अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे। राष्ट्रपति चुनाव के करीब दो साल बाद होने वाला यह चुनाव यह तय करेगा कि अमेरिकी कांग्रेस में किस पार्टी का दबदबा रहेगा। मौजूदा हालात और हालिया सर्वेक्षणों के संकेतों को देखें तो ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के सामने अपनी स्थिति बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।
इप्सोस-एएपीआई के सर्वे के मुताबिक, मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत गंवाने की संभावना करीब 65% आंकी गई है। अगर चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती है और रिपब्लिकन कांग्रेस में अपना नियंत्रण खो देते हैं, तो ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को उसी तरह आगे बढ़ाना आसान नहीं रहेगा, जैसा वे अभी कर रहे हैं।
मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प राष्ट्रपति पद से नहीं हटेंगे। उनका चार साल का कार्यकाल जारी रहेगा। हालांकि, कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने पर राष्ट्रपति की राजनीतिक ताकत और फैसलों को लागू करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि नवंबर का चुनाव ट्रम्प के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस का नियंत्रण गया तो ट्रम्प के सामने बढ़ेगा विपक्ष
अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस की शक्तियां अलग-अलग होती हैं। राष्ट्रपति कई महत्वपूर्ण फैसले कार्यपालिका के जरिए ले सकते हैं, लेकिन कानून बनाने, सरकारी खर्च को मंजूरी देने और कई नीतियों को आगे बढ़ाने में कांग्रेस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में अपना बहुमत खो देती है, तो ट्रम्प को डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। फिलहाल जिस तरह ट्रम्प टैरिफ, इमिग्रेशन, वीजा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर तेजी से फैसले ले रहे हैं, विपक्ष के मजबूत होने के बाद उन्हें अधिक राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
मिडटर्म चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सिर्फ कांग्रेस के सदस्यों का चुनाव नहीं होता। अलग-अलग राज्यों और स्थानीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण पदों के लिए मतदान होता है। दोनों प्रमुख पार्टियां अपने अधिकांश उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर चुकी हैं। करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय किए जा चुके हैं।
ऐसे में चुनावी अभियान अब धीरे-धीरे तेज होने की उम्मीद है और ट्रम्प की नीतियां इसका प्रमुख मुद्दा बन सकती हैं।
महंगाई बन सकती है ट्रम्प के लिए सबसे बड़ा चुनावी सिरदर्द
मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के बीच अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतें सबसे बड़ी चिंता बनकर सामने आई हैं। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को अपने मतदान के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
यह आंकड़ा ट्रम्प प्रशासन के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि चुनाव में आम मतदाता अक्सर अपनी रोजमर्रा की आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता देता है। भोजन, किराना, ईंधन, घर चलाने का खर्च और अन्य जरूरी सामान की कीमतें सीधे लोगों के बजट को प्रभावित करती हैं।
एपी-एनओआरसी के सर्वे में भी ट्रम्प की आर्थिक नीतियों को लेकर तस्वीर बहुत मजबूत नहीं दिखाई दी। केवल 32% अमेरिकियों ने माना कि राष्ट्रपति अर्थव्यवस्था को अच्छी तरह संभाल रहे हैं। इसके उलट 69% लोगों ने मौजूदा आर्थिक हालात को खराब बताया।
इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि उन्हें रोजाना इस्तेमाल होने वाली किराने की चीजों की कीमतें महंगी लग रही हैं। वहीं, करीब 48% लोगों को आशंका है कि अगले साल आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।
अगर चुनाव तक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता मतदाताओं की प्रमुख चिंता बनी रहती है, तो डेमोक्रेट्स ट्रम्प सरकार की आर्थिक नीतियों को निशाना बनाकर रिपब्लिकन उम्मीदवारों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
ईरान के साथ युद्ध का असर चुनाव पर भी पड़ सकता है
ट्रम्प के लिए एक और बड़ी चुनौती विदेश नीति से जुड़ी है। ईरान के साथ जारी युद्ध अब केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।
इप्सोस के सर्वे में करीब 20% मतदाताओं ने ईरान युद्ध को अपने वोट के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा माना। यह संख्या अर्थव्यवस्था या महंगाई से कम जरूर है, लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है तो इसका महत्व तेजी से बढ़ सकता है।
ईरान से जुड़ा कोई भी लंबा सैन्य संघर्ष वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में तेजी आने पर अमेरिका में पेट्रोल से लेकर परिवहन और दूसरी वस्तुओं की लागत बढ़ने का खतरा रहता है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है।
यही ट्रम्प के लिए सबसे मुश्किल राजनीतिक संतुलन है। एक तरफ उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर मजबूत नेता की छवि बनाए रखनी होगी, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अमेरिकी जनता को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि युद्ध का बोझ उनकी जेब पर नहीं पड़ेगा।
अगर तेल और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी आती है, तो विपक्ष इसे ट्रम्प की नीतियों की आलोचना के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
इमिग्रेशन, जो कभी ट्रम्प की ताकत था, अब चुनौती बनता दिख रहा
