हिमाचल में बदलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा का मॉडल, हिमकेयर की जगह नई बीमा योजना में 10 लाख तक कवर

हिमाचल में बदलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा का मॉडल, हिमकेयर की जगह नई बीमा योजना में 10 लाख तक कवर

हिमाचल प्रदेश में लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने वाली हिमकेयर योजना का स्वरूप जल्द बदल सकता है। प्रदेश सरकार अब मौजूदा हिमकेयर व्यवस्था की जगह नया स्वास्थ्य बीमा मॉडल लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव पर निर्णय होने की संभावना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र परिवारों को सालाना 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

नई योजना में सरकार की भूमिका मौजूदा हिमकेयर मॉडल से अलग होगी। वर्तमान व्यवस्था में उपचार के बाद सरकार की ओर से अस्पतालों को भुगतान किया जाता है, जबकि प्रस्तावित नई व्यवस्था में बीमा कंपनी के माध्यम से परिवारों को स्वास्थ्य कवर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सरकार बीमा कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित करेगी और प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर कंपनी का चयन किया जाएगा। कंपनी के चयन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद योजना को लागू करने में करीब तीन महीने का समय लगने का अनुमान है।

स्वास्थ्य विभाग ने नई बीमा योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है। इसमें पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देने के साथ-साथ बीमा मॉडल के तहत वित्तीय जोखिम को व्यवस्थित करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। निविदा प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग बीमा कंपनियां प्रति परिवार स्वास्थ्य कवरेज की लागत के संबंध में अपनी दरें पेश करेंगी। इन्हीं दरों के आधार पर परिवार के लिए सालाना प्रीमियम तय किया जाएगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रति परिवार सालाना प्रीमियम करीब तीन हजार से पांच हजार रुपये के बीच रहने का अनुमान जताया जा रहा है। हालांकि वास्तविक प्रीमियम निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा। इसका अर्थ यह है कि अभी बताई जा रही प्रीमियम राशि अनुमानित है और अंतिम दर बीमा कंपनियों की बोली तथा सरकार द्वारा तय शर्तों पर निर्भर करेगी।

नई योजना में पात्र परिवारों को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर देने का प्रावधान प्रस्तावित है। यह मौजूदा हिमकेयर योजना के पांच लाख रुपये के वार्षिक कैशलेस उपचार कवर की तुलना में दोगुना होगा। सरकार की ओर से पहले ही स्वास्थ्य सुरक्षा के मौजूदा मॉडल को बीमा आधारित व्यवस्था में बदलने और कवर राशि बढ़ाने के संकेत दिए जाते रहे हैं। अब इस दिशा में प्रस्तावित योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी की जा रही है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों और महंगे उपचार के दौरान अधिक वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है। 10 लाख रुपये तक के बीमा कवर से परिवारों को बड़े अस्पताल खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि योजना में किन-किन उपचारों, प्रक्रियाओं और अस्पतालों को शामिल किया जाएगा, इसका अंतिम विवरण सरकार और चयनित बीमा कंपनी के बीच तय होने वाली शर्तों के आधार पर स्पष्ट होगा।

नई योजना में राशनकार्ड बनेगा परिवार की पहचान का आधार

प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना में परिवार को राशनकार्ड के आधार पर कवर किए जाने की व्यवस्था रखी गई है। इसके तहत एक परिवार में पति-पत्नी, बच्चे और उन पर निर्भर माता-पिता को शामिल करने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि माता-पिता को योजना में शामिल करने के लिए यह शर्त होगी कि वे संबंधित परिवार पर निर्भर हों और किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य प्रतिपूर्ति या बीमा योजना के अंतर्गत कवर न होते हों।

इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ही परिवार के सदस्यों को एक साझा स्वास्थ्य सुरक्षा दायरे में लाना है। इससे लाभार्थियों की पहचान और योजना के दायरे में आने वाले सदस्यों का निर्धारण राशनकार्ड के आधार पर किया जा सकेगा। पात्रता संबंधी अंतिम नियम सरकार की मंजूरी और योजना के औपचारिक लागू होने के बाद स्पष्ट होंगे।

हिमकेयर तब तक जारी रहेगी

नई व्यवस्था लागू होने तक हिमकेयर योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को उपचार की सुविधा मिलती रहेगी। यानी नई बीमा कंपनी के चयन और योजना के संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के दौरान मौजूदा लाभार्थियों की स्वास्थ्य सुविधाएं अचानक बंद नहीं होंगी।

