दिग्गज टेक कंपनी ओरेकल में एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की खबर सामने आई है। अमेरिका में 14 सितंबर को हुई कार्रवाई के बाद कंपनी के हजारों कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं। इस घटनाक्रम ने ओरेकल के भारत स्थित डेवलपमेंट सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ा दी है। फिलहाल कंपनी ने भारत में संभावित छंटनी को लेकर कर्मचारियों की संख्या या प्रभावित होने वाले विभागों के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
ओरेकल की मौजूदा रणनीति को देखें तो कंपनी पारंपरिक सॉफ्टवेयर कारोबार से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना निवेश बढ़ा रही है। इसके लिए कंपनी अपने खर्च और संसाधनों को नए क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित कर रही है। इसका सीधा असर उन टीमों पर पड़ रहा है, जिन्हें कंपनी की मौजूदा प्राथमिकताओं में पहले जैसा महत्व नहीं मिल रहा।
पहले से चल रही है वर्कफोर्स में कटौती
ओरेकल में इस साल कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कमी पहले ही दर्ज की जा चुकी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने अपने कुल वर्कफोर्स का करीब 13 फीसदी हिस्सा यानी लगभग 21 हजार कर्मचारियों को बाहर किया है। 31 मई 2026 तक ओरेकल में करीब 1.41 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे।
इसके बावजूद कंपनी की पुनर्गठन प्रक्रिया खत्म होती दिखाई नहीं दे रही है। सितंबर में अमेरिका में हुई नई कार्रवाई से संकेत मिल रहे हैं कि कंपनी अलग-अलग कारोबार और टीमों की समीक्षा करते हुए कर्मचारियों की संख्या को अपनी नई व्यावसायिक रणनीति के अनुरूप कर रही है।
यानी मौजूदा छंटनी को सिर्फ लागत कम करने की कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे कंपनी के कारोबार में हो रहे बड़े बदलाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
नौकरी जाने की जानकारी मिलने से पहले ही बंद हो जाते हैं सिस्टम
ओरेकल में छंटनी की प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों ने जिस तरीके का जिक्र किया है, वह भी चर्चा में है। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल मिलने से पहले ही कंपनी के डिजिटल सिस्टम से अलग कर दिया गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि जिन कर्मचारियों की नौकरी खत्म की जानी थी, उनका VPN एक्सेस पहले बंद किया गया। इसके बाद कंपनी के आंतरिक कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म स्लैक से उनका अकाउंट डिस्कनेक्ट हो गया। इस तरह कर्मचारी को आधिकारिक सूचना मिलने से पहले ही यह संकेत मिल जाता है कि उनके साथ कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है।
इसके बाद सुबह के समय कंपनी की तरफ से ईमेल भेजकर रोजगार खत्म किए जाने की जानकारी दी गई। कर्मचारियों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया बेहद अचानक हुई और उनके पास स्थिति को समझने या किसी अधिकारी से बातचीत करने का बहुत कम समय था।
कुछ कर्मचारियों ने बताया कैसी रही पूरी प्रक्रिया
छंटनी का अनुभव साझा करने वाले कर्मचारियों के अनुसार, प्रक्रिया सुबह के शुरुआती घंटों से शुरू हुई। कुछ मामलों में रात या तड़के कंपनी के सिस्टम पर लॉग-इन करने की सुविधा समाप्त हो गई। इसके बाद स्लैक समेत दूसरे आंतरिक सिस्टम तक पहुंच भी नहीं रही।
ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों के लिए स्थिति और स्पष्ट हो गई, क्योंकि उनके एक्सेस कार्ड ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे कर्मचारियों को ईमेल के जरिए बताया गया कि कंपनी में बदलाव के चलते उनका पद समाप्त किया जा रहा है और उसी दिन उनका आखिरी कार्यदिवस होगा।
इस तरह पूरी प्रक्रिया में कर्मचारी को पहले डिजिटल सिस्टम से बाहर किया गया और उसके बाद औपचारिक तौर पर नौकरी खत्म किए जाने की सूचना दी गई।
किन टीमों पर ज्यादा दबाव?
