गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ गणपति उत्सव अब विसर्जन के चरण में पहुंच गया है। जिन श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमा अपने घर में सात दिनों के लिए स्थापित की थी, वे 20 सितंबर 2026, रविवार को बप्पा को विदाई देंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार गणेश जी की पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद विधि-विधान से उनका विसर्जन किया जाता है। मान्यता है कि विसर्जन के साथ गणपति अपने धाम लौटते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि तथा मंगल का आशीर्वाद देते हैं।
गणेश उत्सव भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी से आरंभ होता है। हालांकि आमतौर पर यह पर्व दस दिनों तक चलने के लिए जाना जाता है, लेकिन श्रद्धालु अपनी परंपरा, श्रद्धा और सुविधा के अनुसार अलग-अलग अवधि के लिए गणेश प्रतिमा स्थापित करते हैं। कुछ लोग डेढ़ दिन बाद विसर्जन करते हैं, जबकि कई परिवार 3, 5, 7 या 10 दिनों तक गणपति की पूजा करते हैं।
अगर आपके घर में भी बप्पा की स्थापना सात दिनों के लिए हुई थी, तो आज विसर्जन का दिन है। विसर्जन से पहले भगवान गणेश की अंतिम पूजा, आरती और भोग की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद परिवार के सदस्य श्रद्धा के साथ गणपति प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं।
विसर्जन से पहले इस तरह करें बप्पा की अंतिम पूजा
गणेश विसर्जन को केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि इसे पूजा के समापन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसलिए विसर्जन से पहले घर में गणपति की विधिवत पूजा करना शुभ माना जाता है।
सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें और गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान को ताजे फूल, दूर्वा, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें। पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य शामिल हो सकते हैं। इसके बाद बप्पा को उनकी पसंद का भोग लगाया जाता है। मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग लगाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है।
भोग लगाने के बाद गणेश जी की आरती करें। परिवार के सदस्य मिलकर गणपति के मंत्रों का जाप और प्रार्थना कर सकते हैं। इस दौरान घर के वातावरण को भक्तिमय रखने की कोशिश करें और श्रद्धा के साथ भगवान से सुख-शांति की कामना करें।
भूल-चूक के लिए भगवान से मांगें क्षमा
अंतिम पूजा के दौरान भक्त हाथ में फूल और अक्षत लेकर गणेश जी के सामने अपनी प्रार्थना रख सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई किसी गलती के लिए भगवान से क्षमा मांगना उचित माना जाता है।
इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा पर अक्षत और पुष्प अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक अपने स्थान से हटाने की प्रक्रिया शुरू करें। प्रतिमा को जल्दबाजी में उठाने के बजाय परिवार के सदस्य मिलकर श्रद्धा और सावधानी के साथ उसे विसर्जन के लिए ले जाएं।
गणपति विसर्जन के लिए ये हैं शुभ चौघड़िया
20 सितंबर को सातवें दिन गणेश विसर्जन के लिए अलग-अलग समय बताए गए हैं। चौघड़िया के अनुसार दिन में कई शुभ अवधि उपलब्ध हैं, जिनमें भक्त अपनी सुविधा के अनुसार विसर्जन कर सकते हैं।
प्रातःकाल का मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में चर, लाभ और अमृत चौघड़िया शामिल हैं।
इसके बाद अपराह्न का शुभ समय दोपहर 2 बजकर 3 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शुभ चौघड़िया बताया गया है।
सायंकाल का मुहूर्त शाम 6 बजकर 37 मिनट से रात 11 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शुभ, अमृत और चर चौघड़िया का समय शामिल है।
अगर किसी कारण से रात में विसर्जन करना हो तो रात्रि का लाभ मुहूर्त 21 सितंबर को रात 2 बजकर 1 मिनट से 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उषाकाल का शुभ समय सुबह 4 बजकर 58 मिनट से 6 बजकर 27 मिनट तक बताया गया है।
इसके अलावा सातवें दिन गणेश विसर्जन के लिए एक अन्य गणना के अनुसार सुबह 7 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक का समय, दोपहर 1 बजकर 47 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक का समय और शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात 10 बजकर 47 मिनट तक का समय भी शुभ बताया गया है। अलग-अलग पंचांग या स्थान के आधार पर मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय मिलाना उचित रहेगा।
बप्पा को घर से विदा करते समय क्या करें?
