हिमाचल में डॉक्टरों की कमी दूर करने की कवायद तेज, 228 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू

हिमाचल में डॉक्टरों की कमी दूर करने की कवायद तेज, 228 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू

70 बैकलॉग और 158 नए पदों पर होगी नियुक्ति, लोक सेवा आयोग को भेजा प्रस्ताव; इसी माह 194 चिकित्सकों को भी मिल चुकी है तैनाती

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को गति दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने चिकित्सा अधिकारियों के 228 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें 70 पद बैकलॉग के हैं, जबकि 158 पद नए सृजित पदों के रूप में शामिल किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को उपचार के लिए दूर के अस्पतालों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के इस कदम को प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों की कमी के कारण मरीजों को कई बार बड़े अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों का रुख करना पड़ता है, वहां डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने पर सरकार का जोर है।

228 पदों में पुराने और नए दोनों पद शामिल

स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया में कुल 228 चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। इनमें 70 बैकलॉग पद हैं, जबकि 158 नए पदों को शामिल किया गया है। बैकलॉग पदों को भरने से लंबे समय से रिक्त चल रहे पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ होगा, वहीं नए पदों पर भर्ती से स्वास्थ्य संस्थानों में अतिरिक्त चिकित्सकीय क्षमता विकसित की जा सकेगी।

इन पदों के लिए भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से करवाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे चयन प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप पूरा करने और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देने की व्यवस्था होगी।

सरकार की ओर से स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन बढ़ाने पर इसलिए भी जोर दिया जा रहा है क्योंकि अस्पतालों में केवल बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों में डॉक्टर, विशेषज्ञ और अन्य चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त संख्या होने पर ही स्वास्थ्य सुविधाओं का अपेक्षित लाभ लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सरकार ने विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की दिशा में भी कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के तहत गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में सहायक प्रोफेसर के एक सुपर स्पेशलिटी पद को पदोन्नति के माध्यम से भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सुपर स्पेशलिटी स्तर के चिकित्सकों की उपलब्धता से जटिल बीमारियों के उपचार में मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसे मामलों में मरीजों को कई बार प्रदेश से बाहर के संस्थानों में उपचार करवाना पड़ता है। राज्य के चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार होने से इस तरह के मामलों में स्थानीय स्तर पर उपचार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा अधिकारियों की सामान्य भर्ती और विशेषज्ञ चिकित्सकों से जुड़े पदों को भरने की प्रक्रिया को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य ढांचे में डॉक्टरों की कमी को विभिन्न स्तरों पर दूर करना है।

इसी महीने 194 चिकित्सकों को मिली तैनाती

सरकार ने केवल नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने तक ही कदम सीमित नहीं रखा है। इसी महीने प्रदेश में 194 नए चिकित्सकों की नियुक्ति भी की गई है। इनमें 118 विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं। इन डॉक्टरों ने अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा और सीनियर रेजिडेंसी पूरी की है।

नियुक्त किए गए चिकित्सकों को प्रदेश के विभिन्न नागरिक अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में तैनाती दी गई है। इससे अलग-अलग स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती का असर उन स्वास्थ्य संस्थानों में भी देखने को मिल सकता है जहां अब तक मरीजों को विशेष उपचार के लिए बड़े अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था। सरकार का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं को जिला और उपमंडल स्तर तक मजबूत करने पर है, ताकि सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए मरीजों को यथासंभव स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर फोकस

हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के लिए अलग तरह की चुनौती पेश करती हैं। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में कई स्वास्थ्य संस्थान ऐसे स्थानों पर हैं जहां मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लगता है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकार की ओर से डॉक्टरों की नई भर्ती और नियुक्तियों को इसी व्यापक उद्देश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। चिकित्सा अधिकारियों की संख्या बढ़ने से प्राथमिक और सामुदायिक स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों पर काम का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती से रेफरल अस्पतालों में उपचार की क्षमता बढ़ेगी।

सरकार के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं को केवल बड़े शहरों और मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में भी मजबूत किया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अस्पतालों में मानव संसाधन बढ़ाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

भर्ती के साथ स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की कोशिश

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण कड़ी है। नए पदों को स्वीकृति देने और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया से सरकार भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रख रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 228 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में नए पदों का शामिल होना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य संस्थानों की जरूरतों के अनुरूप चिकित्सकीय मानव संसाधन बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं बैकलॉग पदों को भरने से लंबे समय से रिक्त पदों को भरने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से चिकित्सा सेवाओं के स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सामान्य चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता में वृद्धि से अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सीएम बोले- घर के नजदीक मिले गुणवत्तापूर्ण इलाज

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेशवासियों को उनके घर-द्वार के निकट उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि लोगों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े और उन्हें अपने क्षेत्र के नजदीक ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री के अनुसार 228 नए चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए चिकित्सकों की नियुक्ति और पहले से की जा रही तैनातियों के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाओं की क्षमता बढ़ेगी।

सरकार के स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रही भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया को इसी नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। एक तरफ रिक्त पदों को भरने के लिए लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्नातकोत्तर और सीनियर रेजिडेंसी पूरी कर चुके चिकित्सकों को विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में जिम्मेदारी दी जा रही है।

मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद

228 चिकित्सा अधिकारियों की प्रस्तावित भर्ती और इसी महीने 194 चिकित्सकों की नियुक्ति से प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। खासतौर पर 118 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती से विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सरकार की रणनीति में सामान्य चिकित्सा सेवाओं के साथ विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का विस्तार भी शामिल दिखाई दे रहा है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में सहायक प्रोफेसर के पद को पदोन्नति से भरने की प्रक्रिया शुरू करना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

अब 228 चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद चयन और नियुक्ति का अगला चरण शुरू होगा। इससे प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की मौजूदा कवायद का केंद्रीय उद्देश्य अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों को उनके घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध करवाना है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर प्रदेश के ग्रामीण, दूरदराज और जिला स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता पर पड़ने की उम्मीद है।