संसद के मानसून सत्र में सोमवार का दिन विधायी कामकाज के लिहाज से काफी अहम रहने वाला है। लोकसभा में सरकार की ओर से चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें राज्यों के नाम से जुड़े बदलाव से लेकर सहकारिता, ट्रिब्यूनल और खनिज क्षेत्र से संबंधित कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इनमें से दो विधेयक सदन में रखेंगे, जबकि कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी भी अलग-अलग विधेयक पेश करेंगे।
दूसरी ओर, राज्यसभा में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को सदन में पेश करेंगी। इसके अलावा संसद के बाहर और राजनीतिक गलियारों में भी बैठकों का दौर जारी रहेगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं, विपक्षी दलों की बैठक में विदेशी चंदे से संबंधित FCRA संशोधन बिल को लेकर सरकार की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
लोकसभा में चार विधेयकों पर सरकार का फोकस
सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान सरकार चार अलग-अलग विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मौजूदा कानूनों में संशोधन या नई व्यवस्था का प्रस्ताव है। सबसे ज्यादा चर्चा केरल के नाम में बदलाव से संबंधित विधेयक को लेकर है।
गृह मंत्री अमित शाह केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 सदन में पेश करेंगे। इसके जरिए राज्य के नाम से संबंधित कानूनी बदलाव का प्रस्ताव रखा जाएगा। राज्य के नाम में आधिकारिक बदलाव की प्रक्रिया संसद के स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए यह विधेयक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमित शाह इसी दिन नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एक्ट, 1962 में संशोधन से संबंधित विधेयक भी पेश करेंगे। इस कानून का संबंध सहकारी क्षेत्र के विकास और उससे जुड़ी संस्थागत व्यवस्था से है। सरकार की ओर से प्रस्तावित संशोधन के जरिए मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव किया जाएगा।
इस तरह गृह मंत्रालय से जुड़े दो विधेयक एक ही दिन सदन में आने वाले हैं। इन पर आगे चर्चा और संसदीय प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल और खनन कानून में भी बदलाव का प्रस्ताव
लोकसभा में तीसरा प्रमुख विधेयक कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे। वह ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 सदन में रखेंगे। ट्रिब्यूनल से संबंधित व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से इस विधेयक को लाया जा रहा है।
ट्रिब्यूनल विभिन्न प्रकार के कानूनी और प्रशासनिक विवादों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र से संबंधित कानून में किसी भी बदलाव का असर न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है। सरकार विधेयक के जरिए मौजूदा व्यवस्था में प्रस्तावित सुधारों को संसद के सामने रखेगी।
वहीं, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में संशोधन के लिए विधेयक पेश करेंगे। खनिज संसाधनों से जुड़े इस कानून में बदलाव का प्रस्ताव खनन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ही दिन में ट्रिब्यूनल व्यवस्था और खनन कानून से संबंधित विधेयकों का लोकसभा में आना सरकार के विधायी एजेंडे को व्यापक बनाता है। इन विधेयकों पर सदन में आगे की प्रक्रिया के दौरान विपक्ष की ओर से भी सवाल और सुझाव सामने आ सकते हैं।
राज्यसभा में बैंकिंग कानून पर चर्चा
लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी सोमवार को महत्वपूर्ण विधायी कामकाज होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 सदन में पेश करेंगी। इसके बाद इस विधेयक पर चर्चा की जाएगी।
बैंकिंग रिकॉर्ड और उनसे जुड़े दस्तावेज कानूनी मामलों में अहम सबूत की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बैंकर्स बुक्स से संबंधित कानून बैंकिंग और न्यायिक प्रक्रियाओं दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से प्रस्तावित विधेयक के जरिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव किया जाना है।
राज्यसभा में इस बिल पर होने वाली बहस के दौरान सदस्य इसके प्रावधानों पर अपनी राय रखेंगे। सरकार की ओर से विधेयक लाने के पीछे की वजह और प्रस्तावित बदलावों को भी सदन के सामने स्पष्ट किया जाएगा।
प्रधानमंत्री से मिल सकते हैं शरद पवार गुट के सांसद