पूजा समाप्त होने के बाद गणेश जी को विसर्जन के लिए ले जाने की तैयारी की जाती है। प्रतिमा को चौकी या सुरक्षित आधार सहित उठाकर घर के मुख्य द्वार तक लाया जाता है। इस दौरान परिवार के लोग भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए उन्हें विदाई देते हैं।
परंपरा के अनुसार इस अवसर पर ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ जैसे जयघोष किए जाते हैं। इसका उद्देश्य भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और अगले वर्ष उनके दोबारा आगमन की कामना करना है।
विसर्जन के समय प्रतिमा को सावधानी से संभालना चाहिए। रास्ते में प्रतिमा को किसी असुरक्षित जगह पर रखने या जल्दबाजी में ले जाने से बचना चाहिए। यदि परिवार में छोटे बच्चे शामिल हों तो उन्हें भी विसर्जन की धार्मिक परंपरा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझाई जा सकती है।
घर पर करना हो विसर्जन तो अपनाएं यह तरीका
हर परिवार के लिए नदी, तालाब या अन्य जलाशय तक जाना संभव नहीं होता। ऐसे में घर पर भी गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है। इसके लिए एक बड़ा और साफ पात्र, टब या बाल्टी ली जा सकती है, जिसमें पर्याप्त पानी हो।
पात्र में साफ पानी भरने के बाद उसमें गंगाजल और फूल डाले जा सकते हैं। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक पानी में विसर्जित किया जाता है। प्रतिमा को पानी में रखते समय उसे धीरे-धीरे और सम्मान के साथ विसर्जित करना चाहिए।
घर पर विसर्जन करने का एक फायदा यह भी है कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से विसर्जित किया जा सकता है और परिवार के बुजुर्ग, बच्चे तथा अन्य सदस्य भी पूरी प्रक्रिया में शामिल रह सकते हैं।
विसर्जन के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
गणेश विसर्जन के समय धार्मिक श्रद्धा के साथ पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि प्रतिमा का विसर्जन किसी प्राकृतिक जलस्रोत में किया जा रहा है, तो स्थानीय प्रशासन के निर्देशों और निर्धारित विसर्जन स्थल का पालन करना चाहिए। प्रतिमा के साथ ऐसी सामग्री जलाशय में नहीं डालनी चाहिए जो पानी को नुकसान पहुंचा सकती हो।
पूजा सामग्री को भी अलग तरीके से रखने की व्यवस्था की जा सकती है। फूल और अन्य जैविक सामग्री के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उचित व्यवस्था का इस्तेमाल करना बेहतर है। विसर्जन स्थल पर भीड़ हो तो धैर्य रखें और प्रशासन या आयोजन समिति द्वारा बताए गए रास्ते और नियमों का पालन करें।
क्यों माना जाता है विसर्जन को पूजा का समापन?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान के अंत में विसर्जन अथवा उद्यापन का महत्व बताया गया है। गणेश उत्सव में भी स्थापना के बाद कई दिनों तक भगवान की पूजा की जाती है और अंत में विसर्जन के माध्यम से उत्सव का समापन किया जाता है।
गणपति विसर्जन भक्तों के लिए भावनात्मक अवसर भी होता है। कई दिनों तक घर में विराजमान रहने के बाद जब गणेश जी की प्रतिमा को विदाई दी जाती है, तो भक्त अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की प्रार्थना करते हैं। इसी कारण विसर्जन के दौरान उत्साह के साथ-साथ श्रद्धा और भावुकता का माहौल भी देखने को मिलता है।
सातवें दिन गणेश विसर्जन करने वाले श्रद्धालु पहले अंतिम पूजा और आरती करें, भगवान को भोग लगाएं और परिवार के साथ प्रार्थना करें। इसके बाद शुभ समय में प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं। घर पर विसर्जन की स्थिति में साफ पानी से भरे बड़े पात्र का इस्तेमाल करें। इस तरह पूजा की परंपरा को श्रद्धा, व्यवस्थित तरीके और सावधानी के साथ पूरा किया जा सकता है।




