर घटने के बावजूद 5 लाख से ज्यादा लोग संकट में; राहत अभियान जारी

असम में बाढ़ का असर बरकरार, जलस्तर घटने के बावजूद 5 लाख से ज्यादा लोग संकट में; राहत अभियान जारी

असम में इस वर्ष आई भीषण बाढ़ का प्रभाव अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि कई इलाकों में जलस्तर कम होने लगा है और हालात पहले की तुलना में बेहतर बताए जा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी भी इस प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। राज्य सरकार और विभिन्न राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य चला रही हैं, ताकि सामान्य जनजीवन जल्द से जल्द पटरी पर लौट सके। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी कहा है कि स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों को पूरी तरह राहत दिलाने के लिए अभी काफी काम किया जाना बाकी है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल असम में बाढ़ और इससे जुड़ी अन्य घटनाओं के कारण अब तक 68 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हुई बारिश और नदियों के उफान ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई। सोमवार तक की स्थिति के मुताबिक राज्य के पांच जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं, जहां 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। इसके अलावा 763 गांवों में अब भी पानी भरा हुआ है, जिससे हजारों परिवारों का सामान्य जीवन बाधित बना हुआ है।

सबसे ज्यादा असर चराईदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों में देखने को मिल रहा है। चराईदेव जिले में करीब 1.90 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं शिवसागर में डेढ़ लाख से अधिक लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है, जबकि जोरहाट जिले में लगभग 1.40 लाख लोग इस आपदा से प्रभावित बताए गए हैं। इन इलाकों में कई गांवों का संपर्क अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है और लोगों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।

बाढ़ का असर केवल आबादी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेती और पशुपालन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 48,742 हेक्टेयर कृषि भूमि जलभराव से प्रभावित हुई है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब जाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले समय में किसानों की आय पर भी असर पड़ सकता है। कई किसानों को दोबारा खेती शुरू करने के लिए सरकारी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

पशुधन को भी इस आपदा से काफी नुकसान पहुंचा है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 88,240 घरेलू पशु और पोल्ट्री पक्षी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर पशुओं के लिए चारे और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का प्रमुख साधन होने के कारण इस नुकसान का सीधा असर स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

बाढ़ के कारण राज्य के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। अनेक सड़कों पर पानी भरने से यातायात बाधित हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर तटबंधों को भी क्षति पहुंची है। कई पुल और ग्रामीण संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे राहत कार्यों की गति पर भी असर पड़ा। प्रशासन लगातार क्षतिग्रस्त तटबंधों और सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर रहा है ताकि प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और आवश्यक सेवाएं आसानी से पहुंचाई जा सकें।

राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत शिविरों का संचालन तेज कर दिया है। चार जिलों में कुल 354 राहत शिविर और सहायता वितरण केंद्र बनाए गए हैं। इन शिविरों में 37,724 से अधिक विस्थापित लोगों को अस्थायी आश्रय दिया गया है। यहां भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है।

राहत और बचाव अभियान में कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग तथा असम पुलिस की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं। कई स्थानों पर नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि चिकित्सा दल भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को जल्द राहत पहुंचाना और जरूरी सेवाओं को सामान्य करना है। उन्होंने बताया कि जहां-जहां पानी कम हुआ है, वहां बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। साथ ही पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क संपर्क को भी तेजी से बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार पुनर्वास और पुनर्निर्माण के कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

हालांकि मौजूदा हालात पहले की तुलना में बेहतर हैं, लेकिन कुछ सप्ताह पहले स्थिति कहीं अधिक गंभीर थी। उस समय राज्य के 25 जिले बाढ़ से प्रभावित थे और नौ लाख से ज्यादा लोग इस आपदा की चपेट में आ गए थे। उस दौरान 1,800 से अधिक गांव जलमग्न हो गए थे और कई इलाकों में सामान्य जीवन पूरी तरह ठप पड़ गया था। लगातार राहत कार्य और जलस्तर में गिरावट के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों की संख्या कम हुई है, लेकिन चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी वास्तविक चुनौतियां शुरू होती हैं। हजारों परिवारों को अपने घरों की मरम्मत करनी होगी, किसानों को दोबारा खेती शुरू करनी होगी और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को पुनर्निर्मित करना पड़ेगा। इसके अलावा जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य में हुए कुल आर्थिक नुकसान का अंतिम आकलन अभी तैयार नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की एक टीम प्रभावित जिलों का दौरा कर रही है और घरों, सड़कों, पुलों, कृषि भूमि तथा अन्य सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को हुए नुकसान का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर पुनर्निर्माण और मुआवजे से संबंधित आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं की बहाली पर है। बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे घट रहा हो, लेकिन हजारों परिवार अब भी अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित लोगों का जीवन सामान्य नहीं हो जाता, तब तक राहत और सहायता अभियान लगातार जारी रहेगा। असम के लिए यह बाढ़ एक बार फिर बड़ी प्राकृतिक चुनौती बनकर सामने आई है, जिसने लोगों की आजीविका, कृषि, बुनियादी ढांचे और दैनिक जीवन पर व्यापक असर छोड़ा है। अब उम्मीद की जा रही है कि मौसम में सुधार और प्रशासन के लगातार प्रयासों से आने वाले दिनों में हालात पूरी तरह सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।