ग्लोबल मंच पर BRICS का नया रूप: भारत की अगुवाई और महाशक्तियों के आर्थिक समीकरण

ग्लोबल मंच पर BRICS का नया रूप: भारत की अगुवाई और महाशक्तियों के आर्थिक समीकरण

दुनिया के सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय संगठनों में शुमार BRICS (ब्रिक्स) अपनी रणनीति, विस्तार और वैश्विक प्रभाव को लेकर एक नए मोड़ पर खड़ा है। वैश्विक आर्थिक मंदी के आहटों के बीच यह समूह दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम कर रहा है। मौजूदा वर्ष 2026 में भारत इस प्रतिष्ठित मंच की कमान संभाल रहा है, जिससे दक्षिण एशिया सहित पूरे वैश्विक परिदृश्य में देश की कूटनीतिक धाक और मजबूत हुई है।

अध्यक्षता का दायित्व संभालते ही भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को बुलंद करने और सदस्य राष्ट्रों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारियों को विकसित करने का संकल्प लिया है। आगामी 12 और 13 सितंबर 2026 को राजधानी नई दिल्ली के अत्याधुनिक ‘भारत मंडपम’ परिसर में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन निर्धारित किया गया है। भारत के पास 1 जनवरी 2026 से ही इस समूह की अध्यक्षता है। यह चौथी बार है जब भारत इस मंच का नेतृत्व कर रहा है, इससे पूर्व वर्ष 2012, 2016 और 2021 में भी भारत सफलता पूर्वक यह दायित्व निभा चुका है। इस वर्ष सम्मेलन की केंद्रीय विषयवस्तु (Theme) ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखी गई है, जो आत्मनिर्भरता, नवाचार और टिकाऊ विकास पर जोर देती है।

आर्थिक धुरी का बदलता गणित: BRICS का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र

जब ब्रिक्स समूह की आंतरिक ताकतों और क्षमताओं का विश्लेषण किया जाता है, तो आर्थिक, सैन्य और तकनीकी मापदंडों पर चीन निर्विवाद रूप से सबसे अग्रणी और शक्तिशाली सदस्य के रूप में सामने आता है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आकार के संदर्भ में चीन न केवल ब्रिक्स में शीर्ष पर है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

  • वैश्विक जीडीपी तुलना: वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका लगभग 31.8 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर के अनुमानित जीडीपी के साथ पहले पायदान पर है, जबकि चीन लगभग 20.65 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है।
  • क्रय शक्ति क्षमता (PPP): यदि अर्थव्यवस्था का आकलन क्रय शक्ति पारिटी (Purchasing Power Parity) के आधार पर किया जाए, तो चीन अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन जाता है।
  • सैन्य और तकनीकी क्षमता: आर्थिक आंकड़ों के अलावा, विशाल रक्षा बजट, आधुनिक सैन्य शक्ति, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तकनीकी बढ़त चीन को ब्रिक्स के भीतर सबसे असरदार और प्रभावशाली देश बनाती है।

ग्लोबल इकोनॉमी में भारत का स्थान: दूसरे नंबर की ताकत और सबसे तेज रफ्तार

ब्रिक्स के आर्थिक ढांचे में भारत दूसरा सबसे ताकतवर और बड़ा देश बनकर उभरा है। भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार और इसकी विकास दर वैश्विक निवेशकों और विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।

