थायरॉइड से लेकर बच्चों के विकास तक, आयोडीन की कमी न होने दें; रोज खाएं ये चीजें

थायरॉइड से लेकर बच्चों के विकास तक, आयोडीन की कमी न होने दें; रोज खाएं ये चीजें

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह के विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में आयोडीन भी शामिल है। इसकी आवश्यकता शरीर को बहुत अधिक मात्रा में नहीं होती, लेकिन इसकी कमी होने पर स्वास्थ्य पर कई तरह के असर पड़ सकते हैं। आयोडीन खासतौर पर थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए जरूरी होता है। यही हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के इस्तेमाल, विकास और कई दूसरी शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।

आयोडीन की जरूरत केवल बड़ों के लिए ही नहीं होती, बल्कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी इसका पर्याप्त मात्रा में मिलना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बच्चों के मस्तिष्क के विकास और उनकी सीखने-समझने की क्षमता के लिए आयोडीन अहम भूमिका निभाता है। वहीं, गर्भावस्था के दौरान इसकी कमी मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को भी प्रभावित कर सकती है।

इसलिए अगर डाइट में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा नहीं पहुंच रही है, तो रोज के भोजन में इसके प्राकृतिक और आसानी से उपलब्ध स्रोतों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

आयोडीन की कमी होने पर शरीर में दिख सकते हैं ये संकेत

जब लंबे समय तक शरीर को पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता, तो थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। आयोडीन की कमी का एक जाना-पहचाना परिणाम घेंघा है। इसमें गर्दन के सामने मौजूद थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है और गर्दन पर सूजन या उभार दिखाई दे सकता है।

इसके अलावा थायरॉइड हार्मोन कम बनने की स्थिति में व्यक्ति को लगातार थकान महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में वजन बढ़ने, सुस्ती रहने और सामान्य से ज्यादा ठंड लगने जैसी परेशानियां भी दिखाई दे सकती हैं। शरीर की ऊर्जा से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित होने के कारण रोजमर्रा के कामों में भी कमजोरी या कम ऊर्जा महसूस हो सकती है।

बच्चों के मामले में आयोडीन की पर्याप्त उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण है। इसकी गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली कमी उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ दिमागी विकास को प्रभावित कर सकती है। एकाग्रता, सीखने और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं।

गर्भावस्था में क्यों बढ़ जाती है इसकी अहमियत?

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बदल जाती हैं। इस दौरान आयोडीन भी महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में शामिल हो जाता है। थायरॉइड हार्मोन भ्रूण के विकास में भूमिका निभाते हैं और बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए भी इनका महत्व होता है।

इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को अपने भोजन से पर्याप्त आयोडीन मिलने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हालांकि गर्भावस्था में किसी भी पोषक तत्व या सप्लीमेंट की मात्रा खुद से तय करना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेकर ही सप्लीमेंट या डाइट में बड़ा बदलाव करना चाहिए।

सबसे आसान तरीका है आयोडीन वाला नमक

आयोडीन की कमी से बचने के लिए सबसे सरल और आम तरीका आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है। घर में इस्तेमाल होने वाले सामान्य नमक की जगह आयोडीनयुक्त नमक चुनने से रोज के भोजन के जरिए आयोडीन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आयोडीन की जरूरत पूरी करने के लिए नमक की मात्रा बढ़ा दी जाए। नमक का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर जिन लोगों को ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या है, उन्हें नमक की मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। बेहतर तरीका यही है कि नमक सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जाए, लेकिन संभव हो तो आयोडीनयुक्त नमक चुना जाए।

समुद्री खाद्य पदार्थ भी हैं अच्छा विकल्प

जो लोग नॉन-वेज खाते हैं, उनके लिए समुद्री खाद्य पदार्थ आयोडीन प्राप्त करने का अच्छा माध्यम हो सकते हैं। समुद्री मछलियों और अन्य सी-फूड में आयोडीन पाया जाता है। समुद्री शैवाल में तो प्राकृतिक रूप से आयोडीन की मात्रा काफी अधिक हो सकती है।

हालांकि समुद्री शैवाल में आयोडीन की मात्रा खाद्य पदार्थ के प्रकार और उसकी मात्रा के अनुसार काफी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इसे बहुत ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना बेहतर है।

मछली और दूसरे समुद्री खाद्य पदार्थों को व्यक्ति अपनी पसंद, उपलब्धता और सामान्य खानपान के अनुसार भोजन में शामिल कर सकता है। इनसे आयोडीन के साथ-साथ प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं।

