जेलेंस्की ने भारत की शांति पहल का किया स्वागत: जयशंकर से मुलाकात में बोले- युद्ध खत्म कराने की कोशिश के लिए शुक्रगुजार

जेलेंस्की ने भारत की शांति पहल का किया स्वागत: जयशंकर से मुलाकात में बोले- युद्ध खत्म कराने की कोशिश के लिए शुक्रगुजार

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों और शांति की पहल की सराहना की है। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कीव में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ करीब साढ़े चार साल से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के संभावित रास्तों पर भी चर्चा हुई।

जेलेंस्की ने बैठक के बाद भारत के रुख की तारीफ करते हुए कहा कि उनका देश युद्ध समाप्त करने के लिए भारत की इच्छा की सराहना करता है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में युद्ध का समय नहीं, बल्कि शांति स्थापित करने का वक्त है। यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, संघर्ष को खत्म करने की जरूरत को लेकर भारत का रुख स्पष्ट है।

जयशंकर की यूक्रेन यात्रा ऐसे समय हुई, जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के समाधान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। भारत लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। ऐसे में जयशंकर और जेलेंस्की की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।

जेलेंस्की ने भारत के प्रति जताया आभार

बैठक के बाद राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत के विदेश मंत्री के साथ हुई मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने विशेष तौर पर युद्ध को समाप्त करने की भारत की इच्छा का उल्लेख किया।

जेलेंस्की ने रूस के साथ चल रहे संघर्ष को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध बताते हुए कहा कि भारत की ओर से इसे समाप्त करने की कोशिशों के लिए वह आभारी हैं। उन्होंने शांति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध जारी रखने के बजाय अब शांति की दिशा में आगे बढ़ने का समय है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के रूस के साथ लंबे समय से रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने लगातार यह रुख रखा है कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत ने युद्ध के दौरान दोनों पक्षों से संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के रास्ते खुले रखने की अपील की है।

कीव में जयशंकर ने जेलेंस्की से की मुलाकात

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी जेलेंस्की के साथ मुलाकात के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय संघर्ष के समाधान जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

जयशंकर ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ हुई बातचीत का भी उल्लेख किया और बताया कि द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच चर्चा हुई थी।

विदेश मंत्री के मुताबिक, जेलेंस्की के साथ हुई बातचीत का मुख्य केंद्र मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने के संभावित उपायों पर रहा। इसका मतलब यह है कि दोनों पक्षों ने केवल भारत-यूक्रेन संबंधों तक चर्चा को सीमित नहीं रखा, बल्कि युद्ध की व्यापक स्थिति और उसके समाधान पर भी विचार किया।

रूस के ड्रोन हमले का जेलेंस्की ने किया जिक्र

जेलेंस्की ने जयशंकर के साथ बैठक के दौरान रूस की ओर से किए जा रहे ड्रोन हमलों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिस समय भारतीय प्रतिनिधिमंडल कीव में मौजूद था, उसी दौरान रूस ने एक बार फिर जेट से चलने वाले ‘शाहेद’ ड्रोन लॉन्च किए।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इन ड्रोन को बनाने में ईरान की मदद शामिल रही है। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने इन हमलों के दौरान प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और ऐसे अधिकांश ड्रोन को यूक्रेन के लड़ाकू विमान ही रोकते हैं।

जेलेंस्की ने इस घटना के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान युद्ध की मौजूदा स्थिति की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे मजबूत देशों को भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और यह समझना चाहिए कि संघर्ष को खत्म करने के साथ-साथ टिकाऊ और विश्वसनीय शांति की आवश्यकता है।

जयशंकर ने एंड्री सिबिहा से लगातार संपर्क का किया उल्लेख

जेलेंस्की से बातचीत के दौरान जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ अपने नियमित संपर्क का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच लगातार बातचीत होती रही है और यह संपर्क केवल मौजूदा यात्रा तक सीमित नहीं है।

