एशियन गेम्स के चौथे दिन भारत के खाते में कई अहम उपलब्धियां जुड़ीं। सबसे बड़ी खबर वेटलिफ्टिंग से आई, जहां स्टार भारतीय खिलाड़ी मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उनके इस पदक के साथ एशियन गेम्स में भारत का वेटलिफ्टिंग मेडल का 28 साल लंबा इंतजार खत्म हो गया।
मीराबाई ने बुधवार को कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया और प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्होंने स्नैच राउंड में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का वजन सफलतापूर्वक उठाया। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। भारत को इससे पहले एशियन गेम्स की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में 1998 में मेडल मिला था। उस साल कर्णम मल्लेश्वरी ने सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इसके बाद भारतीय वेटलिफ्टिंग को एशियन गेम्स में पोडियम फिनिश का इंतजार था, जिसे अब मीराबाई ने समाप्त किया है।
मीराबाई के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स में यह उनका पहला मेडल है। 32 वर्षीय भारतीय वेटलिफ्टर इससे पहले ओलिंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीत चुकी हैं। अब उनके करियर की उपलब्धियों में एशियन गेम्स का सिल्वर भी शामिल हो गया है।
रोशिबिना देवी ने वुशु के फाइनल में बनाई जगह
भारत के लिए चौथे दिन वुशु से भी अच्छी खबर सामने आई। भारतीय खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने महिलाओं की 60 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में प्रवेश कर लिया है। फाइनल में पहुंचने के बाद अब उनकी नजर गोल्ड मेडल पर होगी। रोशिबिना लंबे समय से भारतीय वुशु की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रही हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। एशियन गेम्स में उनके फाइनल तक पहुंचने से भारत के मेडल खाते में एक और पदक जुड़ने की उम्मीद बढ़ गई है।
मीराबाई के सिल्वर और रोशिबिना के फाइनल में पहुंचने के साथ भारत के लिए एशियन गेम्स का चौथा दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। एक ओर वेटलिफ्टिंग में लंबे अंतराल के बाद पदक आया, वहीं वुशु में भारत के पास गोल्ड जीतने का मौका बन गया है।
शूटिंग में भारत ने जीते दो ब्रॉन्ज
एशियन गेम्स के चौथे दिन भारत के मेडल अभियान में शूटिंग का भी अहम योगदान रहा। शॉटगन शूटिंग के स्कीट टीम इवेंट में भारतीय महिला टीम ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। रायजा ढिल्लों, परिनाज धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की भारतीय महिला टीम ने कुल 331 अंक जुटाए और तीसरे स्थान पर रही। टीम के प्रदर्शन ने भारत को दिन का एक और पदक दिलाया।
पुरुषों की स्कीट टीम स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों ने पोडियम फिनिश हासिल किया। अनंतजीत सिंह नारुका, मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह गिल की टीम ने शूट-ऑफ में कजाकिस्तान को पीछे छोड़ते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता।
इस तरह शॉटगन शूटिंग से भारत को एक ही दिन में दो पदक हासिल हुए। भारतीय निशानेबाजों ने टीम इवेंट में दबाव के बीच अच्छा प्रदर्शन किया और दोनों वर्गों में देश के लिए मेडल सुनिश्चित किए।
सॉफ्ट टेनिस में जय मीणा ने भी दिलाया पदक
भारत के लिए चौथे दिन एक और पदक सॉफ्ट टेनिस से आया। जय मीणा ने इस खेल में भारत के लिए मेडल हासिल किया। शूटिंग और सॉफ्ट टेनिस के पदकों के साथ मीराबाई चानू का सिल्वर भारत के मेडल अभियान में महत्वपूर्ण योगदान रहा। दिन के अलग-अलग खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन के चलते मेडल टैली में भारत की स्थिति मजबूत हुई। हालांकि कई मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों को पदक से भी चूकना पड़ा।
मनु भाकर फाइनल में पांचवें स्थान पर रहीं
