संसद के मानसून सत्र का बुधवार को आठवां दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार आज लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को पारित कराने की कोशिश करेगी। इसके बाद यही विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि यह संशोधन देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा, जबकि विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मान रहा और व्यापक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
मंगलवार को लोकसभा में इस विधेयक पर लंबी बहस हुई। दोपहर लगभग 2 बजे शुरू हुई चर्चा रात 11 बजे तक चली। विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं, छात्रों के भविष्य और सरकार की जिम्मेदारी जैसे कई मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रखी। चर्चा पूरी होने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और अब बुधवार को इस विधेयक पर मतदान कराया जाएगा।
सरकार द्वारा लाया गया यह संशोधन वर्ष 2024 में लागू किए गए कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उनके अनुसार संशोधित कानून के लागू होने से ऐसे संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों को सजा देना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना है।
विपक्ष ने बहस के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी दलों का कहना था कि केवल कानून में संशोधन कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका तर्क था कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों, संबंधित अधिकारियों और प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही तय किए बिना पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। कई सांसदों ने यह भी कहा कि देश के लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है, इसलिए सरकार को जवाबदेह व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्रालय से जुड़ा राजनीतिक विवाद भी छाया रहा। हाल ही में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। संसद परिसर के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जिस व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है, उसके चयन पर सवाल उठते हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी लोकसभा में इसी मुद्दे को उठाया। हालांकि उनकी कुछ टिप्पणियों को बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
पेपर लीक का मुद्दा पिछले कई महीनों से देश की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ा विवाद रहा, जिसने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह परीक्षा देशभर के लगभग 20 लाख छात्रों के करियर से जुड़ी मानी जाती है। ऐसे में पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में व्यापक नाराजगी देखने को मिली।
NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए। शुरुआती जांच और विवाद बढ़ने के बाद सरकार तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इसके बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस पूरी प्रक्रिया के कारण लाखों विद्यार्थियों को मानसिक तनाव, अनिश्चितता और लंबे इंतजार का सामना करना पड़ा। कई छात्रों ने सार्वजनिक रूप से अपनी परेशानी साझा की, जबकि विभिन्न राज्यों से आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं की खबरें भी सामने आईं, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। अलग-अलग राज्यों में अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर धरने दिए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी लंबे समय तक आंदोलन चलता रहा। कॉकरोच जनता पार्टी ने लगातार 36 दिनों तक आंदोलन जारी रखा। इस दौरान परीक्षा व्यवस्था में सुधार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग उठाई गई। आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों का भी समर्थन मिला।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस मुद्दे पर लंबा अनशन किया, जिससे परीक्षा सुधार की मांग राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई। संसद के भीतर और बाहर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांगता रहा। विपक्षी दलों का आरोप था कि सरकार समय रहते परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही और इसी वजह से लाखों छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ी।
राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद मंत्रालय की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को सौंपी गई। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार आवश्यक हैं।
सरकार का दावा है कि संशोधन विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसना आसान होगा। सरकार के अनुसार तकनीकी निगरानी को मजबूत किया जाएगा, डिजिटल सुरक्षा बढ़ाई जाएगी और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल संगठित नेटवर्क के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा जांच एजेंसियों को भी अधिक अधिकार देने पर जोर दिया गया है ताकि ऐसे मामलों की तेजी से जांच पूरी हो सके।
दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि परीक्षा माफिया केवल कानून की कमजोरी का फायदा नहीं उठाते, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार भी बड़ी वजह है। इसलिए कानून के साथ-साथ परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था भी जरूरी है। विपक्ष ने मांग की कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से पेपर लीक हुआ, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ की है। अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, परीक्षा माफिया के नेटवर्क और तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार CBI जल्द ही इस मामले में अपनी चार्जशीट अदालत में दाखिल कर सकती है।
सरकार का मानना है कि नया संशोधन लागू होने के बाद भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और युवाओं का भरोसा दोबारा मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि कानून तभी प्रभावी होगा जब उसके साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। इसी वजह से आज लोकसभा में होने वाली वोटिंग और उसके बाद राज्यसभा में प्रस्तावित चर्चा को संसद के इस मानसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण कार्यवाहियों में गिना जा रहा है।
देशभर के लाखों छात्र, अभिभावक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी अब संसद की कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं। सभी की उम्मीद है कि जो भी कानून बने, वह केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि वास्तव में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में प्रभावी भूमिका निभाए। आने वाले समय में इस विधेयक पर संसद का फैसला देश की परीक्षा व्यवस्था की दिशा और भविष्य दोनों तय करने में अहम साबित हो सकता है।




