हिमाचल के हक की लड़ाई तेज, BBMB बकाया से चंडीगढ़ हिस्सेदारी तक CM सुक्खू ने साफ किया सरकार का रुख

हिमाचल के हक की लड़ाई तेज, BBMB बकाया से चंडीगढ़ हिस्सेदारी तक CM सुक्खू ने साफ किया सरकार का रुख

शिमला। हिमाचल प्रदेश के अधिकारों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रदेश के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हिस्से की बिजली, वित्तीय देनदारियों, भूमि और परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों को सरकार मजबूती के साथ उठा रही है और जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई को भी पूरी ताकत से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका कहना है कि हिमाचल को जिन मामलों में वर्षों से उसका वैधानिक और कानूनी अधिकार नहीं मिला है, उन्हें मौजूदा सरकार प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने में जुटी है।

शिमला से जारी अपने बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामलों में प्रभावी पैरवी की है, जिनका सीधा संबंध हिमाचल की आर्थिक स्थिति और भविष्य के हितों से है। उनका कहना है कि राज्य के अधिकारों से जुड़े मामलों को केवल प्रशासनिक स्तर पर उठाने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर अदालतों में भी मजबूती से रखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हिमाचल को विभिन्न परियोजनाओं और परिसंपत्तियों में उसका निर्धारित हिस्सा मिले और वर्षों से लंबित वित्तीय दावों का भी निपटारा हो।

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी BBMB से जुड़े मामले को हिमाचल के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य का लगभग 4,200 करोड़ रुपये का वित्तीय दावा और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली का अधिकार अभी भी लंबित है। उन्होंने कहा कि यह कोई नया दावा नहीं है, बल्कि हिमाचल लंबे समय से अपने हिस्से की मांग करता रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब डेढ़ दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय से भी राज्य के पक्ष में फैसला आ चुका है, लेकिन इसके बावजूद हिमाचल को अब तक उसका पूरा अधिकार नहीं मिल पाया है।

सुक्खू ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है और BBMB से संबंधित हिमाचल के वित्तीय तथा बिजली अधिकारों को हासिल करने के लिए हर जरूरी मंच पर पैरवी की जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य अपने हिस्से को लेकर पीछे हटने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हिमाचल को मिलने वाली बिजली और उससे जुड़े वित्तीय अधिकार केवल कागजी दावे नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के हित से जुड़े महत्वपूर्ण संसाधन हैं।

उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य ने देश के ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों से देश के विभिन्न हिस्सों को बिजली मिलती है, ऐसे में हिमाचल को भी उसके वैधानिक हिस्से का लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार प्रदेश के संसाधनों और अधिकारों से जुड़े किसी भी मामले में नरम रुख नहीं अपनाएगी।

चंडीगढ़ में हिमाचल के हिस्से का मुद्दा भी मुख्यमंत्री ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश का 7.19 प्रतिशत वैध हिस्सा बनता है। राज्य सरकार लंबे समय से इस अधिकार को लेकर अपना पक्ष रखती आ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल अपने इस दावे को आगे भी मजबूती से उठाता रहेगा और प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, चंडीगढ़ से जुड़ा हिमाचल का दावा केवल राजनीतिक विषय नहीं है, बल्कि यह पुनर्गठन से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों से जुड़ा मामला है। इसलिए सरकार इस मुद्दे को उचित मंचों पर तथ्यों और कानूनी आधार के साथ उठा रही है। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश को अपने हिस्से की भूमि और परिसंपत्तियों से संबंधित अधिकार हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

शानन जलविद्युत परियोजना का मामला भी हिमाचल सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन परियोजना की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद परियोजना को हिमाचल प्रदेश को वापस नहीं सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को पहले भी विभिन्न स्तरों पर उठाती रही है और अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन परियोजना हिमाचल के लिए केवल एक जलविद्युत परियोजना नहीं, बल्कि राज्य के अधिकार और संसाधनों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। लीज अवधि समाप्त होने के बाद परियोजना के भविष्य और उसके नियंत्रण को लेकर उठे विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना है। प्रदेश सरकार का पक्ष स्पष्ट है कि राज्य के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और परियोजना से संबंधित अधिकारों का उचित निर्धारण किया जाना चाहिए।

