हिमाचल में भ्रष्टाचार पर सुक्खू का सख्त रुख, स्वास्थ्य क्षेत्र में भर्ती से लेकर नई योजनाओं तक बड़े ऐलान

हिमाचल में भ्रष्टाचार पर सुक्खू का सख्त रुख, स्वास्थ्य क्षेत्र में भर्ती से लेकर नई योजनाओं तक बड़े ऐलान

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी योजनाओं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नियम-130 के तहत हुई चर्चा में विपक्ष ने स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, रिक्त पदों और उपकरणों की खरीद को लेकर सरकार को घेरा, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार का पक्ष रखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राजनीतिक जीवन में उन्हें रोकने के लिए कई तरह की कोशिशें की गईं, लेकिन भगवान और जनता के आशीर्वाद से वह मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सरकार की लड़ाई जारी रहेगी और मामलों की एक-एक परत सामने लाई जाएगी।

सुक्खू ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से सरकार पीछे नहीं हटेगी और विपक्ष को धमकाने की राजनीति बंद करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम कर रही है और व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के समय तैयार की गई चार्जशीट के आधार पर वर्तमान सरकार जांच करवा रही है। उनका कहना था कि सरकार किसी भी मामले को राजनीतिक द्वेष की भावना से नहीं, बल्कि तथ्यों और जांच के आधार पर आगे बढ़ा रही है।

सदन में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की आगामी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने घोषणा की कि 2 अक्तूबर से ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत प्रदेश के 2 लाख परिवारों को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना भी शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत देने के साथ उनकी मूलभूत जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं का दायरा और मजबूत किया जाएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि दिसंबर से मार्च के बीच राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ नर्स के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से 300 डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए केवल भवन और उपकरण ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपलब्धता भी जरूरी है। सरकार इसी दिशा में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।

सुक्खू ने हिमकेयर योजना को लेकर भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना की जांच विपक्ष की मांग पर ही करवाई गई थी। जांच के दौरान कथित अनियमितताओं के कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिन पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जांच में ऐसे बिल सामने आए, जिनमें चार पुरुष मरीजों के लिए बच्चेदानी के ऑपरेशन का उल्लेख किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की विसंगतियां स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को दर्शाती हैं। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी योजना में गड़बड़ी सामने आती है तो सरकार कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अत्याधुनिक ऑटोमेशन लैब स्थापित करने की योजना है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित सुविधा इतनी आधुनिक होगी कि इस स्तर की सुविधा पीजीआई में भी उपलब्ध नहीं है। सरकार का उद्देश्य मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध करवाना है।

सुक्खू ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने रोबोटिक सर्जरी से संबंधित मशीनों की खरीद में करीब एक करोड़ रुपये की बचत की है। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन का इस्तेमाल सावधानी और पारदर्शिता के साथ कर रही है तथा खरीद प्रक्रिया में लागत को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इससे पहले भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने नियम-130 के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निर्माणाधीन भवनों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, दवाओं की उपलब्धता, खाली पदों और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सरकार से जवाब मांगा।

परमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद आदर्श चिकित्सा संस्थानों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के दावे किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है। उनके अनुसार कई स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रही है और कई जगह दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।

भाजपा विधायक ने मेडिकल कॉलेजों में खरीद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में खरीद के मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और सरकार को इस संबंध में श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। उन्होंने टांडा मेडिकल कॉलेज में स्टेंट की खरीद से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले की जांच कराने की मांग भी की।

परमार ने सरकार से स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और यह बताने की मांग की कि अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के कितने पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ दवाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

चर्चा में कांग्रेस विधायक नीरज नैय्यर, डॉ. जनक राज, पवन कुमार काजल और राम कुमार ने भी हिस्सा लिया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और योजनाओं का पक्ष रखा, जबकि विपक्ष ने स्वास्थ्य संस्थानों की जमीनी स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने सत्ता पक्ष के एक विधायक द्वारा पूर्व भाजपा सरकार को लेकर लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई और कहा कि विधानसभा जैसे मंच पर तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

जयराम ठाकुर ने उस दावे का विरोध किया, जिसमें कहा गया था कि पूर्व सरकार ने 16 से 17 संस्थानों पर ताले लगाए और धनराशि कहीं और स्थानांतरित कर दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों को सदन के रिकॉर्ड में रखने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जानी चाहिए।

हिमकेयर योजना को लेकर भी जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरा और कहा कि योजना से संबंधित जांच अभी जारी है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले ही किसी मामले को घोटाला घोषित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही किसी मामले में अंतिम राय बनाई जानी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने अधिकारियों को भी निष्पक्ष होकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी गलत तरीके से किसी मामले को प्रभावित करने या किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश करेगा तो उस जांच की भी जांच हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों से दबाव में काम न करने और जो तथ्य सही हों, उन्हें ही सामने रखने की अपील की।

जयराम ठाकुर ने सरकार के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए करीब चार साल होने जा रहे हैं और अब उसे यह बताना चाहिए कि जमीनी स्तर पर क्या बदलाव आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में ऐसे फैसले ले रही है, जिनका नुकसान भविष्य में कांग्रेस को ही उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उनका आरोप था कि मरीजों को आवश्यक इलाज और सुविधाएं समय पर नहीं मिलने के कारण गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में स्वास्थ्य विभाग और भ्रष्टाचार के मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। सरकार जहां जांच, भर्ती, आधुनिक तकनीक और नई कल्याणकारी योजनाओं को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष अस्पतालों की जमीनी स्थिति और सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सरकार कार्रवाई जारी रखेगी और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। दूसरी ओर जयराम ठाकुर ने जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालने पर सवाल उठाते हुए सरकार से तथ्यात्मक और पारदर्शी तरीके से काम करने की मांग की है। ऐसे में विधानसभा के आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी योजनाओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।