शूटिंग की स्टार खिलाड़ी मनु भाकर महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं। वह फाइनल में पांचवें स्थान पर रहीं। मनु से पदक की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन फाइनल में उनका प्रदर्शन मेडल के लिए पर्याप्त नहीं रहा। मुकाबले के बाद उन्होंने खुद को संभाले रखा। हालांकि मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे जसपाल राणा का जिक्र हुआ तो वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए।
जसपाल राणा भारतीय शूटिंग से जुड़े प्रमुख नामों में रहे हैं। कुछ महीने पहले 49 वर्ष की उम्र में दिल से जुड़ी समस्या के कारण उनका निधन हो गया था। मनु भाकर और जसपाल राणा के बीच लंबे समय तक कोच और खिलाड़ी के तौर पर संबंध रहा है। यही वजह रही कि उनका नाम सामने आने पर मनु भावुक हो गईं।
बराबर अंक के बाद भी ब्रॉन्ज से दूर रह गया भारत
महिलाओं की 10 मीटर पिस्टल से जुड़े टीम वर्ग में भारत बेहद मामूली अंतर से पदक से चूक गया। मनु भाकर, ईशा और सुरुचि की भारतीय टीम ने मिलकर 1719 अंक हासिल किए। दिलचस्प बात यह रही कि इतने ही अंक वियतनाम की टीम ने भी बनाए। स्कोर बराबर होने के कारण दोनों टीमों के बीच पदक का फैसला टाई-ब्रेक नियम से हुआ।
ऐसी स्थिति में केवल कुल स्कोर देखना पर्याप्त नहीं होता। बराबरी होने पर खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए परफेक्ट 10 की संख्या को भी आधार बनाया जाता है। वियतनाम की टीम ने इस मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया। वियतनाम के निशानेबाजों ने कुल 46 परफेक्ट 10 लगाए, जबकि भारतीय टीम के खिलाड़ियों के खाते में 44 परफेक्ट 10 रहे। इसी टाई-ब्रेक के कारण वियतनाम तीसरे स्थान पर रहा और भारत चौथे स्थान पर खिसक गया।
इस स्पर्धा में चीन ने 1735 अंक के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। दक्षिण कोरिया ने 1730 अंक जुटाकर सिल्वर अपने नाम किया। भारत और वियतनाम के 1719-1719 अंक रहे, लेकिन परफेक्ट 10 के आधार पर वियतनाम को ब्रॉन्ज मिला।
चौथे दिन भारत के खाते में कई पदक
एशियन गेम्स के चौथे दिन भारत को कुल चार पदक मिलने की जानकारी सामने आई। इनमें दो पदक शॉटगन शूटिंग के स्कीट टीम इवेंट से आए। सॉफ्ट टेनिस में जय मीणा ने एक पदक जीता और वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल हासिल किया। मीराबाई की उपलब्धि इन पदकों के बीच इसलिए खास रही क्योंकि इससे भारतीय वेटलिफ्टिंग ने लंबे समय बाद एशियन गेम्स में वापसी दर्ज की। 1998 के बाद पहली बार भारत को इस खेल में पदक मिला है।
मीराबाई का प्रदर्शन उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की उपलब्धियों में भी एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। ओलिंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स तक पदक जीत चुकीं मीराबाई ने अब एशियन गेम्स में भी अपना नाम मेडलिस्ट के तौर पर दर्ज करा लिया है।
भारत की मेडल टैली में 12 पदक
चौथे दिन के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में कुल 12 पदक बताए गए हैं। इनमें एक गोल्ड, पांच सिल्वर और छह ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत मेडल टैली में 13वें स्थान पर है। भारत के पास अभी प्रतियोगिता में कई खेलों में पदक जीतने के अवसर मौजूद हैं। खास तौर पर रोशिबिना देवी के वुशु फाइनल में पहुंचने के बाद भारत की नजर एक और पदक पर रहेगी।
दूसरी ओर मेडल टैली में चीन सबसे ऊपर बना हुआ है। चीन के खाते में 47 गोल्ड मेडल हैं और वह पदक तालिका में शीर्ष स्थान पर है। एशियन गेम्स में चीन के खिलाड़ियों का प्रदर्शन अब तक मजबूत रहा है और गोल्ड मेडल की संख्या के मामले में वह अन्य देशों से आगे है।
भारत के लिए प्रतियोगिता का शुरुआती सफर कई उतार-चढ़ाव वाला रहा है। कुछ स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने पदक हासिल किए, जबकि कुछ में बेहद मामूली अंतर से मेडल हाथ से निकल गया। मनु भाकर की टीम का वियतनाम के साथ बराबर स्कोर के बावजूद ब्रॉन्ज से चूकना इसका उदाहरण रहा।
वहीं मीराबाई चानू का सिल्वर भारतीय दल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गई। 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में भारत के खाते में आया यह पदक भारतीय खेल जगत के लिए अहम रहा। अब रोशिबिना देवी के फाइनल मुकाबले और बाकी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।