जयशंकर ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से भारत और यूक्रेन के शीर्ष कूटनीतिक अधिकारियों के बीच कई स्तरों पर संपर्क बना हुआ है। उन्होंने हाल की मुलाकातों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधि मई में साइप्रस, मार्च में फ्रांस और फरवरी में म्यूनिख में मिले थे। इसके अलावा पिछले साल कनाडा और नई दिल्ली में भी उनकी मुलाकात हुई थी।

इससे यह संकेत मिलता है कि भारत और यूक्रेन के बीच युद्ध के बावजूद राजनयिक संवाद का सिलसिला जारी रहा है। भारत एक ओर जहां रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखता आया है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के साथ भी बातचीत और संपर्क को जारी रखे हुए है।

मोदी और जेलेंस्की की मुलाकातों का भी हुआ जिक्र

जयशंकर ने बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच होने वाली मुलाकातों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार आमने-सामने बातचीत कर चुके हैं।

विदेश मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और जेलेंस्की की सबसे हालिया मुलाकात इस साल जून में फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। जयशंकर ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और जेलेंस्की के बीच हुई इनमें से अधिकांश बैठकों में शामिल होने का अवसर मिला है।

दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकातों में भी रूस-यूक्रेन युद्ध और शांति स्थापित करने के रास्तों पर चर्चा होती रही है। भारत की ओर से लगातार यह संदेश दिया गया है कि युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता हो सकता है।

भारत-यूक्रेन रिश्तों को भी आगे बढ़ाने पर जोर

जयशंकर और जेलेंस्की की बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दोनों देशों के आपसी संबंधों से जुड़ा रहा। भारत और यूक्रेन के बीच राजनीतिक, आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत से जेलेंस्की को अवगत कराया। दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में संवाद जारी रखने पर जोर दिया गया।

भारत के लिए यूक्रेन के साथ संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। युद्ध के कारण दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद राजनयिक स्तर पर संपर्क बना रहा है। जयशंकर की कीव यात्रा इसी निरंतर संवाद का हिस्सा मानी जा रही है।

युद्ध खत्म कराने में भारत की भूमिका पर नजर

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत ने शुरुआत से ही किसी एक पक्ष के समर्थन में सीधे उतरने के बजाय संवाद और कूटनीति पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर कह चुके हैं कि युद्ध के जरिए किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता।

भारत ने दोनों देशों के नेताओं से बातचीत की है और शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की रूस और यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई मुलाकातों को भी इसी कूटनीतिक प्रयास के संदर्भ में देखा जाता है।

अब जेलेंस्की की ओर से भारत की शांति कोशिशों के प्रति आभार जताना इस बात का संकेत है कि यूक्रेन भी भारत की संभावित कूटनीतिक भूमिका को महत्व दे रहा है। हालांकि युद्ध समाप्त करने के लिए अंतिम समाधान रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत से ही निकलना है, लेकिन भारत जैसे देशों की मध्यस्थता या संवाद को प्रोत्साहित करने वाली भूमिका भविष्य में महत्वपूर्ण हो सकती है।

शांति को लेकर भारत का संदेश

जयशंकर की यूक्रेन यात्रा और जेलेंस्की के साथ उनकी मुलाकात ऐसे समय हुई है जब युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं। भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि संघर्ष का अंत बातचीत के जरिए होना चाहिए और शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों के बीच संवाद जरूरी है।

जेलेंस्की की ओर से भारत के प्रयासों के लिए आभार जताना भारत की इसी कूटनीतिक नीति के प्रति सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। वहीं, कीव में बैठक के दौरान रूस के ड्रोन हमलों का जिक्र यह भी बताता है कि जमीनी स्तर पर संघर्ष अब भी गंभीर बना हुआ है।

जयशंकर की यात्रा से यह स्पष्ट हुआ कि भारत यूक्रेन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ युद्ध के समाधान के लिए संवाद का रास्ता भी खुला रखना चाहता है। भारत-यूक्रेन संबंधों और रूस-यूक्रेन संघर्ष, दोनों मुद्दों पर हुई बातचीत आने वाले समय में नई कूटनीतिक पहल की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।