  • अर्थव्यवस्था का आकार (GDP): वर्ष 2026 में भारत की कुल जीडीपी का अनुमान लगभग 4.5 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर के आसपास लगाया गया है। इस विशाल आर्थिक आकार के कारण भारत ब्रिक्स में चीन के ठीक बाद दूसरे स्थान पर आता है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहा है। (हालांकि वैश्विक उतार-चढ़ाव और विनिमय दरों के कारण ब्रिटेन जैसे देशों के साथ रैंकिंग में मामूली फेरबदल की संभावना बनी रहती है)।
  • दुनिया की सबसे तेज ग्रोथ रेट: भले ही वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था का कुल आकार चीन से छोटा हो, लेकिन विकास की गति (Growth Rate) के मामले में भारत दुनिया के सभी बड़े देशों को पीछे छोड़ रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का आकलन: आईएमएफ के नवीनतम आंकड़ों और अनुमानों के अनुसार, भारत ने 2025 में 7.6% की शानदार आर्थिक वृद्धि दर्ज की थी, वहीं 2026 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.5% की तेज दर से बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है। यह दर ब्रिक्स के अन्य सभी सदस्य देशों की तुलना में काफी अधिक है, जो यह साबित करती है कि भारत इस समूह का सबसे गतिमान आर्थिक इंजन है।

5 देशों से बढ़कर 20+ देशों का कुनबा: BRICS का ऐतिहासिक विस्तार

ब्रिक्स की यात्रा की शुरुआत एक साधारण आर्थिक ब्लॉक के रूप में हुई थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। शुरुआती दौर में इसमें केवल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, जिससे इसका नाम ‘BRICS’ पड़ा। परंतु अब यह संगठन एक विशाल अंतरराष्ट्रीय महासंघ का रूप ले चुका है।

पूर्णकालिक सदस्य देश (11 राष्ट्र): वर्तमान में इस समूह में कुल 11 पूर्णकालिक सदस्य देश शामिल हैं:

  1. भारत
  2. चीन
  3. रूस
  4. ब्राजील
  5. दक्षिण अफ्रीका
  6. मिस्र (Egypt)
  7. इथियोपिया
  8. ईरान
  9. सऊदी अरब
  10. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
  11. इंडोनेशिया

भागीदार/पार्टनर देश (Partner Countries): पूर्णकालिक सदस्यों के अलावा, समूह ने कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ‘पार्टनर कंट्री’ का दर्जा देकर अपने साथ जोड़ा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, कज़ाखस्तान, उज़्बेकिस्तान, बेलारूस, नाइजीरिया, युगांडा, क्यूबा और बोलीविया।

इस प्रकार, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अब 20 से भी अधिक देश इस मंच से जुड़ चुके हैं। यह विस्तार दर्शाता है कि दुनिया के विकासशील देश पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के विकल्प के रूप में ब्रिक्स को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं।

वैश्विक व्यवस्था और BRICS: भविष्य की दिशा

विश्व राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स का यह विस्तार वैश्विक शक्ति संतुलन (Global Balance of Power) को नया रूप दे रहा है। एक तरफ जहां चीन अपनी आर्थिक और औद्योगिक क्षमता से समूह को संबल प्रदान कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी संतुलित विदेश नीति, तकनीकी नवाचार, और तीव्र आर्थिक विकास दर के दम पर समूह में एक न्यायसंगत और निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था का निर्माण कर रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित हो रहा 18वां शिखर सम्मेलन केवल द्विपक्षीय वार्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार (De-dollarization), खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस नीतियां बनाने का माध्यम बनेगा। भारत की अध्यक्षता में यह सम्मेलन विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को विश्व मंच पर मजबूती से स्थापित करने का एक ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होने जा रहा है।

एक नज़र में मुख्य बिंदु

  • अध्यक्षता: भारत (1 जनवरी 2026 से, चौथी बार)
  • 18वां सम्मेलन: 12-13 सितंबर 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली
  • विषयवस्तु (Theme): Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.
  • सबसे शक्तिशाली देश: चीन (जीडीपी ~$20.65 ट्रिलियन, पीपीपी में नंबर 1)
  • भारत की स्थिति: ब्रिक्स में दूसरा सबसे बड़ा देश (जीडीपी ~$4.5 ट्रिलियन), दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था (6.5% – 7.6% ग्रोथ रेट)
  • सदस्य संख्या: 11 पूर्णकालिक सदस्य और 10+ पार्टनर देश (कुल 20+ देश संबद्ध)