किसी छोटे से गांव में बैठकर तंबूरा बजाते हुए भजन गाने वाला एक युवा सिंगर अगर अचानक मुंबई के रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक पहुंच जाए तो यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। मध्य प्रदेश के 25 वर्षीय सुनील लोधी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने संगीत को अपनी पहचान बनाया और वर्षों तक गांव-समाज के बीच भजन और बुंदेली लोकगीत गाते रहे। उन्हें शायद खुद भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन उनकी वही सहज और मिट्टी से जुड़ी आवाज बड़े पर्दे की फिल्म का हिस्सा बन जाएगी।
सुनील लोधी आज फिल्म ‘हनुमान अंश’ के गाने ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ को लेकर चर्चा में हैं। नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। फिल्म की सफलता के साथ इसके संगीत और खासकर सुनील की आवाज को भी लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। गांव में पारंपरिक तरीके से गाए जाने वाले भजनों से शुरू हुआ उनका सफर अब फिल्मी संगीत तक पहुंच चुका है।
सोशल मीडिया ने पहली बार सुनील की आवाज को दी बड़ी पहचान
सुनील की संगीत यात्रा किसी बड़े म्यूजिक स्कूल या पेशेवर स्टूडियो से शुरू नहीं हुई थी। वह अपने आसपास के लोगों के बीच तंबूरा बजाकर भजन और बुंदेली लोकगीत गाते थे। यही उनका अभ्यास भी था और यही उनकी दुनिया भी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में उनकी आवाज धीरे-धीरे सोशल मीडिया तक पहुंची और यहीं से उनके लिए नए रास्ते खुलने लगे।
सुनील को शुरुआती पहचान ‘बुंदेली दुनिया’ नाम के सोशल मीडिया पेज से मिली। उन्होंने बताया कि वह इस पेज के लिए बुंदेली गीत गाया करते थे। उनके गाए गीतों को जब लोगों ने पसंद करना शुरू किया तो उनकी आवाज गांव और स्थानीय क्षेत्र से निकलकर इंटरनेट के जरिए बड़ी संख्या में श्रोताओं तक पहुंचने लगी।
उनका गीत ‘दुला बन के आ गई’ भी सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया और इसे लाखों बार देखा गया। लेकिन असली बदलाव तब आया जब उन्होंने हनुमान जी का पारंपरिक भजन ‘मोरे संकट के कटैया’ अपनी शैली में गाया।
‘मोरे संकट के कटैया’ बना करियर का टर्निंग पॉइंट
सुनील के करियर में ‘मोरे संकट के कटैया’ को सबसे अहम पड़ाव माना जा सकता है। इस भजन को उन्होंने किसी बड़े म्यूजिक प्रोडक्शन या भारी-भरकम अरेंजमेंट के साथ नहीं, बल्कि बेहद साधारण तरीके से प्रस्तुत किया था। गीत में उनकी आवाज के साथ तंबूरा की लय सुनाई देती है।
यही सादगी श्रोताओं को पसंद आई। देखते ही देखते भजन इंटरनेट पर तेजी से फैल गया और इसे 29 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। सुनील की आवाज की खासियत यह रही कि उसमें किसी तरह की बनावटी चमक नहीं थी। उनकी गायकी में लोक संगीत की सहजता, भक्ति का भाव और गांव की मिट्टी से जुड़ी हुई आवाज साफ महसूस होती है।
इसी भजन ने फिल्म के संगीत निर्माता पंकज वीआरके का ध्यान खींचा। पंकज के लिए सुनील की आवाज कुछ अलग थी और वह उनसे संपर्क करना चाहते थे। हालांकि, इंटरनेट पर वीडियो मिल जाने के बाद भी सुनील तक पहुंचना आसान नहीं था।
सुनील को खोजने में करनी पड़ी काफी मेहनत
