हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का अभियान आठवें स्थान पर खत्म, शूटआउट में बेल्जियम ने दी मात

हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का अभियान आठवें स्थान पर खत्म, शूटआउट में बेल्जियम ने दी मात

भारत की पुरुष हॉकी टीम का वर्ल्ड कप अभियान निराशाजनक अंदाज में समाप्त हो गया। आठवें स्थान के लिए खेले गए मुकाबले में भारत को बेल्जियम के हाथों पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा। निर्धारित समय तक दोनों टीमों के बीच मुकाबला 3-3 की बराबरी पर रहा, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने 4-3 से बाजी मार ली। इस हार के साथ भारतीय टीम टूर्नामेंट में आठवें पायदान पर रही और 51 साल बाद वर्ल्ड कप पदक जीतने का उसका सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।

मुकाबले का सबसे रोमांचक पल अंतिम क्षणों में देखने को मिला। बेल्जियम ने चौथे क्वार्टर में बढ़त हासिल कर ली थी और ऐसा लग रहा था कि भारत को हार के साथ टूर्नामेंट खत्म करना पड़ेगा। लेकिन मैच समाप्त होने में केवल 26 सेकंड बाकी रहते भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार ड्रैग-फ्लिक के जरिए गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। उनके इस गोल ने भारत को 3-3 की बराबरी दिलाई और मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंच गया।

हालांकि शूटआउट में भारतीय खिलाड़ी दबाव को पूरी तरह नहीं झेल सके। शुरुआती तीन प्रयासों में भारत ने गोल किए, लेकिन अंतिम दो मौकों पर टीम चूक गई। इसी का फायदा बेल्जियम ने उठाया और मुकाबला अपने नाम कर लिया।

हरमनप्रीत रहे भारत के सबसे सफल गोल स्कोरर

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह के लिए व्यक्तिगत रूप से यह टूर्नामेंट काफी प्रभावशाली रहा। बेल्जियम के खिलाफ उन्होंने दो गोल किए और पूरे वर्ल्ड कप में कुल आठ गोल के साथ भारत के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने।

निर्धारित समय के दौरान भारत के लिए हरमनप्रीत का पहला गोल 31वें मिनट में आया। पेनल्टी कॉर्नर पर उन्होंने अपनी मशहूर ड्रैग-फ्लिक का इस्तेमाल करते हुए गेंद को गोल में डाल दिया। इस गोल से भारत ने बेल्जियम की बढ़त खत्म करते हुए स्कोर 2-2 कर दिया।

मैच के आखिरी पलों में मिला पेनल्टी कॉर्नर भी भारतीय कप्तान ने ही गोल में बदला। उनकी इस कोशिश ने टीम को हार के मुंह से निकालकर शूटआउट तक पहुंचाया। हालांकि शूटआउट में जब भारत को उनकी जरूरत थी, तब हरमनप्रीत अपना प्रयास गोल में नहीं बदल सके।

पूरे टूर्नामेंट में आठ गोल करने के कारण हरमनप्रीत भारत के सबसे भरोसेमंद स्कोरर साबित हुए। हालांकि टीम को उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन का फायदा पदक के रूप में नहीं मिल सका।

अभिषेक ने दिलाई थी भारत को शुरुआती बढ़त

बेल्जियम के खिलाफ भारत ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की थी। मैच के छठे मिनट में अभिषेक ने गोल करते हुए भारतीय टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती बढ़त मिलने के बाद भारत के पास मुकाबले पर पकड़ मजबूत करने का मौका था, लेकिन बेल्जियम ने जल्द ही खेल का रुख बदल दिया।

दूसरे क्वार्टर में बेल्जियम ने लगातार दो गोल करके भारत को दबाव में ला दिया। 22वें मिनट में पहला गोल आया और उसके ठीक अगले मिनट में एक और गोल कर बेल्जियम ने स्कोर 2-1 कर लिया। इस तरह भारतीय टीम को शुरुआती बढ़त गंवानी पड़ी और हाफ टाइम तक बेल्जियम आगे रहा।

ब्रेक के बाद भारत ने वापसी की कोशिश तेज कर दी। इसका परिणाम 31वें मिनट में मिला, जब हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर स्कोर बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों के बीच मुकाबला काफी कड़ा हो गया और हर हमले के साथ मैच का रोमांच बढ़ता गया।

चौथे क्वार्टर में फिर आगे निकल गया बेल्जियम

मुकाबले के अंतिम चरण में बेल्जियम ने एक बार फिर बढ़त हासिल कर ली। 47वें मिनट में डी केरपेल ने भारत के डिफेंस को भेदते हुए गोल दाग दिया। इस गोल के बाद स्कोर 3-2 हो गया और भारतीय टीम पर हार का खतरा मंडराने लगा।

भारत ने बराबरी के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन बेल्जियम का डिफेंस काफी समय तक भारतीय हमलों को रोकने में सफल रहा। समय तेजी से निकल रहा था और भारत के पास वापसी के लिए बहुत कम अवसर बच रहे थे।

फिर मैच खत्म होने से महज 26 सेकंड पहले भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। यह भारतीय टीम के लिए निर्णायक मौका था। हरमनप्रीत सिंह ने बिना किसी दबाव के गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचाकर स्कोर 3-3 कर दिया। इस गोल के साथ ही मुकाबला शूटआउट में चला गया और भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें फिर जाग उठीं।