डोनाल्ड ट्रम्प की राजनीति में इमिग्रेशन लंबे समय से सबसे प्रमुख मुद्दों में रहा है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा उनके अभियान के महत्वपूर्ण विषय थे। ट्रम्प ने सत्ता में लौटने के बाद अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और डिपोर्टेशन को अपनी प्राथमिकताओं में रखा।
लेकिन अब इस नीति को लेकर मतदाताओं की राय पहले जैसी नहीं दिख रही है।
हालिया सर्वे के अनुसार, 61% अमेरिकी ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति से असहमति जताते हैं, जबकि केवल 39% लोग इसका समर्थन करते हैं। खास बात यह है कि दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में यही नीति करीब 49% लोगों के समर्थन में थी।
इससे संकेत मिलता है कि समय के साथ ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति को लेकर मतदाताओं के बीच असंतोष बढ़ा है।
रिपब्लिकन समर्थकों के बीच भी समर्थन में गिरावट देखी गई है। पार्टी के भीतर करीब 80% मतदाता अब इस नीति का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि यह संख्या अभी भी काफी अधिक है, लेकिन ट्रम्प के लिए अपने ही समर्थक आधार में समर्थन का कमजोर होना चुनावी लिहाज से चिंता की बात हो सकती है।
डेमोक्रेट्स चुनाव प्रचार के दौरान डिपोर्टेशन, सीमा पर कार्रवाई और प्रवासियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा सकते हैं।
टैरिफ और वीजा नीति पर भी बढ़ सकता है टकराव
ट्रम्प की आर्थिक रणनीति में टैरिफ एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वे अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने और दूसरे देशों से व्यापारिक रियायतें हासिल करने के लिए आयात शुल्क का इस्तेमाल करते रहे हैं।
लेकिन कांग्रेस में विपक्ष मजबूत होने पर टैरिफ से जुड़े फैसलों को लेकर राष्ट्रपति पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। डेमोक्रेट्स यह तर्क दे सकते हैं कि ज्यादा टैरिफ का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
इसी तरह वीजा और इमिग्रेशन नीति भी कांग्रेस और राष्ट्रपति के बीच टकराव का विषय बन सकती है। अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में मजबूत स्थिति हासिल करते हैं तो वे ऐसे कानूनों और बजट संबंधी फैसलों के जरिए ट्रम्प प्रशासन की नीतियों को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं होगा कि ट्रम्प तुरंत अपने सभी फैसले लागू करने में असमर्थ हो जाएंगे। लेकिन हर बड़े कदम के लिए राजनीतिक विरोध और कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
क्या ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की नौबत आ सकती है?
मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ट्रम्प के खिलाफ संभावित महाभियोग को लेकर हो सकती है। यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस के दोनों सदनों में पर्याप्त ताकत हासिल कर लेते हैं, तो उनके पास राष्ट्रपति की नीतियों और फैसलों की जांच करने के लिए ज्यादा संसदीय अधिकार होंगे।
महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं। केवल महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो जाने से ट्रम्प राष्ट्रपति पद से बाहर नहीं होंगे। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई और सीनेट में आवश्यक समर्थन की जरूरत होगी।
फिर भी, डेमोक्रेट्स को कांग्रेस में मजबूत बहुमत मिलने पर ट्रम्प प्रशासन पर जांच और संसदीय दबाव बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इससे उनके दूसरे कार्यकाल के अंतिम दो साल काफी मुश्किल हो सकते हैं।
ईरान युद्ध में कांग्रेस की भूमिका भी अहम होगी
युद्ध और सैन्य कार्रवाई के मामले में भी कांग्रेस की भूमिका ट्रम्प के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। किसी लंबे सैन्य अभियान के लिए फंडिंग और उससे जुड़े संसदीय फैसलों पर कांग्रेस दबाव बना सकती है।
अगर डेमोक्रेट्स सदनों में मजबूत स्थिति में पहुंचते हैं, तो वे ईरान युद्ध की लागत, सैन्य अभियान और प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठा सकते हैं। युद्ध के लिए आवश्यक बजट को लेकर भी राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।
इस तरह मिडटर्म चुनाव का परिणाम सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर अमेरिका की विदेश नीति पर भी पड़ सकता है।
नवंबर का चुनाव ट्रम्प के बाकी कार्यकाल की दिशा तय करेगा
ट्रम्प के लिए मिडटर्म चुनाव का महत्व इस बात में है कि इसके बाद उनके कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में सत्ता का संतुलन किसके पक्ष में रहेगा। अगर रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत बचाने में सफल रहती है, तो ट्रम्प को अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में अपेक्षाकृत कम राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
इसके विपरीत, अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में बढ़त हासिल करते हैं तो ट्रम्प को हर बड़े फैसले पर ज्यादा विरोध और बातचीत का सामना करना पड़ सकता है।
महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे इस चुनाव के केंद्र में रह सकते हैं। इनके अलावा टैरिफ, वीजा, सीमा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सर्वे रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण तस्वीर दिखा रहे हैं और 65% हार की आशंका का आंकड़ा ट्रम्प खेमे के लिए चेतावनी है। हालांकि चुनाव अभी बाकी है और अमेरिकी राजनीति में अंतिम नतीजे तक समीकरण बदलते रहते हैं।
नवंबर में होने वाला मिडटर्म चुनाव इसलिए केवल कांग्रेस के सदस्यों का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह ट्रम्प की नीतियों पर जनता के रुख और उनके दूसरे कार्यकाल के अगले दो वर्षों की राजनीतिक ताकत का भी बड़ा संकेत देगा।