पंकज के मुताबिक उन्होंने सुनील की आवाज पहली बार ‘मोरे संकट के कटैया’ में सुनी और उन्हें लगा कि इस गायक की आवाज में एक अलग तरह की सच्चाई है। वह सुनील से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें ढूंढना इतना आसान नहीं था।
काफी खोजबीन के बाद आखिरकार सुनील से संपर्क हो सका। इसके बाद उनकी जिंदगी में एक नया अध्याय शुरू हुआ। सुनील पहली बार इंदौर पहुंचे और वहां से उनके लिए मुंबई का रास्ता खुला।
एक ऐसे गायक के लिए, जिसने अब तक मुख्य रूप से अपने गांव और आसपास के लोगों के बीच ही गाया था, मुंबई के स्टूडियो तक पहुंचना बेहद बड़ा मौका था। यह यात्रा उनके लिए केवल शहर बदलने की नहीं बल्कि एक सपने के बिल्कुल नए रास्ते पर कदम रखने जैसी थी।
मुंबई के स्टूडियो में रिकॉर्ड किए करीब आठ गाने
सुनील को मुंबई के साई बाबा स्टूडियो में रिकॉर्डिंग का मौका मिला। यहां उन्होंने करीब आठ गानों के लिए अपनी आवाज रिकॉर्ड की। इनमें से ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ अब ‘हनुमान अंश’ के जरिए दर्शकों और श्रोताओं तक पहुंच चुका है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब सुनील ने इस गीत की रिकॉर्डिंग की थी, तब उन्हें यह जानकारी तक नहीं थी कि उनकी आवाज किसी फिल्म का हिस्सा बनने वाली है। उनके लिए यह किसी दूसरे पारंपरिक भजन की तरह ही था, जिसे उन्होंने अपनी परिचित शैली में गाया।
सुनील ने बताया कि उन्होंने गीत को तंबूरा के साथ गाया, स्टूडियो में अपनी आवाज रिकॉर्ड कराई और फिर वापस लौट आए। उन्हें उस समय यह मालूम नहीं था कि उनकी आवाज बड़े पर्दे पर सुनाई देगी।
‘मैंने तेरे ही भरोसे’ में सुनाई देती है लोक संगीत की सादगी
फिल्म का गीत ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ सुनील की आवाज के कारण खास बन गया है। इसमें उनकी गायकी का वह अंदाज सुनाई देता है, जो वर्षों से उनके पारंपरिक संगीत अभ्यास का हिस्सा रहा है।
सुनील का कहना है कि वह पारंपरिक भजन गाते रहते हैं और ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ भी इसी परंपरा से जुड़ा गीत है। उनके लिए यह किसी नए प्रयोग से ज्यादा उनकी रोजमर्रा की संगीत यात्रा का हिस्सा था।
शायद यही वजह है कि गीत में आवाज बहुत स्वाभाविक महसूस होती है। सुनील ने अपनी गायकी को किसी विशेष फिल्मी अंदाज में ढालने की कोशिश नहीं की। उनकी आवाज में वही लोक रंग बरकरार रहा, जिसके कारण वह सोशल मीडिया पर पहले से लोगों के बीच पहचाने जाने लगे थे।
बचपन से ही संगीत की ओर था सुनील का झुकाव
सुनील का संगीत से रिश्ता नया नहीं है। बचपन से ही उन्हें संगीत और भजनों में रुचि रही। समय के साथ उन्होंने तंबूरा बजाना सीखा और भक्ति गीतों के साथ बुंदेली लोकगीतों को भी अपनी गायकी का हिस्सा बनाया।
कई वर्षों तक उन्होंने अपने समुदाय और स्थानीय लोगों के सामने अपनी कला पेश की। उस समय उनका मंच बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उनका अभ्यास लगातार जारी रहा। यही लगातार किया गया अभ्यास बाद में उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उनकी इसी स्थानीय प्रतिभा को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया। इंटरनेट पर उनके वीडियो लोगों तक पहुंचे और फिर एक वायरल भजन ने उन्हें फिल्मी दुनिया के दरवाजे तक पहुंचा दिया।
दिव्यांगता बनी नहीं उनके सपनों की रुकावट
