ईरान-अमेरिका तनाव के बीच समुद्र में बढ़ा जोखिम, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गहराई चिंता

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच समुद्र में बढ़ा जोखिम, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गहराई चिंता

मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव का असर अब समुद्री व्यापार और उस पर निर्भर हजारों कर्मचारियों पर भी दिखाई देने लगा है। खासतौर पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि हाल के दिनों में ओमान तट के आसपास हुई घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन जगत को झकझोर दिया है। भारत सरकार ने एक जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय क्रू सदस्यों की मौत की पुष्टि की है, जबकि एक अन्य जहाज से जुड़ी नई घटना ने समुद्री मार्गों पर मंडरा रहे खतरे को और गंभीर बना दिया है।

अमेरिकी कार्रवाई के बाद तीन भारतीयों की मौत की पुष्टि

भारत सरकार ने गुरुवार को जानकारी दी कि ओमान के पास एक वाणिज्यिक टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में लापता हुए तीन भारतीय नाविक अब मृत पाए गए हैं। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि तीनों के शव बरामद कर लिए गए हैं और उनकी पहचान भी पूरी कर ली गई है।

इन नाविकों के लापता होने की खबर हमले के तुरंत बाद सामने आई थी। लंबे समय तक उनकी तलाश जारी रही, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि वे इस घटना में जान गंवा चुके हैं। इस दुखद घटना ने समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

घटना के बाद भारत ने अमेरिका के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। नई दिल्ली ने अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी नागरिक जहाज पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई बेहद चिंताजनक है और इससे निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को और भड़काने के बजाय सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। सरकार ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नागरिक जहाजों को संघर्ष से दूर रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जिस टैंकर पर हुआ हमला, उसे लेकर अमेरिका का दावा

अमेरिका की ओर से कहा गया कि जिस जहाज को निशाना बनाया गया, उसने नौसैनिक निर्देशों का पालन नहीं किया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जहाज ने कथित तौर पर घेराबंदी को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद उसके इंजन सेक्शन को सटीक हथियारों की मदद से निशाना बनाया गया। बताया गया कि यह हमला मोटर टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर किया गया था। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य जहाज को रोकना था, जबकि भारत ने इस घटना में नागरिकों के मारे जाने पर गंभीर चिंता जताई है।

21 भारतीयों को बचाया गया था

हमले के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि जहाज पर मौजूद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि उस समय तीन क्रू सदस्य लापता बताए गए थे। बाद में यही तीनों नाविक मृत पाए गए। बचाए गए नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय मिशनों और संबंधित एजेंसियों ने लगातार समन्वय किया। सरकार ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया है।

एक और जहाज से जुड़ी नई घटना ने बढ़ाई चिंता

इसी बीच गुरुवार को एक अन्य समुद्री घटना की जानकारी सामने आई। ओमान में स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि शिनास बंदरगाह के पास एक पोत से संबंधित घटना की सूचना मिली है, जिस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि वह स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क में है ताकि स्थिति की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके। हालांकि शुरुआती बयान में घटना की प्रकृति या संभावित नुकसान के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया गया। बाद में फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया ने दावा किया कि यह मामला एमटी जलवीर नामक जहाज से जुड़ा है। राहत की बात यह रही कि इस जहाज पर मौजूद सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं और उन्हें किसी प्रकार की गंभीर क्षति नहीं पहुंची।

संघर्ष क्षेत्रों में बढ़ता जा रहा समुद्री जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अब केवल देशों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका सीधा असर समुद्री व्यापार और उन जहाजों पर पड़ रहा है जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरते हैं।

तेल, गैस और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई करने वाले जहाज अक्सर ऐसे क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं जहां सैन्य गतिविधियां तेज रहती हैं। ऐसे में किसी भी गलत पहचान, संचार की कमी या सैन्य कार्रवाई का खतरा नागरिक जहाजों पर भी मंडराता रहता है। हाल की घटनाओं ने यह दिखाया है कि युद्ध या संघर्ष में सीधे शामिल न होने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। समुद्र में काम करने वाले नाविकों के लिए यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि वे लंबे समय तक संवेदनशील समुद्री मार्गों पर तैनात रहते हैं।

वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत की बड़ी भूमिका

भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान समय में तीन लाख से अधिक भारतीय समुद्री उद्योग में कार्यरत हैं। यह संख्या पिछले दशक की तुलना में काफी बढ़ी है। करीब दस वर्ष पहले भारतीय नाविकों की संख्या लगभग 1.25 लाख थी, लेकिन वैश्विक मांग बढ़ने के साथ यह आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है। आज दुनिया भर के व्यापारी जहाजों, तेल टैंकरों और मालवाहक पोतों पर बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी काम कर रहे हैं।

दुनिया के जहाजों पर अहम जिम्मेदारियां संभालते हैं भारतीय

भारतीय नाविक केवल सामान्य क्रू सदस्य के रूप में ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण तकनीकी और नेतृत्वकारी भूमिकाओं में भी कार्यरत हैं। इनमें जहाजों के कप्तान, मरीन इंजीनियर, नेविगेशन अधिकारी, इलेक्ट्रिकल विशेषज्ञ और तकनीकी प्रबंधक जैसे पद शामिल हैं। उनकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षण के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भारतीय पेशेवरों को प्राथमिकता देती हैं। यही वजह है कि वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 10 से 12 प्रतिशत तक मानी जाती है।

वैश्विक व्यापार की धुरी है समुद्री परिवहन

दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक समुद्री व्यापार पर निर्भर करती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, मात्रा के हिसाब से लगभग 90 से 95 प्रतिशत वैश्विक व्यापार समुद्री मार्गों के जरिए होता है।

कच्चा तेल, एलएनजी, कोयला, अनाज, औद्योगिक मशीनरी, वाहन और उपभोक्ता वस्तुओं सहित असंख्य उत्पाद समुद्री जहाजों के माध्यम से एक देश से दूसरे देश तक पहुंचते हैं। ऐसे में समुद्री परिवहन में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है। भारतीय नाविक इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे न केवल जहाजों का संचालन करते हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करते हैं कि दुनिया भर में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे।

सुरक्षा को लेकर नए सिरे से उठे सवाल

ओमान के पास हुई हालिया घटनाओं ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी तंत्र विकसित करने की जरूरत है। भारत सहित कई देश अपने नागरिक नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है, समुद्री मार्गों पर काम करने वाले हजारों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

तीन भारतीय नाविकों की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक संघर्षों का असर केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी कीमत उन लोगों को भी चुकानी पड़ती है जो रोजमर्रा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू बनाए रखने के लिए समुद्र में अपनी सेवाएं दे रहे होते हैं।