सुक्खू ने अपनी सरकार की ओर से कानूनी मामलों में हासिल की गई उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 2002 से विवाद में रहे वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार की प्रभावी पैरवी के कारण प्रदेश को इस मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार, लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का समाधान हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह दर्शाता है कि सरकार राज्य से जुड़े पुराने मामलों को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में सफलता हासिल करने के लिए केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मजबूत कानूनी तैयारी, दस्तावेजों का अध्ययन और लगातार न्यायिक पैरवी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इसी दृष्टिकोण के साथ पुराने मामलों की समीक्षा की है और जहां हिमाचल के हित जुड़े हैं, वहां प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखा जा रहा है।

उन्होंने 1,045 मेगावाट क्षमता वाली कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना की रॉयल्टी से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में राज्य सरकार को अहम सफलता मिली है और इससे प्रदेश के राजस्व को आने वाले समय में लाभ मिलेगा। हिमाचल की अर्थव्यवस्था में जलविद्युत क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए सरकार का प्रयास है कि बिजली परियोजनाओं से राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी और अन्य वैधानिक लाभों का सही तरीके से निर्धारण और संग्रह सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं और ऐसे में राज्य के प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाली आय का महत्व और बढ़ जाता है। जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली रॉयल्टी, बिजली का हिस्सा और अन्य वित्तीय लाभ प्रदेश की विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन सकते हैं। इसलिए सरकार ऐसे मामलों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती।

सुक्खू ने भविष्य में हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाली बड़ी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल को इसके विद्युत घटक से हर वर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होने का अनुमान है। इस बिजली का अनुमानित वार्षिक मूल्य करीब 600 करोड़ रुपये बताया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना का लाभ केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे हिमाचल की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक आधार पर मजबूती मिल सकती है। परियोजना से मिलने वाला बिजली लाभ राज्य के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। ऐसे में सरकार बड़ी जलविद्युत और बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं से जुड़े राज्य के अधिकारों को सुरक्षित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के लिए जल संसाधन उसकी सबसे बड़ी प्राकृतिक ताकतों में से एक हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में हो रहा है, लेकिन राज्य को इसके बदले उचित आर्थिक लाभ भी मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए राज्य के संसाधनों का उपयोग प्रदेश के लोगों के हित में हो।

सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल वर्तमान आर्थिक चुनौतियों से निपटना नहीं है, बल्कि हिमाचल के लिए दीर्घकालिक वित्तीय आधार तैयार करना भी है। इसके लिए पुराने वित्तीय दावों का निपटारा, बिजली परियोजनाओं से मिलने वाले अधिकारों की प्राप्ति और राज्य की परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों का समाधान जरूरी है।

मुख्यमंत्री के बयान से यह भी स्पष्ट है कि हिमाचल सरकार BBMB, चंडीगढ़ की परिसंपत्तियों, शानन परियोजना और विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मामलों को अलग-अलग मुद्दों के रूप में नहीं बल्कि प्रदेश के व्यापक आर्थिक अधिकारों के हिस्से के रूप में देख रही है। सरकार का मानना है कि यदि इन मामलों में हिमाचल को उसका वैधानिक हिस्सा मिलता है तो इससे राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के अधिकारों से जुड़े मामलों में सरकार लगातार कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास कर रही है। जहां बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया से समाधान संभव होगा, वहां उस रास्ते को अपनाया जाएगा और जहां न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक होगा, वहां अदालत में मजबूती से पक्ष रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि हिमाचल के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पुराने लंबित मामलों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य की परियोजनाओं में भी हिमाचल के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। BBMB से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के वित्तीय दावे और बिजली के हिस्से से लेकर चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी तथा शानन जलविद्युत परियोजना तक, सरकार सभी मामलों में अपने पक्ष को मजबूती से रखने की तैयारी में है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल को अपने अधिकार हासिल करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़े तो सरकार इसके लिए भी तैयार है। प्रदेश के संसाधनों और परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों में अंतिम लक्ष्य यही है कि हिमाचल को उसका वैधानिक हिस्सा मिले और उससे होने वाला आर्थिक लाभ राज्य के विकास, जनकल्याण और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।