शूटआउट में शुरुआती बढ़त के बावजूद भारत हारा

पेनल्टी शूटआउट की शुरुआत भारत के लिए अच्छी रही। शिलानंद लाकड़ा ने अपना प्रयास सफलतापूर्वक गोल में बदला। इसके बाद दिलप्रीत सिंह और अभिषेक ने भी लगातार गोल करके भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

लेकिन इसके बाद भारतीय टीम के दो प्रयास नाकाम रहे। कप्तान हरमनप्रीत सिंह जब शूटआउट के लिए आए तो वे गोल नहीं कर सके। उनके बाद सुखजीत सिंह भी अपने प्रयास को गोल में बदलने में सफल नहीं रहे। लगातार दो चूक ने भारत की स्थिति कमजोर कर दी।

बेल्जियम की ओर से टॉम बून, आर्थर डी स्लोवर, अलेक्जेंडर हेंड्रिक्स और रोमन डुवेकोट ने अपने प्रयासों को गोल में बदल दिया। विक्टर फोरबर्ट का शॉट हालांकि गोल नहीं बन सका, लेकिन बेल्जियम की बाकी सफल कोशिशें उसे जीत दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुईं।

अंततः बेल्जियम ने शूटआउट 4-3 से जीतकर सातवें स्थान पर कब्जा कर लिया, जबकि भारतीय टीम को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

चोट के कारण मनप्रीत सिंह भी मैदान से बाहर हुए

मुकाबले के दौरान भारतीय टीम को एक और झटका तब लगा, जब मनप्रीत सिंह की आंख के ऊपर गेंद जा लगी। अंतिम क्वार्टर में बेल्जियम के लाबुशेयर ने तेज शॉट लगाया, जो मनप्रीत के चेहरे पर आंख के ऊपर जाकर लगा।

गेंद लगने के बाद मनप्रीत को मैदान से बाहर जाना पड़ा। चोट की वजह से उस समय भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ गई थीं। हालांकि शूटआउट के दौरान मनप्रीत दोबारा मैदान पर नजर आए, लेकिन उन्होंने पेनल्टी शूटआउट में कोई शॉट नहीं लिया।

भारत के लिए यह मुकाबला सिर्फ आठवें स्थान की लड़ाई नहीं था, बल्कि पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश का अंतिम मौका भी था। टीम ने कई मौकों पर अच्छी हॉकी दिखाई, लेकिन निर्णायक चरण में मिली हार ने उसके अभियान को पदक से काफी दूर कर दिया।

पहले राउंड में शानदार प्रदर्शन, लेकिन दूसरे चरण में लगातार हार

भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप की शुरुआत उम्मीदों के साथ की थी। पहले राउंड में टीम ने अपने प्रदर्शन से प्रशंसकों को काफी उत्साहित किया। भारत ने वेल्स को 3-1 से हराया और इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ भी शानदार खेल दिखाते हुए 5-3 से जीत दर्ज की।

हालांकि ग्रुप चरण में इंग्लैंड के खिलाफ भारत को 2-4 से हार मिली। इसके बावजूद टीम ने अगले चरण में जगह बनाई और पदक की उम्मीदें बनी रहीं।

दूसरे राउंड में भारतीय टीम के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली। यहां टीम को लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और वह एक भी अंक हासिल नहीं कर सकी। नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले में भारत ने शुरुआत में अच्छी स्थिति बनाई थी, लेकिन मैच के अंतिम 19 मिनट उसके लिए बेहद खराब साबित हुए।

भारतीय टीम ने इस मुकाबले में लगातार तीन गोल गंवा दिए और अंततः नीदरलैंड्स के हाथों 1-3 से हार गई। इस नतीजे ने भारत की स्थिति कमजोर कर दी।

इसके बाद अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबला भारतीय टीम के लिए करो या मरो जैसा हो गया था। भारत ने गोल करने की कोशिश की, लेकिन अर्जेंटीना ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5-3 से मैच अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं।

पदक का सपना फिर अधूरा

भारतीय टीम वर्ल्ड कप में 51 साल बाद पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी थी। शुरुआत में टीम का प्रदर्शन देखकर उम्मीद भी जगी थी कि भारत इस बार इतिहास बदल सकता है। लेकिन दूसरे राउंड में लगातार मिली हार और इसके बाद प्लेसमेंट मैच में बेल्जियम से शूटआउट में मिली हार ने अभियान का अंत निराशा के साथ किया।

भारत के लिए टूर्नामेंट में सबसे सकारात्मक पहलू हरमनप्रीत सिंह का प्रदर्शन रहा। कप्तान ने कुल आठ गोल किए और टीम के सबसे बड़े गोल स्कोरर बने। बेल्जियम के खिलाफ भी उन्होंने दो बार गोल करके टीम को मुकाबले में बनाए रखा।

इसके बावजूद हॉकी वर्ल्ड कप का सफर भारत के लिए आठवें स्थान पर समाप्त हुआ। टीम ने कई मुकाबलों में आक्रामक हॉकी दिखाई, लेकिन महत्वपूर्ण मौकों पर मिली चूक ने उसे पदक की दौड़ से बाहर कर दिया। बेल्जियम के खिलाफ आखिरी सेकंड में बराबरी हासिल करने के बावजूद शूटआउट में हार भारतीय अभियान की अंतिम तस्वीर बन गई।