सुनील दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उनकी गायकी में आत्मविश्वास की कमी दिखाई नहीं देती। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को अपनी कला के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उनके लिए संगीत अभिव्यक्ति का माध्यम रहा और इसी के सहारे उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
गांव में तंबूरा लेकर भजन गाने से लेकर मुंबई के स्टूडियो में रिकॉर्डिंग करने तक का सफर यह बताता है कि प्रतिभा को सही मंच मिलने पर वह सीमाओं को पार कर सकती है। सुनील की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्हें किसी बड़े प्लेटफॉर्म ने शुरुआत में लॉन्च नहीं किया। उनकी आवाज पहले स्थानीय लोगों तक पहुंची, फिर सोशल मीडिया पर लोगों ने उसे पसंद किया और आखिरकार फिल्म निर्माताओं तक बात पहुंची।
‘हनुमान अंश’ ने सुनील को दिया बड़ा मंच
सुनील लोधी की आवाज अब ‘हनुमान अंश’ के जरिए देशभर के दर्शकों तक पहुंच रही है। फिल्म में उनकी आवाज का इस्तेमाल भक्ति संगीत के उस भाव को मजबूत करता है, जो कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित बताई गई है। बाबा की भगवान हनुमान के प्रति गहरी आस्था फिल्म की कहानी के केंद्र में है। इसी वजह से फिल्म के संगीत में भी भक्ति और आध्यात्मिक भाव को खास जगह दी गई है।
फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। शुरुआती दिनों में इसकी कमाई काफी सीमित रही, लेकिन बाद में दर्शकों के बीच फिल्म की पकड़ मजबूत होती गई।
कम बजट से शुरू हुई फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मचाई हलचल
रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। फिल्म ने पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी, जबकि दूसरे दिन इसका कलेक्शन लगभग 20 लाख रुपये रहा।
इसके बाद फिल्म की कमाई में लगातार सुधार देखने को मिला। 24वें दिन फिल्म ने करीब 12.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। वहीं 25वें दिन, यानी सोमवार को भी फिल्म ने लगभग 5.50 करोड़ रुपये की कमाई की। भारत में फिल्म का कुल कलेक्शन करीब 45.63 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है।
फिल्म की सफलता ने इंडस्ट्री को भी हैरान किया है, क्योंकि इसकी शुरुआत बेहद मामूली आंकड़ों के साथ हुई थी। दर्शकों की लगातार दिलचस्पी ने इसे लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिके रहने का मौका दिया।
गांव की आवाज अब पहुंच रही है बड़े पर्दे तक
सुनील लोधी की कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू यही है कि उनकी पहचान किसी बनावटी फिल्मी आवाज से नहीं बनी। उन्होंने जिस शैली में वर्षों तक अपने गांव और समुदाय के बीच भजन गाए, उसी आवाज ने उन्हें सोशल मीडिया पर पहचान दिलाई और फिर फिल्मी दुनिया तक पहुंचाया।
‘मोरे संकट के कटैया’ से मिली लोकप्रियता ने पंकज वीआरके का ध्यान उनकी ओर खींचा और उसके बाद मुंबई में रिकॉर्डिंग का अवसर मिला। आज ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ के जरिए सुनील की आवाज ‘हनुमान अंश’ का हिस्सा है।
एक साधारण तंबूरा, पारंपरिक भजनों की साधना और अपनी आवाज पर भरोसा रखने वाले सुनील लोधी के लिए यह सफर अभी शुरुआत भर है। गांव की गलियों से निकलकर बड़े पर्दे तक पहुंची उनकी आवाज ने साबित कर दिया है कि असली प्रतिभा को अगर एक मौका मिल जाए तो वह अपनी पहचान खुद बना सकती है।