सरकार की योजना है कि हिमकेयर से नई बीमा व्यवस्था में बदलाव चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से किया जाए। इसके लिए बीमा कंपनी का चयन, अनुबंध, लाभार्थियों का डेटा और अस्पतालों से संबंधित व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के बाद नई योजना शुरू की जाएगी। अनुमान के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन महीने लग सकते हैं।

इस बीच हिमकेयर के मौजूदा लाभार्थी पहले की तरह योजना के तहत निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते रहेंगे। इससे सरकार को नई व्यवस्था तैयार करने के लिए आवश्यक समय भी मिलेगा और पात्र परिवारों की स्वास्थ्य सुविधाओं में अचानक व्यवधान की स्थिति नहीं बनेगी।

पांच लाख से बढ़कर 10 लाख होगा सुरक्षा कवच

मौजूदा हिमकेयर योजना के तहत पात्र परिवार को एक वर्ष में पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। प्रस्तावित नई बीमा व्यवस्था में इस सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की तैयारी है। इस तरह स्वास्थ्य सुरक्षा की अधिकतम राशि दोगुनी हो जाएगी।

सरकार का मानना है कि इलाज की बढ़ती लागत को देखते हुए स्वास्थ्य बीमा कवर में वृद्धि जरूरी है। गंभीर बीमारियों, बड़ी सर्जरी और लंबे उपचार पर होने वाला खर्च कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अधिक बीमा कवर परिवारों को उपचार के दौरान आर्थिक जोखिम से बचाने में मदद कर सकता है।

नई व्यवस्था में बीमा कंपनी अस्पतालों और लाभार्थियों के बीच स्वास्थ्य बीमा कवर की प्रक्रिया को संभालेगी। सरकार की ओर से निविदा के माध्यम से चयनित कंपनी को तय शर्तों के तहत काम करना होगा। बीमा कंपनी की सेवाओं और दावों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार की ओर से नियम निर्धारित किए जाने की संभावना है।

निविदा से तय होगी बीमा कंपनी

स्वास्थ्य विभाग नई योजना को लागू करने के लिए बीमा कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित करेगा। कंपनियों को योजना के तहत परिवारों को उपलब्ध कराए जाने वाले स्वास्थ्य कवर और उसकी लागत के आधार पर अपनी बोली प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार कंपनी का चयन किया जाएगा।

प्रति परिवार प्रीमियम की अंतिम राशि भी इसी प्रक्रिया से तय होगी। फिलहाल विभागीय स्तर पर तीन हजार से पांच हजार रुपये सालाना प्रीमियम का अनुमान लगाया गया है, लेकिन यह राशि अंतिम नहीं मानी जा रही है। निविदा में मिलने वाली दरों और सरकार द्वारा तय शर्तों के आधार पर वास्तविक प्रीमियम सामने आएगा।

सरकार का प्रयास है कि बीमा मॉडल अपनाने से योजना की वित्तीय व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो और लाभार्थियों को भी अधिक व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो। साथ ही बीमा कंपनी के माध्यम से दावों और उपचार संबंधी भुगतान की प्रक्रिया को संचालित करने का मॉडल अपनाया जाएगा।

तीन महीने में नई व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य

मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसके बाद बीमा कंपनी के चयन और समझौते सहित अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सरकार का अनुमान है कि इन प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद करीब तीन महीने में नई योजना को जमीन पर उतारा जा सकता है।

योजना में नवंबर से बदलाव किए जाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि अंतिम समयसीमा मंत्रिमंडल की मंजूरी, निविदा प्रक्रिया और बीमा कंपनी के चयन के बाद ही स्पष्ट होगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होगी कि मौजूदा हिमकेयर लाभार्थियों को नई व्यवस्था में सुचारु रूप से स्थानांतरित किया जा सके।

नई योजना के लागू होने के बाद प्रदेश के पात्र परिवारों को स्वास्थ्य खर्च के लिए पहले की तुलना में अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। 10 लाख रुपये तक का प्रस्तावित कवर विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिन्हें गंभीर बीमारी या महंगे उपचार की स्थिति में बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।

इस तरह हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा का मौजूदा हिमकेयर मॉडल अब बीमा आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकार का प्रस्ताव मौजूदा पांच लाख रुपये के कवर को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने, बीमा कंपनी के माध्यम से उपचार कवर उपलब्ध कराने और पात्र परिवारों को राशनकार्ड के आधार पर जोड़ने पर केंद्रित है। अब इस प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही नई व्यवस्था की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।