दूध, दही और चीज से भी मिल सकता है आयोडीन

अगर आप शाकाहारी भोजन लेते हैं, तो डेयरी उत्पाद डाइट में आयोडीन शामिल करने का एक उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। दूध, दही और चीज जैसे खाद्य पदार्थों में आयोडीन पाया जा सकता है।

रोज के खाने में दूध या दही को शामिल करना आसान है। इन्हें नाश्ते या भोजन के साथ लिया जा सकता है। हालांकि किसी भी एक खाद्य पदार्थ को आयोडीन का एकमात्र स्रोत मानना सही नहीं है। अलग-अलग खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने से संतुलित पोषण हासिल करने में मदद मिलती है।

अंडा खाने वालों के लिए भी है अच्छी खबर

अंडा भी आयोडीन देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है। इसके अलावा इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन भी मौजूद होता है। यही कारण है कि अंडा संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकता है।

इसे नाश्ते में उबालकर, हल्की सब्जियों के साथ या अन्य संतुलित भोजन के हिस्से के रूप में लिया जा सकता है। हालांकि अंडे से मिलने वाले आयोडीन की मात्रा उसके आकार और दूसरे कारकों पर निर्भर कर सकती है।

आलू में भी मिलती है कुछ मात्रा

आलू को आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसमें कुछ मात्रा में आयोडीन भी पाया जा सकता है। हालांकि आलू को आयोडीन की कमी पूरी करने का मुख्य स्रोत नहीं माना जाना चाहिए।

आलू को सब्जियों, दाल, दही या दूसरे पोषक खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित तरीके से खाया जा सकता है। केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से पोषक तत्व हासिल करना ज्यादा बेहतर तरीका है।

आयोडीन वाले नमक को रखने का तरीका भी महत्वपूर्ण

घर में आयोडीनयुक्त नमक खरीद लेना ही पर्याप्त नहीं है, उसे सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है। आयोडीन नमी, गर्मी और लंबे समय तक रोशनी के संपर्क में आने से कम हो सकता है। इसलिए नमक को खुला छोड़ने के बजाय किसी सूखे और ढक्कन वाले कंटेनर में रखना बेहतर माना जाता है।

नमक के डिब्बे को चूल्हे या ऐसी जगह रखने से बचना चाहिए जहां लगातार गर्मी और भाप पहुंचती हो। नमक को सूखी जगह पर बंद करके रखने से उसमें मौजूद आयोडीन को बेहतर तरीके से बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

खाना पकाते समय भी नमक को बहुत लंबे समय तक तेज गर्मी में रखने से बचना उपयोगी हो सकता है। इसलिए जरूरत के अनुसार नमक डालना और उसे अनावश्यक रूप से लंबे समय तक गर्म करने से बचना बेहतर है।

क्या पत्तागोभी और सोया बिल्कुल नहीं खाना चाहिए?

आयोडीन की कमी की चर्चा के दौरान अक्सर गोइट्रोजेनिक खाद्य पदार्थों का जिक्र होता है। पत्तागोभी, फूलगोभी और सोयाबीन जैसी चीजों को इस श्रेणी में रखा जाता है। ये खाद्य पदार्थ कुछ परिस्थितियों में थायरॉइड से जुड़ी आयोडीन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि स्वस्थ व्यक्ति को इन चीजों को पूरी तरह अपनी डाइट से हटा देना चाहिए। सब्जियां और सोया कई अन्य पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। सामान्य मात्रा में और संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इनका सेवन किया जा सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को पहले से आयोडीन की कमी या थायरॉइड से संबंधित समस्या है, तो डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

संतुलित डाइट से पूरी करें शरीर की जरूरत

आयोडीन शरीर के लिए कम मात्रा में जरूरी होने के बावजूद बेहद महत्वपूर्ण मिनरल है। इसका सीधा संबंध थायरॉइड हार्मोन के निर्माण से है और ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, विकास और कई सामान्य प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।

आयोडीन की कमी से बचने के लिए आयोडीनयुक्त नमक, दूध-दही जैसे डेयरी उत्पाद, अंडे, समुद्री मछली और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है। साथ ही नमक का सेवन सीमित रखना और उसे सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है।

अगर लगातार थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, गर्दन में सूजन या थायरॉइड से जुड़े दूसरे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो केवल डाइट के जरिए समस्या का इलाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। आयोडीन की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र, खानपान और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए संतुलित भोजन और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह ही सबसे बेहतर तरीका है।

(Photo : AI Generated)