इस बार की छंटनी को कर्मचारियों की व्यक्तिगत परफॉर्मेंस से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। रिपोर्टों के अनुसार, ऐसे कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं जो लंबे समय से कंपनी के साथ काम कर रहे थे और जिनका प्रदर्शन अच्छा रहा था।
इसका मुख्य कारण कंपनी की प्राथमिकताओं में बदलाव माना जा रहा है। ओरेकल अब उन क्षेत्रों में अधिक संसाधन लगा रही है, जहां उसे भविष्य में AI और क्लाउड कारोबार के विस्तार की संभावना दिखाई दे रही है।
छंटनी का असर कई तरह की भूमिकाओं पर देखने को मिल रहा है। इनमें टेक्निकल टीम, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
टेक्निकल टीमों में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और संचालन से जुड़े कर्मचारी भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, सॉफ्टवेयर से जुड़ी कुछ टीमों में भी कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है।
फ्यूजन, नेटसूट और HR सॉफ्टवेयर से जुड़े डेवलपमेंट कार्यों में लगे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं सेल्स और ग्राहक सहायता से जुड़े पदों पर भी पुनर्गठन का असर पड़ रहा है।
भारत के कर्मचारियों में क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका में हुई ताजा कार्रवाई का असर भारत में मनोवैज्ञानिक तौर पर दिखाई देने लगा है। ओरेकल का भारत में बड़ा डेवलपमेंट और टेक्निकल ऑपरेशन है। ऐसे में अमेरिकी टीमों में बदलाव के बाद भारतीय कर्मचारियों के बीच भी यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अगला असर भारत में काम करने वाले लोगों पर पड़ सकता है।
हालांकि अभी तक ओरेकल ने भारत में सितंबर की इस छंटनी के तहत कितने कर्मचारियों को हटाया जाएगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इसलिए भारत में संभावित नौकरियों के नुकसान को लेकर फिलहाल किसी निश्चित संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती।
अगर कंपनी वैश्विक स्तर पर अपनी टीमों को नए कारोबारी मॉडल के मुताबिक व्यवस्थित करती है, तो भारत में भी कुछ भूमिकाओं का पुनर्गठन हो सकता है। खासकर वे काम जिनका संबंध पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सपोर्ट या ऐसे ऑपरेशनल कार्यों से है, जिनमें कंपनी भविष्य में ऑटोमेशन और AI का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है।
भारत में पहले भी सामने आ चुकी है बड़ी छंटनी
ओरेकल इंडिया में इस साल पहले भी छंटनी की खबरें सामने आई थीं। मार्च और अप्रैल के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों के प्रभावित होने की रिपोर्ट आई थी। उस समय करीब 12 हजार कर्मचारियों की नौकरी जाने की बात कही गई थी, हालांकि कंपनी की तरफ से इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
अब अमेरिका में नई छंटनी की खबर सामने आने के बाद भारत में काम करने वाले कर्मचारियों की चिंता फिर बढ़ गई है। खासकर उन लोगों के बीच अनिश्चितता ज्यादा है जिनकी भूमिकाएं कंपनी की पुरानी कारोबारी प्राथमिकताओं से जुड़ी हुई हैं।
एक तरफ नौकरी जा रही, दूसरी ओर नई भर्तियां भी
ओरेकल की मौजूदा स्थिति को सिर्फ छंटनी के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। कंपनी कुछ पुराने या कम प्राथमिकता वाले कामों में कर्मचारियों की संख्या घटाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में निवेश और भर्ती भी कर रही है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर की मांग भी तेजी से बढ़ी है। ओरेकल इसी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही है।
कंपनी के लिए डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना, नेटवर्क को मजबूत करना, क्लाउड सेवाओं का विस्तार करना और AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करना महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले कर्मचारियों की जरूरत बनी हुई है।
इसका मतलब यह है कि कंपनी में नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि रोजगार की जरूरत का स्वरूप बदल रहा है। जिन कौशलों की मांग कुछ साल पहले ज्यादा थी, उनकी जगह अब AI, क्लाउड, डेटा सेंटर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कौशल अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
कंपनी की रणनीति में हो रहा बड़ा बदलाव
टेक इंडस्ट्री में AI के तेजी से विस्तार ने बड़ी कंपनियों को अपने खर्च और कर्मचारियों की भूमिका पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। ओरेकल भी इसी बदलाव का हिस्सा है।
कंपनी एक तरफ AI और क्लाउड कारोबार में निवेश बढ़ा रही है, जबकि दूसरी तरफ ऐसे विभागों के बजट और टीमों को कम कर रही है जिनका भविष्य के बिजनेस मॉडल में योगदान अपेक्षाकृत कम माना जा रहा है।
इस बदलाव का असर अनुभवी कर्मचारियों तक पहुंचना इसलिए भी संभव है क्योंकि छंटनी अब केवल खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गई है। कंपनियां कई बार पूरे विभाग या भूमिकाओं को ही कम प्राथमिकता वाले क्षेत्र में रखकर टीमों का आकार घटा देती हैं।
आगे भारत में क्या हो सकता है?
फिलहाल भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका में शुरू हुआ पुनर्गठन किस हद तक भारतीय ऑपरेशंस को प्रभावित करेगा। जब तक ओरेकल की तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक भारत में कितने कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
हालांकि कंपनी की दिशा स्पष्ट दिखाई दे रही है। AI, क्लाउड और डेटा सेंटर से जुड़े कामों पर निवेश बढ़ रहा है, जबकि पारंपरिक भूमिकाओं और पुराने कामकाज के तरीकों की समीक्षा हो रही है।
ऐसे में भारतीय कर्मचारियों के लिए आने वाला समय भूमिका और कौशल के लिहाज से बदलाव वाला हो सकता है। जिन कर्मचारियों का काम कंपनी की नई प्राथमिकताओं से मेल खाता है, उनके लिए नए अवसर बन सकते हैं। वहीं जिन भूमिकाओं को ऑटोमेशन या पुनर्गठन से बदला जा सकता है, उन पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
अमेरिका में 14 सितंबर की छंटनी ने फिलहाल यह साफ कर दिया है कि ओरेकल का पुनर्गठन अभी जारी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी आने वाले दिनों में भारत और दूसरे देशों में अपनी टीमों को लेकर क्या फैसला करती है।