संसद की कार्यवाही के बीच सोमवार को राजनीतिक मुलाकात भी चर्चा में है। NCP के शरद पवार गुट के सभी आठ सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात के लिए प्रधानमंत्री से समय मांगा गया है।
अगर यह बैठक होती है तो इसमें महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों के अलावा राजनीतिक और संसदीय विषयों पर भी बातचीत की संभावना रहेगी। फिलहाल मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम प्रधानमंत्री की उपलब्धता और तय समय पर निर्भर करेगा।
शरद पवार गुट के आठ सांसदों का प्रधानमंत्री से एक साथ मिलना संसद के मौजूदा सत्र के दौरान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा, इसे लेकर अभी आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
FCRA संशोधन बिल को लेकर विपक्ष लामबंद
दूसरी तरफ विदेशी चंदे से जुड़े FCRA संशोधन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध करेगी। विपक्षी दल सोमवार को फ्लोर लीडर्स की बैठक में भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक FCRA संशोधन बिल संसद के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में लोकसभा में लाया जा सकता है। सरकार की दलील है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी स्रोतों से मिलने वाले चंदे की व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
हालांकि विपक्षी दल सरकार की इस दलील से सहमत नहीं हैं। कई विपक्षी पार्टियां पहले ही इस प्रस्तावित कानून को लेकर आपत्ति जता चुकी हैं। उनका कहना है कि FCRA के प्रावधानों में बदलाव का असर उन संस्थाओं और संगठनों पर पड़ सकता है जो विदेशी योगदान प्राप्त करते हैं।
लालदुहोमा ने शाह के सामने उठाए छह मुद्दे
FCRA संशोधन को लेकर राज्यों की ओर से भी चिंताएं सामने आई हैं। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने FCRA से संबंधित छह मुद्दे गृह मंत्री के सामने रखे।
लालदुहोमा के मुताबिक, बैठक के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि प्रस्तावित बदलावों को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। यानी पुराने मामलों पर नए प्रावधानों का पूर्वव्यापी असर नहीं होगा।
हालांकि FCRA से जुड़े अन्य मुद्दों पर अभी चर्चा बाकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार इन विषयों को संसद में 12 अगस्त से चर्चा के दौरान उठाया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि विधेयक को लेकर संसद के भीतर बहस काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
DMK भी कर चुका है विरोध
FCRA के प्रस्तावित बदलावों का विरोध करने वालों में DMK भी शामिल है। पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने FCRA की धारा 15 को खत्म करने की मांग भी उठाई है।
NCP (SP) भी प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ अपना रुख जाहिर कर चुका है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को इस तरह के महत्वपूर्ण बदलावों पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए और संबंधित राज्यों तथा संगठनों की चिंताओं को ध्यान में रखना चाहिए।
ऐसे में संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में FCRA संशोधन विधेयक सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। सोमवार की विपक्षी बैठक में इस बिल को लेकर साझा रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
संसद में आज किन मुद्दों पर रहेगी नजर?
सोमवार को संसद की गतिविधियों को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में देखा जा सकता है। पहला, लोकसभा में सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले चार विधेयक हैं। इनमें केरल के नाम में बदलाव, सहकारी विकास, ट्रिब्यूनल सुधार और खनन कानून से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
दूसरा बड़ा मुद्दा राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पर होने वाली चर्चा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस विधेयक को सदन में पेश करेंगी।
तीसरा और राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा संवेदनशील मुद्दा FCRA संशोधन बिल है। विपक्ष इस पर पहले ही विरोध का ऐलान कर चुका है। सरकार इसे विदेशी चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसके प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP के शरद पवार गुट के आठ सांसदों के बीच संभावित मुलाकात पर भी नजर रहेगी। कुल मिलाकर मानसून सत्र का यह दिन विधायी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी काफी अहम रहने वाला है।



